नई दिल्‍ली। वायरसों के साथ दो प्रमुख समस्याएं होती हैं। पहली यह कि वायरस में बहुत विविधता पाई जाती है। दूसरी दिक्कत है कि वायरस आपकी अपनी कोशिका की मशीनरी का उपयोग करते हैं। इस वजह से वायरस के कामकाज में बाधा डालते हुए खतरा यह भी रहता है कि कहीं आपकी कोशिकीय मशीनरी प्रभावित न हो। इन मामलों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दिन-रात अनुसंधानरत हैं। सोशल मीडिया पर कोविड-19 से जुड़ी कई तरह के मिथकों की बाढ़ आई हुई है। जैसे यह दावा कि कोरोना वायरस चीनी वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशाला में निर्मित एक जैविक हथियार है। जबकि प्रतिष्ठित साइंस जर्नल नेचर में प्रकाशित शोध पत्र से यह पता चलता है कि यह वायरस कोई जैविक हथियार न होकर प्राकृतिक है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ये वायरस लैब निर्मित होता तो सिर्फ-औरसिर्फ इंसानों के जानकारी में आज तक पाए जाने वाले कोरोना वायरस के जीनोम से ही इसका निर्माण किया जा सकता था मगर वैज्ञानिकों द्वारा जब कोविड-19 के जीनोम को अब तक के ज्ञात जीनोम से मैच किया गया तब वह एक पूर्णतया प्राकृतिक और अलग वायरस के तौर पर सामने आया। नोवल कोरोना वायरस का जीनोम चमगादड़ और पैंगोलिन में पाए जाने वाले बीटाकोरोना वायरस के समान है। होम्योपैथी और आयुर्वेद में इसके इलाज के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन चिकिसा विज्ञानियों की मानें तो ये दावे सही नहीं हैं, क्योंकि यह वायरस नया है। जब तक किसी दवा का क्लिनिकल ट्रायल नहीं हो जाता तब तक हम नहीं कह सकते कि यह दवा काम करेगी या नहीं।

महामारी का कहर कैसे बरपा होता है और एक झटके में हजारों जिंदगियां तथा देश-समाज कैसे तबाह हो जाते हैं, 21वीं सदी में दुनिया के ज्यादातर लोगों ने इसका जिक्र कहानियों में ही सुना होगा, लेकिन कोरोना ने उन कहानियों और उसके खौफ को फिर से लोगों में बसा दिया है। वर्तमान स्थिति यह है कि कोविड-19 तेजी से फैल रहा है, कोई पक्का इलाज उपलब्ध नहीं है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि आने वाले दिनों में यह बीमारी क्या रुख अख्तियार करेगी। अत: इसे फैलने से रोकने के उपाय करना ही बेहतर होगा। ऐसे में सामाजिक दूरी बनाए रखकर इसके रोकथाम में योगदान दें।

हमें मानवता को बतौर एक जाति मानना ही होगा, पूरी दुनिया को मिलकर इसका हल खोजना होगा, एकदूसरे से निरंतर संवाद करना होगा, तभी इसका बेहतर ढंग से सामना किया जा सकता है। जैसे-जैसे विज्ञान अपने पुष्ट मत रखता जाएगा, वैसे-वैसे कोविड-19 से लड़ने में हम बेहतर सिद्ध होते जाएंगे। सेपियंस और होमी डेयस के लेखक, इतिहासकर और भविष्यवादी विचारक युवाल नोआ हरारी के अनुसार हां, यह तूफान भी एक दिन थमेगा, मानवता बची रहेगी, हम में से अधिकांश अगले दिन के सूरज को देखने के लिए बचे रहेंगे, पर यह दुनिया बदली हुई होगी।

हरारी कहते हैं कि कोविड-19 के संकट के इस समय में, हमारे पास विशेष रूप से दो महत्वपूर्ण विकल्प हैं। पहला है अधिनायकवादी निगरानी और नागरिक सशक्तीकरण के बीच एक का चुनाव। दूसरा है अलगाव और वैश्विक एकता के बीच किसी एक का चुनाव। अगर हम वैश्विक एकता बनाने में सफल रहते हैं तो यह न केवल कोरोना वायरस के खिलाफ हमारी जीत होगी, बल्कि भविष्य में होने वाली सभी महामारियों और संकटों से भी जो 21वीं सदी में हमारे सिर पर विपत्ति की तरह टूट सकते हैं।

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