राजकुमार श्रीवास्तव, प्रयागराज : वर्तमान में प्रयागराज से लखनऊ के बीच भले ही कई ट्रेनें हैं। परिवहन निगम की लग्जरी बस सेवा भी उपलब्ध है, लेकिन तीन दशक पहले मात्र एक ट्रेन चलती थी। वह भी यहां से सीधे लखनऊ नहीं जाती थी। इससे लोग परेशान होते थे। खासकर इस रूट के नौकरीपेशा और छात्रों की दिक्कत अधिक थी। शहर के कर्मचारियों की मांग पर वर्ष 1985 में गंगा गोमती एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन शुरू किया गया। यह ट्रेन चुनावी तोहफा थी। किसी समय यह इस रूट की सबसे अच्छी ट्रेन मानी जाती थी। 

 1984 में फूलपुर लोक सभा सीट से रामपूजन के सामने रहमान अली थे

वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर संसदीय सीट से रामपूजन पटेल कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे। उनका मुकाबला संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के रहमान अली से था। रामपूजन के समर्थन में कांग्रेस पार्टी की मजदूर विंग के नेताओं ने दो सभाएं आयोजित कराने का निर्णय लिया। इन सभाओं में तत्कालीन रेलमंत्री अब्दुल गनी खां चौधरी भी आए थे। वह पश्चिम बंगाल के मालदा से सांसद थे और डायरेक्ट ऑफ डिफेंस ऑडिट वेस्ट बंगाल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष भी। उनकी ख्याति दिग्गज कांग्रेसी के साथ कर्मचारी नेता के रूप में भी थी। 

रेलमंत्री अब्दुल गनी खान से कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने ट्रेन की मांग की

कांग्रेस प्रत्याशी रामपूजन पटेल के समर्थन में एक सभा कताई मिल मऊआइमा और दूसरी इफ्को फूलपुर में रखी गई। इसमें शामिल होने के लिए तत्कालीन रेलमंत्री अब्दुल गनी खान इलाहाबाद (अब प्रयागराज) आए तो सर्किट हाउस में ठहरे। केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल इलाहाबाद लोकसभा सीट से तत्कालीन सांसद रहे केपी तिवारी के नेतृत्व में उनसे सर्किट हाउस में मिलने पहुंचा। कर्मचारियों ने इलाहाबाद से लखनऊ के लिए सीधी ट्रेन चलाने की मांग उनसे की। 

रेलमंत्री ने प्रत्याशियों को जिताने की अपील संग ट्रेन चलाने का दिया आश्वासन

वरिष्ठ कर्मचारी नेता केएस श्रीवास्तव बताते हैं कि चुनावी सभाओं में अब्दुल गनी खान ने कर्मचारियों से कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने की अपील की। साथ ही वादा किया कि रामपूजन के चुनाव जीतने के बाद इलाहाबाद से लखनऊ के लिए सीधी ट्रेन देंगे। चुनाव खत्म होते ही 26 जनवरी 1985 को गंगा गोमती ट्रेन का संचालन शुरू हुआ। इस टे्रन के पहले लखनऊ के लिए सिर्फ बरेली पैसेंजर चलती थी, जो वाया प्रतापगढ़ होकर जाती थी और यहां से भोर में करीब 4:35 बजे रवाना होती थी, जिसे हर कोई पकड़ नहीं पाता। ऐसे में गंगा गोमती का संचालन सुबह करीब छह बजे होना सभी के लिए सुविधाजनक हो गया। 

 

आज़ादी की 72वीं वर्षगाँठ पर भेजें देश भक्ति से जुड़ी कविता, शायरी, कहानी और जीतें फोन, डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Brijesh Srivastava