मां बनने के बाद विनेश फोगाट की कुश्ती वापसी पर दिल्ली HC सख्त, WFI और केंद्र से मांगा जवाब
विनेश फोगाट की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मातृत्व अवकाश के बाद महिला एथलीटों की वापसी के लिए निष्पक्ष ...और पढ़ें
-1779608395960-1788315054067-1788315061416_m.webp)
विनेश फोगाट ने महिला पहलवानों के लिए नीति बनाने की मांग की।
HighLights
विनेश फोगाट की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाब मांगा।
मातृत्व अवकाश के बाद महिला एथलीटों की वापसी का मुद्दा।
WFI की अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द करने की भी मांग।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद प्रतियोगी खेल में लौटने वाली महिला एथलीटों के लिए एक निष्पक्ष और व्यवस्थित फ्रेमवर्क बनाने की मांग को लेकर पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने याचिका पर भारतीय ओलिंपिक संघ को भी नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की
विनेश फोगाट की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने कहा कि यह महिला एथलीटों और मातृत्व अवकाश व खेल में भाग लेने की उनकी क्षमता पर इसके असर से जुड़ा एक बड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानक यह हैं कि जो महिला एथलीट मातृत्व अवकाश लेती है, उसे कुछ फायदे और उसकी रैंकिंग आदि की सुरक्षा दी जाती है।
उन्होंने कहा कि याचिका में चयन और नामिनेशन प्रक्रिया और मातृत्व से जुड़ी अनुपस्थिति के कारण नुकसान उठाने वाले एथलीटों के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
अनुपस्थिति के लिए सजा मिली
याचिका में एक निश्चित और समय-सीमा वाला घरेलू प्रतियोगिता कैलेंडर बनाने की भी मांग की गई है।
जुलाई 2025 में मां बनीं फोगाट ने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद कुश्ती करियर फिर से शुरू करने पर, उन्हें बिना किसी रियायत के प्रतियोगी प्रक्रिया में फिर से शामिल होना पड़ा, जबकि गर्भावस्था के कारण वह उस दौरान प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाई थीं।
याचिका में कहा गया है कि योग्यता फ्रेमवर्क गर्भावस्था अवधि के दौरान हुए टूर्नामेंट में प्रदर्शन पर आधारित था। इससे उन्हें प्रतियोगिता में लौटने का वैकल्पिक रास्ता देने के बजाय अनुपस्थिति के लिए सजा मिली।
अनुशासनात्मक कार्रवाई रद करने की मांग
फोगाट ने एक और याचिका दायर कर डब्ल्यूएफआई द्वारा उन्हें जारी किए गए दो कारण बताओ नोटिस और उनके विरुद्ध शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद करने की मांग की गई है। अदालत इस याचिका पर भी संघ के वकील से निर्देश लेने को कहा। इस याचिका पर सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
डब्ल्यूएफआई के वकील ने कहा कि उन्होंने दो बार सुनवाई रखी, लेकिन कोई नहीं आया इसलिए अब आखिरी मौका दिया गया है और सुनवाई दो सितंबर को होगी। याचिका में फोगाट ने कहा कि नौ मई और 17 जून को उन्हें जारी किए गए दो नोटिस संघ की मनमानी और गलत इरादे वाली कार्रवाई का हिस्सा हैं।
इसमें गर्भावस्था के बाद प्रतियोगी कुश्ती में उनकी वापसी में बाधा डाल रहे हैं। इसमें कहा गया है कि इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा एक जनवरी 2026 से प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की मंजूरी मिलने के बावजूद संघ ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।
