शिमला, राज्य ब्यूरो। अठारह वर्ष की उम्र होने पर वोट बना लेना ही दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में भागीदारी नहीं है। मतदान करना हम सबका अधिकार ही नहीं, कर्तव्य भी है। अपने, समाज और देश के सुनहरी भविष्य के लिए सोच-समझकर मतदान करना जरूरी है।

संविधान में हर नागरिक जिसकी उम्र 18 साल या इससे अधिक है, उसे अपना वोट बनाने और पसंद की सरकार चुनने का अधिकार है। हालांकि 18 साल का हो  जाने से आप वोट डालने के हकदार नहीं हो जाते हैं। इसके लिए आपको अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करना होगा। आपके पास फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य है। हालांकि भारतीय निर्वाचन आयोग ने ऐसे 12 दस्तावेज निर्धारित किए हैं जो व्यक्ति की पहचान को साबित करते हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर भी मत डाला जा सकता है। इनमें फोटो

पहचान पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राज्य व केंद्र सरकार के उपक्रमों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र, बैंकों व डाकघरों द्वारा जारी की गई फोटोयुक्त पासबुक, पैन कार्ड, स्वास्थ्य बीमा के तहत आरजीआइ द्वारा जारी स्मार्टकार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना के अंतर्गत जारी

स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज, सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों को जारी पहचान पत्र और आधार कार्ड।

एनआरआइ भी दे सकेंगे मत

लोकसभा चुनाव में अप्रवासी भारतीय (एनआरआइ) भी देश की सरकार चुनने के लिए मत का प्रयोग कर सकेंगे। वर्ष 2010 से पूर्व एनआइआइ को मतदान का अधिकार नहीं था। 2010 में नियमों में फेरबदल किया गया और एनआरआइ को भी वोट डालने का अधिकार मिला। जो व्यक्ति छह महीने से अधिक समय से भारत से बाहर हैं, वे भी मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकते हैं। ऐसे एनआरआइ को चुनाव के दिन

मतदान के लिए भारत आना होगा।  

19 अप्रैल तक बनवाएं वोट

लोकसभा चुनाव के लिए हिमाचल में 19 मई को मतदान होगा। इसके लिए 19 अप्रैल तक पात्र नागरिक वोट बनवा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन या मतदान केंद्र पर जाकर भी वोट बनाया जा सकता है। हर

व्यक्ति को एक चुनाव में एक ही बार वोट डालने का अधिकार है। वोट निर्वाचन क्षेत्र के निर्धारित मतदान केंद्र पर डालना होता  है। व्यक्ति एक ही निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत हो सकता है। वह अपने स्थायी या अस्थायी निवास में से किसी एक ही जगह पर मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकता है। मतदाताओं को अधिकार है कि वे अपने चुनाव क्षेत्र को भी बदल सकते हैं। वे जिस भी राज्य में अस्थायी रूप से निवास कर रहे हैं, वहां अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। नाम जुडने से पहले उन्हें अपना नाम पुरानी मतदाता सूची से कटवाना होगा।

 एक फीसद मतदान

आजादी के 71 वर्षों बाद भी कुछ लोग मतदान के अधिकार व कर्तव्य को नहीं समझ सके हैं। चुनाव के दौरान कुछ मतदान केंद्रों पर एक फीसद तक भी मतदान दर्ज किया गया है। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र के तहत भद्र मतदान केंद्र पर जीरो फीसद, मंडी लोकसभा क्षेत्र के तहत करसोग के परलोग में 1.10 फीसद और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत नागलांबर मतदान केंद्र पर 5.05 फीसद मतदान हुआ था।

कैसे दर्ज करवाएं मतदाता सूची में नाम

लोकसभा चुनाव में मतदान करने के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना अनिवार्य है। यह नाम दर्ज करवाने के लिए तीन तरह के फार्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए व्यक्ति की पहचान और निवास स्थान को दर्शाने वाला दस्तावेज जरूरी है। आधार कार्ड, फोटो पहचान पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राशनकार्ड, पानी, बिजली, टेलीफोन का बिल या स्थायी निवास के पते का

दस्तावेज इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • फार्म नंबर-6 : भारतीय नागरिक को यह फार्म भरना होगा।
  • फार्म नंबर-6 ए : एनआरआइ को यह फार्म भरना जरूरी।
  • फार्म नंबर-2 : सैनिकों व अर्धसैनिक बलों के लिए।


नोटा का क्या लाभ

मतदान के दौरान नन ऑफ द अबव (नोटा) बटन दबाने का अर्थ है कि मतदाता को चुनाव लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है। इसलिए नोटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। नोटा का बटन दबाकर

राजनीतिक दलों को यह बताया जा सकता है कि उनके प्रत्याशियों के बारे में आम मतदाता की क्या राय है।  

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