नई दिल्ली, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 में 6 मई को पांचवे चरण का मतदान होगा। इस बार का आम चुनाव 7 चरणों में हो रहा है, पहला चरण 11 अप्रैल को शुरू हुआ था, अब तक चार चरण पूरे हो चुके हैं। बाकी बचे तीन चरण 6 मई, 12 मई और 19 मई को हैं। 23 मई को मतगणना होगी। पांचवे चरण में सोमवार को राजस्थान की 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, राज्य में लोकसभा की 25 सीटें हैं। जिनमें से भाजपा ने 2014 के आम चुनाव में सभी सीटें अपने खाते में डाल ली थीं। तब मोदी लहर की वजह से भाजपा ने राजस्थान में कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था। हालांकि, 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वसुंधरा सरकार को गद्दी के हटाकर फिर एक बार अपनी सरकार बना ली। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 100 और भाजपा को 73 सीटें मिली थीं। जबकि अन्य के खाते में 26 सीटें गईं थीं। हालांकि राजस्थान में एक ट्रेंड देखा जाता है कि वहां की जनता विधानसभा चुनाव में हर पांच साल में सरकार बदलते रहती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ और कांग्रेस सत्ता पर काबिज हो गई।

2013 में राज्य में विधानसभा चुनाव हारने के बाद और फिर 2014 में लोकसभा की सभी 25 सीटें गंवाने के बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत निश्चित ही उसके लिए एक संजीवनी का काम करेगी, लेकिन 2019 के चुनाव में राज्य की जनता कांग्रेस पर कितना भरोसा करती है ये तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही तय हो पाएगा।

सियासी पंडितों का मानना है कि 2014 की तरह इस बार देश में मोदी लहर जैसी कोई बात नजर नहीं आ रही है, लेकिन फिर भी अशोक गहलोत के लिए 2019 के चुनाव में खोई जमीन तलाशना मुश्किल होगा। भाजपा इस चुनाव में जहां राष्ट्रवाद के मुद्दे को जनता के सामने रख रही है वहीँ कांग्रेस 'चौकीदार चोर है' के नारे को लेकर चुनाव में उतरी है। कांग्रेस को किसानों के लिए लाए 'न्याय' योजना पर भरोसा है तो भाजपा सरकार पिछले पांच वर्ष के काम-काज के साथ प्रधानमंत्री के चेहरे पर एक बार फिर सियासी अखाड़े में है।

राजस्‍थान के बारे में
राजस्थान क्षेत्रफल के अनुसार देश का सबसे बड़ा राज्य है। इसके पश्चिम में पाकिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में गुजरात, दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश, उत्तर में पंजाब, उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रदेश और हरियाणा है। राज्य का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है। राज्‍य से लोकसभा के लिए 25, राज्‍यसभा के लिए 10 और विधानसभा के लिए 200 सदस्‍य चुने जाते हैं।

इन 12 सीटों पर 6 मई को डाले जाएंगे वोट
गंगानगर, बीकानेर, चूरू, झुन्झुनू, सीकर, जयपुर ग्रामीण, जयपुर, अलवर, भरतपुर, करौली-धौलपुर, दौसा, नागौर।

गंगानगर
गंगानगर, राजस्थान के 25 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में से एक है। श्रीगंगानगर को राजस्थान का अन्न का कटोरा भी कहा जाता है। इसके आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। 2019 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार भारतराम मेघवाल हैं जबकि भाजपा ने 2014 के विजेता निहाल चंद चौहान पर एक बार फिर भरोसा जताया है। इन दोनों के बीच इस चुनाव में कड़ा मुकाबला है। 2014 के चुनाव में यहां से निहालचन्द चौहान को 658,130 वोट और कांग्रेस के उम्मीदवार मास्टर भंवरलाल मेघवाल को 366,389 वोट मिले थे। यहां कुल 1,718,414 मतदाता हैं जिनमें 909,749 पुरुष मतदाता हैं और 808,665 महिला मतदाता हैं।

बीकानेर
बीकानेर राज्य का पुराना नाम जांगल देश था। यहां सबसे पहला लोकसभा चुनाव 1952 में हुआ था। 2019 के चुनाव में यहां से भाजपा के उम्मीदवार अर्जुन राम मेघवाल हैं जबकि कांग्रेस से मदन गोपाल मेघवाल अपना भाग्य आजमा रहे हैं। 2014 में यहां से अर्जुन राम मेघवाल चुनाव जीते थे, जिन्हें 584,932 वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी शंकर पन्नू को 276,853 वोटों से संतोष करना पड़ा था। यहां कुल 1,592,355 मतदाता हैं जिनमें से 744,629 महिला मतदाता और 847,726 पुरुष मतदाता हैं।

