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Lok Sabha Election 2024: हुड्डा के गढ़ में चेहरों और चौधर पर लड़ी जा रही जंग, जाट और गैर जाट में फंसी सीट

Rohtak Lok Sabha Election 2024 हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट पर करीबी मुकाबला है। पिछली बार मामूली अंतर से हारने वाले दीपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए पारिवारिक रसूख मददगार बन रहा है। जबकि सोनीपत करनाल और रोहतक से सांसद रह चुके डॉ. अरविंद शर्मा को मोदी और मनोहर के नाम पर जीत की आस है। जानिए क्या हैं इस सीट पर समीकरण।

By Jagran News Edited By: Sachin Pandey Published: Sun, 19 May 2024 06:00 AM (IST)Updated: Sun, 19 May 2024 06:00 AM (IST)
Lok Sabha Election 2024: भाजपा ने वर्तमान सांसद अरविंद शर्मा को दोबारा रोहतक से मैदान में उतारा है।

अनुराग अग्रवाल, रोहतक। हरियाणा के पांच जिलों जींद, सोनीपत, भिवानी, झज्जर और हिसार से घिरी जाट बहुल रोहतक लोकसभा सीट में चौधर की जंग के लिए मुकाबला हो रहा है। पूरे 10 साल तक कांग्रेस की सरकार चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा चार बार यहां से सांसद रह चुके हैं।

उनके पिता स्व. रणबीर सिंह हुड्डा ने दो बार और बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने तीन बार रोहतक लोकसभा का चुनावी रण जीता है। 1962 में जनसंघ की जीत के बाद साल 2019 में भाजपा ने पहली बार जाट बहुल रोहतक लोकसभा क्षेत्र में कमल का फूल खिलाने में कामयाबी हासिल की थी।

इनके बीच टक्कर

कांग्रेस के मौजूदा उम्मीदवार दीपेंद्र सिंह हुड्डा राज्यसभा सदस्य हैं, जो चौधर का नारा देते हुए चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने सोनीपत से निर्दलीय, करनाल से कांग्रेस और रोहतक से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते डॉ. अरविंद शर्मा को दोबारा दीपेंद्र हुड्डा के मुकाबले चुनाव मैदान में उतारा है।

यह सीट कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर में फंसी हुई है। रोहतक में हुड्डा परिवार का राजनीतिक दबदबा होने के बावजूद इस सीट पर किसी भी उम्मीदवार की जीत-हार में जाट व गैर जाट के समीकरण प्रभावी रहने वाले हैं।

हुड्डा परिवार ने लगाई ताकत

छठे चरण में 25 मई को होने वाले चुनाव में अब कुछ ही समय बाकी बचा है। इस सीट को जीतने के लिए हुड्डा परिवार ने अपनी पूरी ताकत लगाई हुई है, जबकि भाजपा खासकर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल किसी सूरत में रोहतक लोकसभा सीट खोने देना नहीं चाहते हैं। हुड्डा परिवार अकेला ही रोहतक का रण जीतने के लिए प्रयासरत है।

उनके साथ एसआरके गुट यानी कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी के बाद अब बीरेंद्र सिंह रोहतक में कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। सैलजा स्वयं सिरसा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि हिसार में बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह और भिवानी-महेंद्रगढ़ में किरण चौधरी की पूर्व सांसद बेटी श्रुति चौधरी का टिकट कटवाने में हुड्डा की अहम भूमिका रही है। रणदीप सुरजेवाला राजस्थान से राज्यसभा सदस्य हैं। एसआरके गुट का पूरा फोकस कुमारी सैलजा के चुनाव पर है।

सिरसा में नहीं की इंट्री

हुड्डा रोहतक के अलावा राज्य के बाकी नौ लोकसभा क्षेत्रों में भी चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं, मगर सिरसा में उन्होंने इंट्री नहीं की है। न सैलजा रोहतक आई और न हुड्डा सिरसा गए। एक समय हुड्डा के लिए अपनी किलोई विधानसभा सीट खाली करने वाले पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

इनेलो से भाजपा में शामिल हो चुके बड़े जाट नेता सतीश नांदल का फायदा भी भाजपा के डॉ. अरविंद शर्मा उठाने की कोशिश में हैं। हरियाणा भाजपा के जाट नेता ओमप्रकाश धनखड़ और सुभाष बराला उनके साथ हैं। भाजपा के निवर्तमान सांसद डा. अरविंद शर्मा को दीपेंद्र हुड्डा की तरह चुनाव लड़ने में माहिर माना जाता है। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर से मनोहर लाल ने उनके गिले शिकवे दूर करा दिए हैं, जिसका भाजपा को फायदा मिलने की संभावना है।

जजपा ने उतारा जाट उम्मीदवार

जननायक जनता पार्टी ने रोहतक से जाट उम्मीदवार रवींद्र सांगवान को चुनाव मैदान में उतारा है, जो कि कांग्रेस के जाट वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकते हैं। भूपेंद्र हुड्डा जजपा खासकर दुष्यंत चौटाला के लिए बार-बार कह रहे हैं कि वे कांग्रेस के वोट काटने के लिए चुनाव लड़वा रहे हैं। दीपेंद्र हुड्डा चूंकि रोहतक के रहने वाले हैं और मतदाताओं के सामने उनके लोकल होने के साथ चौधर इस संसदीय क्षेत्र में लाने का मुद्दा उठा रहे हैं।

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अरविंद शर्मा झज्जर जिले के गांव माजरा के रहने वाले हैं, जिसका उन्हें लाभ मिल रहा है। निसंदेह यह चुनाव भाजपा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर और कांग्रेस हुड्डा व दीपेंद्र की चौधर के लिए चुनाव मैदान में है, लेकिन यहां मुद्दों से ज्यादा चर्चा चेहरों और चौधर की चर्चा है। बसपा उम्मीदवार राजेश बैरागी अपना समर्थन दीपेंद्र सिंह हुड्डा को दे चुके हैं।

जाट और गैर जाट राजनीति के बन रहे समीकरण

रोहतक की महम, गढ़ी सांपला किलोई, रोहतक और कलानौर, झज्जर जिले की बहादुरगढ़, बादली, झज्जर व बेरी तथा रेवाड़ी जिले की कोसली विधानसभा सीट के क्षेत्रफल में यह लोकसभा सीट फंसी हुई है। पिछले चुनाव में भाजपा के डॉ. अरविंद शर्मा ने कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा को सिर्फ साढ़े सात हजार मतों के अंतर से पराजित किया था। कोसली में दीपेंद्र हुड्डा की करीब 75 हजार मतों से हार हुई थी।

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इसलिए दीपेंद्र का पूरा फोकस कोसली विधानसभा सीट से लीड लेने की है, जबकि इस सीट पर भाजपा के अरविंद शर्मा भी काम कर रहे हैं। अरविंद शर्मा को केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत का सहारा है, जबकि दीपेंद्र हुड्डा को पूर्व मंत्री जगदीश यादव और भिवानी से कांग्रेस के उम्मीदवार राव दान सिंह के प्रभाव के मत मिलने की आस है।

इस सीट पर गैर जाट मतदाता निर्णायक होने के बावजूद जाटों के वोटों का पूरा असर रहता है। करीब 18 लाख मतों में 7 लाख जाट, तीन लाख एससी, पौने दो लाख अहीर, सवा लाख से ज्यादा पंजाबी व इतने ही ब्राह्मण वोट रोहतक में किसी भी समीकरण को गड़बड़ाने के लिए काफी हैं।

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