मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

बोकारो, बीके पांडेय। झारखंड के दो कद्दावर नेता समरेश सिंह और हारु रजवार। कई दशक तक विधायक रह चुके हैं। समरेश ने अविभाजित बिहार को अलग कर वनांचल राज्य बनाने के लिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को रजामंद किया था। हारु रजवार ने तीर कमान लेकर अलग झारखंड की लड़ाई लड़ी थी। दोनों जीवन के 80 बसंत देख चुके हैं। अब उन दोनों के मन में भय नहीं है कि सियासत में कुछ गंवा देंगे। दोनों दिग्गज नेताओं ने मन की बात कह डाली है।

समरेश सिंह ने खुलासा किया कि 2000 में अलग राज्य बनाने का फैसला लिया गया था। अलग सूबे का नामकरण वनांचल किया गया था। वनांचल का नाम बदल कर झारखंड करने की आवाज शिबू सोरेन और लालू यादव ने उठाई थी। अटल बिहारी नाम बदलने को तैयार नहीं थे। आडवाणी के समझाने पर अटल जी ने वनांचल नाम को बदल कर झारखंड करने पर सहमति दी थी। समरेश सिंह का बेटा संग्र्राम सिंह कांग्रेस में है। फिर भी समरेश बोले कि राहुल गांधी तुलनात्मक तौर पर अवसरवादी अधिक हैं, राष्ट्रभक्त कम। चंदनकियारी से तीन बार विधायक रह चुके हारु हजवार झामुमो में हैं। यूपीए महागठबंधन का सहयोगी दल। हारु रजवार मानते हैं कि देश की बागडोर संभालने के लिए राहुल गांधी अभी परिपक्व नहीं हुए हैं। सोनिया गांधी कहीं बेहतर साबित होंगी क्योंकि उनके पास अपार अनुभव है। वे सोनिया गांधी से मिले हैं। वे सबकी बातों को गौर से सुनती है, समझती हैं और उसी अनुरुप निर्णय लेती हैं। समरेश और हारु रजवार ने और कई ऐसी बातें कहीं हैं जो झारखंड की सियासत में दिलचस्पी रखने वालों को एकबारगी चौंका देंगी।

मोदी जरुरी मगर धनबाद में पीएन नहीं मजबूरीः कैबिनेट मंत्री और विधायक रह चुके समरेश सिंह बोकारो आवास पर सुबह सात बजे बैठे हैं। कुछ लोग आकर उनके  पांव छू रहे हैं। समरेश सिंह का वही मस्त अंदाज। रह रह कर बांग्ला भी  बोलते हैं। अचानक नारा लगाते हैं, मोदी जरुरी मगर धनबाद में पीएन नहीं मजबूरी। मजबूरी में किसी को वोट नहीं दें। कसौटी पर खरा उतरे तभी जनता पीएन सिंह को वोट दें। 

कांग्रेस अवसरवादी पार्टीः समरेश सिंह बोले कि कांग्र्रेस ने मधु कोड़ा से समझौता किया है। ऐसे दलों के साथ कांग्र्रेस ने गठबंधन किया है, जो उसकी विचारधारा को नहीं मानते। कांग्र्रेस अवसरवादी है। उन्होंने कहा कि अब चुनाव नहीं लडऩा। अब ईमानदार लोग चुनाव नहीं लड़ सकते। 1977 में चुनाव लड़ा था तो 13500 रुपए खर्च किया था और चुनाव जीत गए थे। वह रुपए भी चंदा से आए थे। साइकिल से घूमे थे। एक दोस्त ने जोंगा जीप दिया था। उसी से प्रचार किया था। तब कार्यकर्ता उनके खाने की चिंता करते थे। अब नेता को कार्यकर्ता की चिंता करनी पड़ती है, वह भी चुनाव के वक्त। समरेश सिंह बोले कि धनबाद के कई हिस्सों में वामपंथियों का बोलबाला था। ए के राय की तूती बोलती थी। विनोद बिहारी महतो उनके कार्यकर्ता थे। निरसा, बलियापुर और गोविंदपुर में दूसरे दलों के लोगों को सभा नहीं करने देते थे। हमला हो जाता था। बलियापुर और गोविंदपुर में सभा की थी। भाषण में कहा जोड़ा पाठा की बलि देंगे। उसके बाद जनसंघ एवं भाजपा के कार्यकर्ताओं में वामपंथियों का डर खत्म हो गया था।

झारखंड के सबसे बेहतर सीएम मधु कोड़ा और मरांडीः हारु रजवार चुनावी राजनीति से दूर हो चुके हैं। फिर भी रजवार से मिलने के लिए लोगों का आना लगा रहता है। झारखंड बनने के बाद सबसे बढिय़ा सीएम कौन? हारु रजवार ने न शिबू सोरेन का नाम लिया न हेमंत सोरेन का। वे बोले कि बाबूलाल मरांडी और मधु कोड़ा सबसे बेहतर रहे हैं। मधु कोड़ा अच्छे इंसान हैं। कोड़ा सरकार चलाने के लिए स्टेयङ्क्षरग कमेटी थी जिसमें मनमोहन ङ्क्षसह, सोनिया गांधी, लालू प्रसाद यादव व शिबू सोरेन थे। कोड़ा सरकार में सारे निर्णय यही चारों करते थे। खुद सोचिए कि मधु कोड़ा ने अकेले घोटाला कैसे कर दिया। कोड़ा ने आज तक किसी का नाम नहीं लिया। आदिवासी हैं। अकेले सब कुछ झेले हैं। 

राहुल अभी अपरिपक्वः 2019 के लोकसभा चुनाव में देश की अच्छी प्रधानमंत्री सोनिया गांधी हो सकती है। जहां तक राहुल गांधी का सवाल है तो अनुभव का बड़ा लाभ मिलता है। राहुल अभी सोनिया गांधी के सामाने अपरिपक्व  हैं। बतौर विधायक उन्हें सोनिया गांधी से मिलने का मौका मिला है। वह लोगों की बातों को सुनती हैं। राहुल गांधी के पास प्रधानमंत्री के लिए परिपक्व नही हैं। हारु रजवार ने कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तो उन्हें भी बहुत उम्मीद जग गई थी। जितनी घोषणा की थी, उसका एक चौथाई भी काम नहीं किया। अब बदलाव होना चाहिए। अबकी बार यूपीए को वोट देना चाहिए। यह व्यक्तिगत मत है। वे सार्वजनिक दल पर चुनाव प्रचार करने के लिए कहीं नहीं जाएंगे। अब किसी दल में नहीं जाएंगे। झामुमो में थे, हैं और रहेंगे। 

Posted By: mritunjay

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