चूरू
चूरू, राजस्थान के 25 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में से एक है। इसे थार मरुस्थल का द्वार भी कहा जाता है। चरू के आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। चुरू से भाजपा प्रत्याशी राहुल कस्वां और कांग्रेस से रफीक मंडेलिया चुनाव मैदान में हैं। 2014 में यहां से राहुल कस्‍वां जीते थे, उन्हें 595,756 वोट मिले, जबकि कांग्रेस कैंडिडेट अभिनेश महर्षि को 301,017 वोटों से संतोष करना पड़ा था।

जयपुर
जयपुर के अंदर 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। 2019 में यहां से रामचरण बोहरा मैदान में हैं तो कांग्रेस से ज्योति खंडेलवाल ताल ठोक रहे हैं। 2014 में रामचरण बोहरा यहां से विजयी रहे थे, उन्हें 863,358 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के महेश जोशी को 324,013 वोट मिले थे। यहां कुल 1,957,820 मतदाता हैं, जिनमें 1,047,469 और 910,349 महिला मतदाता हैं।

जयपुर ग्रामीण
जयपुर ग्रामीण, राजस्थान के 25 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में से एक है। यहां से कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर भाजपा की और से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने कृष्णा पुनिया पर भरोसा जताया है। 2014 के चुनाव में यहां से राज्यवर्धन सिंह राठौर विजयी रहे थे, उन्हें 632,930 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सी पी जोशी को 300,034 वोटों से संतोष करना पड़ा था। यहां कुल 1,700,307 मतदाता हैं, जिनमें 793,449 महिला और 906,858 पुरुष मतदाता हैं।

सीकर
सीकर शहर शेखावाटी के नाम से जाना जाता है। इसके आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी की और से यहां से इस बार सुमेधानंद सरस्वती मैदान में हैं। उन्हें चुनौती देने के लिए कांग्रेस से सुभाष महारिया चुनाव लड़ रहे हैं। 2014 के चुनाव में इस सीट से सुमेधानन्द सरस्वती चुनाव जीते थे, उन्होंने कांग्रेस के प्रताप सिंह जाट को हराया था। सीकर में कुल 1,769,882 मतदाता हैं, जिनमें से 826,191 महिला मतदाता और 943,691 पुरुष मतदता हैं।

पांचवे चरण में राजस्थान की 12 सीटों में से हमने यहां 6 सीटों का हाल बताया। जिनमें से ज्यादातर सीटों पर आप देखेंगे कि भाजपा ने पुराने जीतने वाले प्रत्याशी उतारे हैं जबकि कांग्रेस ने आपने प्रत्याशियों में बदलाव किया है।

मैदान में दो केंद्रीय मंत्री
मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों, कांग्रेस के एक राष्ट्रीय सचिव, चुनाव से ठीक पहले एनडीए में शामिल हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल व हरियाणा के महंतों के भाग्य का फैसला होगा। दौसा सीट प्रदेश की एकमात्र ऐसी सीट है जहां भाजपा और कांग्रेस ने महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। वहीं भरतपुर और अलवर दो सीटों पर बसपा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना रखा है।

सोमवार को जिन दिग्गजों के भाग्य का फैसला होगा उनमें केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हैं। वह बीकानेर संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के मदन गोपाल मेघवाल से है। दोनों रिश्ते में मौसेरे भाई हैं।

जयपुर ग्रामीण सीट से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यव‌र्द्धन सिंह राठौड़ चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस के टिकट पर पूर्व एथलीट और विधायक कृष्ण पूनिया मैदान में हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और राहुल गांधी के करीबी जितेंद्र सिंह अलवर सीट पर एक बार फिर अपना भाग्य अजमा रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के बाबा बालकनाथ से है। बालकनाथ हरियाणा के रोहतक स्थित मस्तनाथ मठ के महंत हैं।

मौसेरे भाइयों के बीच दिलचस्प मुकाबला
बीकानेर के चुनावी मुकाबले में भाजपा के प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल और कांग्रेस के मदनगोपाल मेघवाल मौसेरे भाई हैं। मदनगोपाल पहली बार चुनाव मैदान में हैं और अनुभव की कमी उनके कैंपेन में भी नजर आ रही है। उनके सारथी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट बने हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में अगर कांग्रेस ने सरकार बनाई है तो जमीनी स्तर पर उसके कार्यकर्ता मजबूत हैं। लेकिन राजस्थान का मिजाज सियासत में कुछ अलग ही है। यहां की जनता को कई बार तात्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ भी विरोध करते देखा गया है। तो क्या जिस तरह 2013 के विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को सत्ता सौंपी और 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को ही जीत दिलाकर देश में भाजपा की सरकार बनवाई क्या कांग्रेस के साथ भी कुछ ऐसा ही होगा? यह सवाल तब तक मौजू है जब तक कि 23 मई तक फाइनल रिजल्ट नहीं आ जाता।

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Posted By: Nitesh