गुरुग्राम युवराज हत्याकांड: कार में 7 घंटे तक लाश लेकर घूमता रहा कपल, नाले में फेंका; पूर्व सहकर्मी और पति गिरफ्तार
दिल्ली से लापता हुए युवराज सिंह मनचंदा की हत्या का खुलासा हो गया है। पुलिस ने उनकी पूर्व सहकर्मी अन्या ...और पढ़ें
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युवराज सिंह मनचंदा।
HighLights
युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को लाजपत नगर से लापता हुए थे।
पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और संयम सचदेवा ने हत्या की।
पुलिस ने आरोपियों को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर कस्टडी में लिया।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के लाजपत नगर मार्केट से 6 सितंबर को लापता हुए सरिता विहार निवासी 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की हत्या मामले में हैरान करने वाले तथ्य आए हैं।
पुलिस ने युवराज की पूर्व ऑफिस सहकर्मी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया है। दोनों को साकेत कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। पुलिस अब हत्या की वजह और वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।
14 सितंबर को अंतिम संस्कार किया
बता दें कि गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र स्थित सेक्टर-70 में नाले से 10 सितंबर की सुबह एक अज्ञात व्यक्ति का सड़ा-गला शव बरामद हुआ था, जिसकी शिनाख्त नहीं हो पायी थी। पोस्टमॉर्टम के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात मानते हुए 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार भी करा दिया था।
दक्षिणी पूर्वी जिला पुलिस के मुताबिक, फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल में चिकित्सक युवराज की बड़ी बहन हरसिमरन मनचंदा ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी।
परिजनों ने पहचान की
16 सितंबर को दिल्ली पुलिस के माध्यम से परिवार को पता चला कि गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र में एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी ने शव की तस्वीर और अन्य विवरण जिप नेट पोर्टल पर अपलोड किए थे। तस्वीर और शव के पास मिले सामान के आधार पर परिजनों ने युवराज की पहचान की।
मोबाइल फोन बंद मिला
पुलिस के मुताबिक, युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को अपनी बहन के साथ लाजपत नगर के सेंट्रल मार्केट में शॉपिंग करने गए थे और शाम करीब चार बजे अपनी बहन से मीटिंग की बात कहकर गुरुग्राम चले गए। देर रात तक न लौटने पर परिजनों ने संपर्क किया तो उनका मोबाइल फोन बंद मिला। बहन ने 11 सितंबर को गुमशुदगी दर्ज कराई।
केस दर्ज कर पुलिस ने युवराज के मोबाइल से जुड़े सीडीआर और आईपीडीआर रिकॉर्ड की जांच की। इसमें पता चला कि लापता होने से पहले युवराज ने अपनी पूर्व ऑफिस सहकर्मी अन्या वत्स से बात की थी। परिजनों ने भी इसकी पुष्टि की।
लोकेशन उत्तराखंड में मिली
इस पर पुलिस ने अन्या को खोजना शुरू किया, पर उसका फोन भी बंद मिला। युवराज और अन्या के आफिस से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई गई। इस दौरान पुलिस को पता चला कि अन्या एक नए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रही है, जिसकी लोकेशन उत्तराखंड में मिली। पुलिस टीम उत्तराखंड पहुंची। अन्या वत्स व उसके साथी संयम सचदेवा को ट्रेस कर पकड़ लिया और दिल्ली लाई।
वहीं, पूछताछ में अन्या और संयम ने युवराज की हत्या की बात स्वीकार की। दोनों ने शव को गुरुग्राम में उनके घर के पास एक नाले में फेंक दिया गया था। दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क किया।
शव की तस्वीरें जब परिजनों को दिखाई
पता चला कि 10 सितंबर को गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र में एक नाले से अज्ञात शव बरामद हुआ था। पुलिस ने बरामद शव की तस्वीरें जब परिजनों को दिखाई तो उन्होंने मृतक की पहचान युवराज सिंह मनचंदा के रूप में की।
पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच और जुटाए गए सबूतों के आधार पर अन्या वत्स और संयम सचदेवा की युवराज की हत्या और उसके शव को ठिकाने लगाने में प्रथम दृष्टया भूमिका सामने आई है। हत्या के कारणों को लेकर दोनों से पूछताछ की जा रही है।
