मरीजों को फिर से रोजमर्रा के काम सिखाती है ऑक्यूपेशनल थेरेपी, सफदरजंग अस्पताल में विशेषज्ञों ने समझाया महत्व
आक्यूपेशनल थेरेपी दिवस पर दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल में खास आयोजन किया गया। जिसमें मरीजों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
VMMC सफदरजंग में विश्व आक्यूपेशनल थेरेपी दिवस मनाया गया।
थेरेपी मरीजों को दैनिक जीवन के कार्य सिखाती है।
बच्चों, बुजुर्गों और तंत्रिका तंत्र रोगियों के लिए उपयोगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बीमारी, दुर्घटना या शारीरिक परेशानी के कारण जब व्यक्ति अपने रोजमर्रा के काम खुद करने में सक्षम नहीं रह जाता, तब उसे दोबारा आत्मनिर्भर बनाने में विश्व आक्यूपेशनल थेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसके माध्यम से मरीजों को नहाने, कपड़े पहनने, खाना खाने, लिखने-पढ़ने और कामकाज करने योग्य बनाया जाता है। इसी महत्व को रेखांकित करते हुए वर्धमान महावीर मेडिकल कालेज (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल में 27 अक्टूबर को विश्व आक्यूपेशनल थेरेपी दिवस मनाया गया। इस वर्ष की थीम 'भागीदारी महत्वपूर्ण है' रही।
क्या होता आक्यूपेशनल थेरेपी?
डॉ. कविता शर्मा ने पुनर्वास सेवाओं को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। डा. चारु बंबा ने कहा कि चिकित्सा और सर्जरी से जीवन बचाने के साथ मरीज को फिर से अपने काम खुद करने और पारिवारिक जीवन में सक्रिय भागीदारी के योग्य बनाना भी आवश्यक है। इसमें व्यावसायिक चिकित्सा की अहम भूमिका है।
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डॉ. अजय गुप्ता ने कहा कि इसका उद्देश्य व्यक्ति को उन गतिविधियों के लिए सक्षम बनाना है, जो उसके जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। विभाग के फैकल्टी प्रभारी डा. आरके वाधवा ने बताया कि इससे हर आयु वर्ग के लोगों को दैनिक जीवन और कामकाज के कौशल दोबारा हासिल करने में मदद मिलती है।
इन समस्याओं में उपयोगी
विभाग की प्रभारी नीलम वर्मा ने बताया कि बच्चों के विकास संबंधी समस्याओं, तंत्रिका तंत्र की बीमारियों, हड्डियों-जोड़ों की समस्याओं और बुजुर्गों के पुनर्वास में यह उपयोगी है। इसमें शारीरिक, मानसिक, संवेदी और सामाजिक बाधाओं को ध्यान में रखकर मरीज को प्रशिक्षण दिया जाता है। उमंग शर्मा ने विभाग के कार्यों की सराहना की। अंत में डा. आरके वाधवा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में कृष्णावी चैरिटेबल ट्रस्ट की सुश्री उमंग शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बंबा का प्रोत्साहन और प्रधानाचार्य डॉ. गीतिका खन्ना का मार्गदर्शन रहा। शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर) विभाग के अध्यक्ष डा. अजय गुप्ता ने अपनी टीम के साथ कार्यक्रम का समन्वय किया।
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