जमशेदपुर, दिलीप कुमार।  राज्य बनने के 18 साल बाद भी कोल्हान प्रमंडल क्षेत्र में सब्जी, फल आदि भंडारण के लिए एक भी कोल्ड स्टोरेज नहीं बन सका है। इसके अभाव में किसान अपना उत्पाद औने पौने दाम में बेचने को विवश हैं। कई बार तो ये किसान लागत मूल्य पाने के लिए तरस कर रह जाते हैं। दुर्भाग्य की बात यह कि किसानों के नाम पर यहां राजनीति खूब होती रही है, लेकिन किसी पार्टी ने इसके लिए कभी आंदोलन नहीं चलाया। किसी ने आवाज नहीं उठाई कि कोल्ड स्टोरेज क्यों नहीं बन रहे?

कोल्हान प्रमंडल के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां कृषि प्रधान क्षेत्र है। ग्रामीण क्षेत्र, खासकर पूर्वी सिंहभूम के पटमदा, बोड़ाम, पोटका आदि प्रखंड क्षेत्र में किसान लंबे समय से कोल्ड स्टोरेज बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी। कई बार सब्जी उत्पादन के लिए किसानों को बैंकों व महाजन से ऋण लेना पड़ता है। लेकिन उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मूलधन तो दूर, सूद तक नहीं चुका पाते हैं।

25 साल से लंबित है कोल्ड स्टोरेज की मांग

चुनाव आते ही क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज का मुद्दा ज्वलंत हो उठता है। पटमदा, बोड़ाम और आसपास के क्षेत्र के किसानों की 25 वर्ष पुरानी मांग को सभी दल के प्रत्याशी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का वादा करते हैं, लेकिन नतीजा सिफर ही साबित हुआ। इसे लेकर किसानों में रोष देखा जा रहा है। इस चुनाव में किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज बड़ा मुद्दा है।

शिलान्यास हो गया, कब बनेगा पता नहीं

कोल्ड स्टोरेज निर्माण को लेकर बीते 10 मार्च को पटमदा के बामनी में शिलान्यास बड़े ही तामझाम से किया गया। पांच हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कब तक पूरा होगा, कोई डेडलाइन तय नहीं है। पटमदा के प्रगतिशील किसान श्रीमंत मिश्रा निराश भाव से कहते हैं कि शिलान्यास तो हो जाते हैं, काम पूरा हो तब तो कुछ बात करें। पिछले वर्ष रांची में हुए एग्र्रीकल्चर फूड समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में बनने वाले 50 कोल्ड स्टोरेज का ऑनलाइन शिलान्यास किया था। पर ये कोल्ड स्टोरेज कहां बनेंगे, कोई जवाब देने वाला नहीं है।

एक्सपर्ट व्यू 

मुझे लगाता है कि नेताओं की नीयत में ही खोट है 

जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र का पटमदा और बोड़ाम क्षेत्र सब्जी उत्पादन का मुख्य क्षेत्र है। फ्रेश सब्जी की कीमत सीजन में दस से 15 दिनों के लिए लागत मूल्य से काफी कम हो जाती है। किसान को घाटा होता है। कोल्ड स्टोरेज की सुविधा होती तो क्षेत्र के किसानों को फसल का उचित मूल्य मिलता। भंडारण की व्यवस्था नहीं रहने के कारण किसान अपना उत्पाद सस्ती दर पर बेचने पर मजबूर होते हैं। कोल्ड स्टोर के निर्माण से समस्याओं का निदान संभव हो जाएगा। क्षेत्र के किसान जनप्रतिनिधियों से कोल्ड स्टोरेज बनवाने की मांग कई बार कर चुके हैं। दुखद बात यह है कि हर दल के नेता किसानों की बात करते हैं, लेकिन सिर्फ चुनाव में। पांच साल यदि सक्रिय होते तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। नेताओं की नीयत में ही खोट है।

- श्रीमंत मिश्रा, प्रगतिशील किसान, पटमदा प्रखंड

कहते हैं किसान

कोल्ड स्टोर के निर्माण को लेकर बामनी में शिलान्यास किया गया है। शिलान्यास के बाद लगा कि किसानों के अरमान अब पूरे होंगे। शिलान्यास के बाद अबतक काम प्रारंभ नहीं हुआ है। ऐसे में संशय की स्थिति बनी है, क्योंकि इसके पूर्व भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सह मंत्री ने कोल्ड स्टोरेज का शिलान्यास किया था। वह बनकर तैयार नहीं हुआ। हमारे अरमान अधूरे रह गए हैं। यहां के किसान भंडारण की व्यवस्था नहीं रहने के कारण आलू आदि की खेती कम करते हैं। 

- जदुनाथ गोराई, किसान, पटमदा प्रखंड

शहर संपन्न है और गांव में किसानों की हालत खराब है। गरीबी से जूझ रहे हैं। किसानों की सबने उपेक्षा की है। किसी ने इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश नहीं की। इस क्षेत्र में कोल्ड स्टोर का निर्माण हो गया होता तो किसानों की आय बढ़ जाती। उनका उत्पाद बर्बाद नहीं होता। कड़ी मेहनत व लागत के बावजूद उत्पाद का सही दाम नहीं मिल पाता है। पांच साल में कोल्ड स्टोरेज क्यों नहीं बने? यह जांच का विषय है। सरकार चुप क्यों रही? उसे जवाब देना चाहिए।

- नरेश किस्कू, किसान, जमशेदपुर

 बड़ा मुद्दा

  • कोल्ड स्टोरेज के लिए तरस रहे जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र के सब्जी उत्पादक किसान
  • कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों में कोल्ड स्टोरेज का है अभाव
  • सिर्फ चुनाव के समय प्रत्याशी कोल्ड स्टोरेज बनाने का करते हैं वादा
  •  02 लाख से अधिक किसान हैं पूर्वी सिंहभूम जिले में
  •  03 प्रखंडों में सर्वाधिक होता है सब्जी का उत्पादन

Posted By: Rakesh Ranjan

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप