गलत दस्तावेज और क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले जमानती... आखिर क्यों अटकी रही सौरव और आशुतोष की रिहाई?
जंतर-मंतर मामले में गिरफ्तार सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन जेल में रहने के बाद सशर्त ...और पढ़ें

सौरव दास और आशुतोष रांका को कोर्ट से रिहा कर दिया गया। फोटो: आर्काइव
HighLights
सौरव दास और आशुतोष रांका को सशर्त जमानत मिली।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जमानती बने थे रिहाई में बाधा।
गलत दस्तावेजों के कारण भी जमानत में देरी हुई।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रवेश करने के मामले में गिरफ्तार सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिनों तक जेल में रहने के बाद बुधवार को आखिरकार सशर्त जमानत मिल गई है।
स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट ने दोनों से लिखित माफीनामा और शपथ पत्र लेने के बाद उनकी रिहाई के आदेश दिए। दोनों नेताओं को शुरुआती दौर में जमानत न मिलने और जेल की अवधि बढ़ने के पीछे अदालत में पेश किए गए गलत दस्तावेज और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जमानती मुख्य वजह रहे।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जमानती बने वजह
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर घुसने के आरोप में गिरफ्तारी के अगले दिन जब दोनों को एसईएम कोर्ट में पेश किया गया, तो उनकी जमानत के लिए 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर दो ऐसे लोगों को जमानती बना दिया गया, जिनकी खुद की आपराधिक पृष्ठभूमि थी।
उनके खिलाफ उत्तम नगर और अन्य थानों में दो-दो मामले दर्ज पाए गए। वकीलों ने सफाई दी कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। वे सीजेपी समर्थक हैं। इस पर कोर्ट की फटकार के बाद वकीलों को माफी मांगनी पड़ी थी, और दोनों नेताओं को पांच दिनों के लिए जेल भेज दिया गया।
पांच दिन की अवधि पूरी होने के बाद 18 अक्टूबर को जब दोनों को दोबारा अदालत में पेश किया गया, तो नए जमानती पेश किए गए। हालांकि, इस बार बांड पर लगी तस्वीरें जमानतियों की शक्ल से मेल नहीं खा रही थीं।
यहां तक कि उनके पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड से भी उनका मिलान नहीं हो सका और बांड में मोबाइल नंबर तक दर्ज नहीं थे।
जमानतियों की पहचान पर भी उठे सवाल
अदालत द्वारा जब एक महिला और तीरथ नामक दोनों जमानतियों से अलग-अलग पूछताछ की गई, तो वे सौरव और आशुतोष के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं दे सके।
उन्होंने दोनों को चार साल से जानने का दावा तो किया, लेकिन जब कोर्ट ने उनके पिता के नाम के बारे में पूछा, तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए। इस गंभीर लापरवाही और दस्तावेज में खामी के चलते कोर्ट को उन्हें दो दिन और जेल भेजने का निर्देश देना पड़ा।
लगातार सात दिनों तक तिहाड़ जेल में वक्त बिताने के बाद बुधवार को अदालत ने दोनों पक्षों के कागजी दस्तावेज, लिखित माफीनामे और शपथ पत्र को स्वीकार करते हुए उन्हें सशर्त जमानत पर रिहा कर दिया।
हाई कोर्ट में भी सौरव दास की पहचान का मुद्दा उठा
दिल्ली हाई कोर्ट में सौरव दास और रांका के वकील ने सब-डिविजुअलिस्ट मजिस्ट्रेट (एसईएम) के आदेश का हवाला देते हुए पक्ष रखा। वकील ने अदालत को बताया कि सौरव दास के माता-पिता या पारिवारिक पृष्ठभूमि के संबंध में कोई भी पुख्ता जानकारी प्रस्तुत नहीं की जा सकी।
मामले की सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि पर्याप्त और सत्यापित तथ्यों के अभाव में आगे की कानूनी प्रक्रिया और पहचान से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने में मुश्किलें आईं।
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