भारत-अमेरिका टेक डील पर तेजी से होगा काम; IIT दिल्ली के साथ AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम रिसर्च पर बड़ा प्लान
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने IIT दिल्ली का दौरा किया, जहाँ भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी एवं शोध सहयोग बढ़ाने पर ...और पढ़ें

भारत और अमेरिका के बीच हुई टेक डील में आईआईटी दिल्ली की अहम भूमिका होगी। फोटो: आर्काइव
HighLights
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने IIT दिल्ली का दौरा किया
AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी पर सहयोग बढ़ेगा
संयुक्त शोध, नवाचार और छात्र विनिमय को बढ़ावा
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी एवं शोध सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से शुक्रवार को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने IIT दिल्ली का दौरा किया।
कार्यक्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी विदेश मंत्रालय में सार्वजनिक कूटनीति की अंडर सेक्रेटरी सारा बी. रोजर्स शामिल हुईं। दौरे के दौरान रिसर्च, इनोवेशन और उभरती तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।
भारत और अमेरिका किन तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं?
Advancing Partnership in Research and Innovation विषय पर सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका-भारत ट्रस्ट पहल के तहत दोनों देश सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीकी साझेदारी अब केवल समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।
सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका टेक्नोलॉजी साझेदारी पर क्या कहा?
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को और बढ़ावा दिया जाएगा। उनके अनुसार भारत और अमेरिका भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का समाधान तैयार करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत-अमेरिका साझेदारी वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
IIT Delhi की इस साझेदारी से भारत को क्या लाभ होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि IIT दिल्ली जैसे प्रमुख संस्थानों के माध्यम से बढ़ रहा सहयोग भारत को AI, सेमीकंडक्टर डिजाइन, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप-टेक रिसर्च में नई क्षमता प्रदान कर सकता है। इससे संयुक्त शोध परियोजनाओं, छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुआ?
इस अवसर पर IIT दिल्ली के उप निदेशक प्रो. अरविंद नेमा, प्रो. विवेक बुवा, डीन प्रो. अनिल वर्मा, फैकल्टी सदस्य, शोधार्थी और छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भारत-अमेरिका शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
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