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बिना पहचान शव का अंतिम संस्कार क्यों? युवराज मनचंदा केस में गुरुग्राम पुलिस पर भड़का कोर्ट; रिपोर्ट तलब

Published: Wed, 23 Sep 2026 10:00 AM (IST)

दिल्ली की अदालत और सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है, जहां 31 वर्षीय युवराज ...और पढ़ें

युवराज मनचंदा केस में कोर्ट में गुरुग्राम पुलिस को फटकार। फोटो: आर्काइव

युवराज मनचंदा केस में कोर्ट में गुरुग्राम पुलिस को फटकार। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. युवराज मनचंदा का शव बिना पहचान के अंतिम संस्कार किया गया

  2. गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई पर दिल्ली कोर्ट ने नाराजगी जताई

  3. सुप्रीम कोर्ट ने भी पुलिस से हलफनामा दाखिल करने को कहा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गुरुग्राम में 31 वर्षीय रियल एस्टेट प्रोफेशनल युवराज सिंह मनचंदा की मौत और उनके शव की पहचान किए बिना अंतिम संस्कार किए जाने के मामले में दिल्ली की अदालत ने गुरुग्राम पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।

अदालत ने पुलिस की ओर से दाखिल जवाब को 'क्रिप्टिक' (अस्पष्ट और अधूरा) बताते हुए इसे पहले दिए गए आदेश का अनुपालन नहीं माना और गुरुग्राम के पुलिस अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले में अगली सुनवाई अब 24 सितंबर को होगी।

शव मिला 10 को, 16 सितंबर को दी जानकारी

अदालत में पेश रिकॉर्ड और शिकायत के अनुसार, युवराज का शव 10 सितंबर को गुरुग्राम में हरियाणा पुलिस के एक नाले से बरामद हुआ था।  परिवार का आरोप है कि उन्हें युवराज के शव के बरामद होने की जानकारी 16 सितंबर को दी गई जबकि 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया गया।

अदालत अब यह जानना चाहती है कि जब शव की पहचान नहीं हुई थी, तब उसकी पहचान की प्रक्रिया क्या अपनाई गई और उसे बिना पहचान के अंतिम संस्कार के लिए कैसे भेज दिया गया।

दिल्ली में दर्ज FIR से भी जुड़ता है मामला

युवराज के परिवार की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद, अधिवक्ता रजत जैन और निहारिका कुशवाहा ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठाए।

उन्होंने दलील दी कि परिवार ने पुलिस से संपर्क करने पर कथित तौर पर उन्हें युवराज के शव से मिलते-जुलते व्यक्ति की तस्वीरें भेजी गई थीं। परिवार की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि शव की पहचान की प्रक्रिया पूरी तरह क्यों नहीं अपनाई गई।

मामले में लाजपत नगर थाने में FIR भी दर्ज थी। यह आरोप लगाया गया कि FIR दर्ज होने के बावजूद शव की पहचान और रिकॉर्ड मिलान की प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई।

वकील की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि ZIPNET पर शव से संबंधित विवरण और तस्वीरें 10 सितंबर को शव बरामद होने के बजाय 16 सितंबर को अपलोड की गईं, जबकि तब तक 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार हो चुका था।

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पुलिस से मांगे गए हैं 12 तरह के रिकॉर्ड

अदालत ने 20 सितंबर को BNSS की धारा 94 के तहत गुरुग्राम पुलिस कमिश्नरेट को कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया था। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • पुलिस डायरी और PCR रिकॉर्ड
  • शव बरामदगी से संबंधित दस्तावेज
  • क्राइम सीन से जुड़े रिकॉर्ड
  • इनक्वेस्ट और पोस्टमार्टम रिकॉर्ड
  • फोरेंसिक तथा DNA से संबंधित सामग्री
  • शव की तस्वीरें और वीडियो
  • शव की पहचान से संबंधित रिकॉर्ड
  • अंतिम संस्कार से संबंधित दस्तावेज
  • शव के पास से मिले सामान का रिकॉर्ड
  • ZIPNET पर दर्ज जानकारी
  • पुलिस और परिवार के बीच हुए संचार का रिकॉर्ड
  • CCTV फुटेज

अदालत ने खास तौर पर पूरे CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और उपलब्ध कराने पर जोर दिया है, क्योंकि घटनास्थल और शव की बरामदगी से जुड़ी फुटेज मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।

परिवार की ओर से अदालत में कहा गया कि CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित नहीं किया गया तो इसके नष्ट होने की आशंका हो सकती है।

पुलिस का जवाब अदालत को क्यों लगा अधूरा?

गुरुग्राम के बादशाहपुर पुलिस थाने के SI चांदगी राम की ओर से दाखिल जवाब को अदालत ने 'cryptic' बताते हुए कहा कि यह पहले दिए गए आदेश की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है।

अदालत ने अब पुलिस को निर्देश दिया है कि वह 24 सितंबर तक उचित और बिंदुवार रिपोर्ट दाखिल करें। अदालत जानता चाहती है कि  शव मिलने से लेकर उसकी पहचान, रिकॉर्ड में एंट्री, परिवार को सूचना और अंतिम संस्कार तक पुलिस ने कौन-कौन से कदम उठाए?

SC ने भी पूछा- बिना पहचान अंतिम संस्कार क्यों?

इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली पुलिस कमिश्नर और गुरुग्राम पुलिस को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि युवराज सिंह मनचंदा के शव की पहचान किए बिना उसका अंतिम संस्कार कैसे कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन शामिल हैं, ने मामले में शव की बरामदगी और उसके अंतिम संस्कार के बीच हुई कार्रवाई का विवरण मांगा है।

परिवार का कहना है कि युवराज का शव 10 सितंबर को गुरुग्राम में मिला, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी 16 सितंबर को दी गई। इस बीच 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा है कि शव की बरामदगी और उससे जुड़े विवरण Crime and Criminal Tracking Network and Systems (CCTNS) पोर्टल पर क्यों अपलोड नहीं किए गए। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को सूचीबद्ध की गई है।

मामला अब किन सवालों पर टिका है?

इस पूरे मामले में अदालतों के सामने मुख्य सवाल ये हैं:

  • 10 सितंबर को मिले शव की पहचान की प्रक्रिया क्या अपनाई गई?
  • लाजपत नगर में दर्ज FIR और गुरुग्राम में मिले अज्ञात शव के रिकॉर्ड का मिलान क्यों नहीं हुआ?
  • 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार किस आधार पर किया गया?
  • परिवार को 16 सितंबर तक सूचना क्यों नहीं मिली?
  • ZIPNET और CCTNS पर संबंधित जानकारी कब और कैसे दर्ज की गई?
  • CCTV फुटेज में शव की बरामदगी और पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी क्या जानकारी है?
  • DNA, पोस्टमार्टम, फोरेंसिक और पहचान संबंधी रिकॉर्ड में क्या दर्ज है?
  • पुलिस ने अदालत के 20 सितंबर के निर्देशों का पूरा पालन क्यों नहीं किया?

अब गुरुग्राम पुलिस की 24 सितंबर की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल होने वाला हलफनामा इस मामले में आगे की तस्वीर साफ करने में महत्वपूर्ण होंगे।

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