नई दिल्ली, जेएनएन। लोकसभा चुनाव के नतीजे जारी हो गए हैं और भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर ऐतिहासिक जनादेश हासिल कर लिया है। देश की जनता ने एक बार फिर कांग्रेस को नकार दिया है और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं किया है। वैसे आपको बता दें कि जनता ने एनडीए के 352 उम्मीदवार और कांग्रेस (+) के 86 उम्मीदवार और अन्य पार्टियों के 103 उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।

कांग्रेस की बात करें तो इतना ही नहीं राहुल गांधी खुद अपनी परंपरागत सीट पर भी हार गए हैं। भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी से उन्हें हार मिली है। कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाली अमेठी सीट में राहुल गांधी को मिला ये जनादेश कांग्रेस और गांधी परिवार के लिए काफी चिंता का विषय है।

अमेठी एक ऐसी सीट है, जहां के लिए कहा जाता था कि यह गांधी परिवार के लिए पैटेंट सीट है और यहां गांधी परिवार के सदस्य को हराना मुश्किल है। हालांकि, अब यह तिलिस्म टूट चुका है। जानकारों का मानना है कि अमेठी में किसी बाहरी उम्मीदवार से राहुल गांधी का हार जाना कांग्रेस के भविष्य पर काफी सवाल खड़े करता है। साथ ही यह गांधी परिवार के लिए एक शर्मनाक हार है। बता दें कि कांग्रेस ने यहां अपने बुरे से बुरे दौर में भी जीत हासिल की है।

गांधी परिवार का रहा है दबदबा
साल 1980 के बाद से सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है जब यहां किसी गैर कांग्रेसी ने जीत दर्ज की है। यह साल था 1998, जब एक साल के लिए भारतीय जनता पार्टी के संजय सिंह ने जीत हासिल की थी. उसके बाद से कभी भी भी गांधी परिवार के अलावा कोई भी उम्मीदवार यहां जीत नहीं दर्ज कर पाया। साल 1980 में यहां कांग्रेस की ओर से संजय गांधी ने चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। उसके बाद यहां से चार बार राजीव गांधी सांसद बने और 1991 से 1998 तक कांग्रेस के ही सतीश शर्मा ने यहां अपना सिक्का जमाए रखा।

उसके बाद सिर्फ 1998 में भारतीय जनता पार्टी के संजय सिंह यहां से जीते। फिर एक साल बाद 1999 में हुए चुनाव में राहुल गांधी ने परपंरागत सीट पर दावेदारी की और लगातार जीत हासिल की। राहुल गांधी यहां से चार बार सांसद रह चुके हैं। पिछले बार 2014 में भी राहुल गांधी के सामने भाजपा ने स्मृति ईरानी और AAP ने कुमार विश्वास को मैदान में उतारा था, लेकिन कांग्रेस को मात नहीं दे सके। यहां गांधी परिवार की जड़ें काफी मजबूत हैं, तभी तो 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार भाजपा कमल खिलाने से महरूम रह गई।

2017 में लिख गई थी राह की पटकथा?
अमेठी लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं, इनमें तिलोई, जगदीशपुर, अमेठी और गौरीगंज, सलोन सीटें शामिल हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 5 सीटों में से 4 सीटों पर भाजपा और महज एक सीट पर एसपी को जीत मिली थी। हालांकि, सपा-कांग्रेस गठबंधन करके चुनाव मैदान में उतरी थी, फिर भी जीत नहीं सकी थी। सपा ने तो गौरीगंज सीट जीत ली, लेकिन कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। क्या इससे पता चलता है कि अमेठी की जनता ने कांग्रेस को नकार दिया था।

2014 में क्या रहा था रिजल्ट
2014 में, अमेठी लोकसभा क्षेत्र से राहुल गांधी का निर्वाचन हुआ और उन्हें 408651 वोट मिले। उन्होंने स्मृति ईरानी को 107903 वोटों से हराया था। 2014 में कुल 52.39 प्रतिशत वोट पड़े। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चौथी बार तो केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी 2014 में शिकस्त के बाद दूसरी बार आमने-सामने हैं। संसदीय क्षेत्र में वैसे तो कुल मतदाताओं की संख्या 17,41,034 है, लेकिन मताधिकार का प्रयोग 9,40,947 लोगों ने किया है।

अमेठी, उत्तर प्रदेश का प्रमुख शहर और राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र है। इसे बसपा सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर 1 जुलाई 2010 को अस्तित्व में लाया गया था। गौरीगंज शहर अमेठी जिले का मुख्यालय है। शुरुआत में इसका नाम छत्रपति साहूजी महाराज नगर था बाद में बदलकर इसका नाम अमेठी कर दिया गया है। यह भारत के गांधी परिवार की कर्मभूमि है।

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु उनके पोते संजय गांधी, राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने इस जिले का प्रतिनिधित्व किया है। देवी पाटन धाम, हिन्दू धार्मिक मंदिर, उल्टा गढ़ा (हनुमान मंदिर), हनुमान गढ़ी मंदिर, सती महरानी मंदिर और मालिक मोहम्मद जायसी की मस्जिद यहां के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। दिल्ली से अमेठी की दूरी करीब 681 किलोमीटर है।

 

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Posted By: Mohit Pareek

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