दिल्ली: दो एयरपोर्ट तो बन गए, लेकिन पहुंचेंगे कैसे? सस्ती बसें और तेज ट्रेनें ही तय करेंगी इस मॉडल का भविष्य
देश में ट्विन एयरपोर्ट मॉडल का विस्तार हो रहा है, लेकिन यात्रियों के लिए एयरपोर्ट तक पहुंचना और दो एयरपोर्ट ...और पढ़ें
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HighLights
जेवर-IGI के बीच सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी का अभाव बड़ी चुनौती।
मुंबई में नवी मुंबई एयरपोर्ट ने मुफ्त शटल सेवा शुरू की।
सस्ती परिवहन व्यवस्था ही ट्विन एयरपोर्ट मॉडल की सफलता की कुंजी।
गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। देश में विमानन क्षमता बढ़ाने के लिए ट्विन एयरपोर्ट मॉडल को विस्तार दिया जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और गोवा में दूसरे एयरपोर्ट के विकास से हवाई यातायात को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस माडल की सफलता केवल उड़ानों और यात्रियों की बढ़ती संख्या से नहीं आंकी जा सकती।
असली सवाल यह है कि यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में कितना समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है। खासकर उन यात्रियों के लिए, जिन्हें एक एयरपोर्ट से दूसरे एयरपोर्ट पहुंचकर अगली उड़ान पकड़नी होती है, निर्बाध परिवहन व्यवस्था बेहद जरूरी है।
जेवर एयरपोर्ट के सामने कनेक्टिविटी की चुनौती
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 15 जून 2026 से व्यावसायिक उड़ानें शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में हवाई सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। यहां टैक्सी, ऐप आधारित कैब और बसों जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और जेवर के बीच सीधा मेट्रो संपर्क नहीं है। दोनों एयरपोर्ट के बीच सड़क दूरी करीब 72 से 78 किलोमीटर है।
सामान्य यातायात में टैक्सी से पहुंचने में 90 से 110 मिनट और लगभग 1300 से 2,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। व्यस्त समय में यात्रा तीन घंटे तक खिंच सकती है। ये अनुमान हैं, निश्चित समय या सरकारी दरें नहीं। ऐसे में दोनों एयरपोर्ट के बीच सीधी और नियमित सार्वजनिक परिवहन सेवा की जरूरत बढ़ जाती है।
मुंबई में शटल से राहत, मेट्रो का इंतजार
मुंबई में नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के बीच संपर्क मजबूत करने की पहल हुई है। नवी मुंबई एयरपोर्ट ने 5 अक्टूबर को दोनों एयरपोर्ट के बीच प्रति घंटे मुफ्त शटल सेवा की घोषणा की।
इसके अलावा दादर ईस्ट और बोरीवली के लिए इलेक्ट्रिक बसें 170 और 210 रुपये में उपलब्ध हैं। दोनों एयरपोर्ट को जोड़ने वाली प्रस्तावित मेट्रो लाइन-8 का निर्माण मई 2031 तक पूरा करने और जून 2031 से सेवा शुरू करने का लक्ष्य है। इससे पहले यात्रियों को सड़क परिवहन पर निर्भर रहना होगा।
गोवा में गंतव्य के हिसाब से तय करें खर्च
गोवा में मोपा और डाबोलिम एयरपोर्ट के बीच चयन करते समय यात्रियों को अपने अंतिम गंतव्य और परिवहन खर्च का आकलन करना होगा। फिलहाल मोपा से पणजी का एसी शटल किराया 200 रुपये और मडगांव का 400 रुपये है। डाबोलिम से पणजी का किराया 150 रुपये है। ये किराये गंतव्य तक पहुंचने के हैं, दोनों एयरपोर्ट के बीच सीधे स्थानांतरण के नहीं।
बेहतर परिवहन से ही सफल होगा मॉडल
ट्विन एयरपोर्ट माडल को यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए सस्ती बसें, नियमित शटल, तेज रेल संपर्क और उड़ानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, तभी विमानन क्षमता में बढ़ोतरी का लाभ यात्रियों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
