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दिल्ली में गीले कचरे से बनेगी बायो-सीएनजी, एमसीडी शुरू कर रहा नए बायोमेथेनेशन प्लांट

Published: Sat, 30 May 2026 05:37 AM (IST)

दिल्ली में गीले कचरे से बायो-सीएनजी बनाने की पहल शुरू हो गई है, जिसमें एमसीडी नए बायोमेथेनेशन प्लांट लगा रही ...और पढ़ें

नंगली, गोयला, घोगा और भलस्वा में बायोमेथेनेशन प्लांट चालू किए जा रहे हैं। (एआई से निर्मित ग्राफिक्स)

नंगली, गोयला, घोगा और भलस्वा में बायोमेथेनेशन प्लांट चालू किए जा रहे हैं। (एआई से निर्मित ग्राफिक्स)

HighLights

  1. दिल्ली में गीले कचरे से बायो-सीएनजी उत्पादन शुरू।

  2. एमसीडी लगा रही नए बायोमेथेनेशन प्लांट।

  3. 4,200 अरब रुपये का बाजार, 26 लाख रोजगार।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत के शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले जैविक (गीले) कचरे का सही प्रबंधन देश के विकास के लिए बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। थिंक-टैंक काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत के जैविक कचरे के लिए सर्कुलर इकोनामी को अपनाया जाए तो वर्ष 2047 तक यह लगभग 4,200 अरब रुपये का विशाल बाजार अवसर बन सकता है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र में लगभग 24 अरब डालर के निवेश की संभावनाएं हैं और 26 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन हो सकता है।

सीईईडब्ल्यू के अध्ययन ''आर्गेनिक वेस्ट सर्कुलर इकोनामी फार विकसित भारत'' के मुताबिक, शहरों में गीले कचरे की प्रोसेसिंग बढ़ाकर नेट उत्सर्जन में करीब 68 मिलियन टन कार्बन डाइआक्साइड के बराबर की कमी लाई जा सकती है। वर्तमान में देश के शहरों में रोजाना 1,71,000 टन ठोस कचरा निकलता है, जिसमें आधा हिस्सा जैविक कचरे का होता है।

दिल्ली में कचरा प्रबंधन और बड़े नीतिगत प्रयास

राजधानी में इस दिशा में तेजी से काम शुरू हो चुका है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार, दिल्ली के जैविक कचरे से तैयार होने वाली प्रति किलो बायो-सीएनजी, आयातित जीवाश्म ईंधन की निर्भरता को कम करती है। इसी क्रम में एमसीडी के इंजीनियर-इन-चीफ पीसी मीना ने बताया कि दिल्ली के प्रमुख डेयरी क्लस्टरों- नंगली, गोयला, घोगा और भलस्वा में बायोमेथेनेशन प्लांट चालू किए जा रहे हैं।

इसके लिए एमसीडी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि बायो-सीएनजी को सीधे शहर के गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ा जा सके। ऐसे में जबकि दिल्ली में कूड़े के तीनों पहाड़ों को खत्म करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है और बार बार इसकी डेडलाइन भी बढ़ रही है, एमसीडी का उक्त प्रयास भविष्य के लिए एक विकल्प भी हो सकता है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम और चुनौतियां

अप्रैल 2026 से लागू हुए नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत अब स्रोत पर ही कचरे की छंटाई करना और उसे नजदीकी कंपोस्टिंग या बायोमेथेनेशन केंद्र भेजना अनिवार्य हो गया है। खुले में कचरा जलने से शहरों में पीएम 2.5 का स्तर 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। सीईईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बोराह के अनुसार, शहरों को होटलों, बाजारों और आवासीय परिसरों के लिए साल भर चलने वाले अति-स्थानीय तंत्र की जरूरत है।

कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के मुख्य सुझाव

-शहरों में स्रोत पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करना सुनिश्चित किया जाए।
-कचरा उत्पादन और उसके प्रकार से जुड़े डेटा को नियमित रूप से अपडेट करना जरूरी है।
-सरकारी टेंडरों में केवल ''सबसे कम लागत'' देखने के बजाय गुणवत्ता और काम के प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाए।
-कचरे से बनने वाली कंपोस्ट, जैविक खाद और बायो-सीएनजी की बिक्री के लिए भरोसेमंद बाजार तैयार हों।

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