टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में गर्लफ्रेंड बनी हथियारों की कूरियर, ‘डेड लेटर बॉक्स’ से अमृतसर से पहुंचाए पिस्टल-कारतूस
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले की जांच में 'डेड लेटर बॉक्स' तकनीक का उपयोग करने वाले एक खतरनाक ...और पढ़ें

जांच अधिकारियों के हत्थे चढ़ी राधा यूपी के सीतापुर के नहवैया और बबीता आजमगढ़ के कोटियार की रहने वाली है। एजेंसी
HighLights
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में 'डेड लेटर बॉक्स' सिंडिकेट का खुलासा।
अमृतसर से हथियार पहुंचाने में गर्लफ्रेंड राधा का इस्तेमाल कूरियर के तौर पर।
पुलिस बड़े गैंगस्टर्स से कनेक्शन और साजिश की जांच कर रही है।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। बाॅलीवुड अभिनेता टाइगर श्राॅफ की कार पर फायरिंग मामले की जांच में दिल्ली-मुंबई पुलिस के हाथ बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है।
जांच में सामने आया है कि इस मामले में शूटरों तक हथियार पहुंचाने के लिए खतरनाक और आधुनिक 'सिंडिकेट' काम कर रहा था, जो स्पाई थ्रिलर फिल्मों की तर्ज पर 'डेड लेटर बाॅक्स' तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे हथियार तस्करी और सप्लाई नेटवर्क का दायरा कई राज्यों तक फैला हुआ है।
क्या होता 'डेड लेटर बाॅक्स'?
खुफिया एजेंसियों और जांच अधिकारियों की भाषा में 'डेड लेटर बाॅक्स' उस गुप्त ठिकाने या लोकेशन को कहा जाता है, जहां आमने-सामने मिले बिना ही एक व्यक्ति दूसरे के लिए सामान (इस मामले में हथियार) छोड़कर चला जाता है। इस सिंडिकेट में भी ऐसा ही हुआ।
अमृतसर में एक गुप्त लोकेशन पर कोई अनजान शख्स हथियार छिपाकर चला गया था, जिसे उठाने के लिए कुणाल और सुमित नामक गुर्गे पहुंचे थे।
इस मामले को बहुत ही बेहतर प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया ताकि किसी के पकड़े जताने पर भी पुलिस सारी कड़ियों को जोड़ नहीं पाए, लेकिन पुलिस सारी साजिश का पता लगा लिया।
अमृतसर से हथियारों की खेप और अनिल पंडित का कनेक्शन
पुलिस पूछताछ और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुणाल और सुमित करीब दो हफ्ते पहले पंजाब के अमृतसर हथियार लेने गए थे। अनिल पंडित नाम के शख्स ने उन्हें हथियारों की वह गुप्त लोकेशन पहले ही भेज दी थी।
दिलचस्प बात यह है कि कुणाल और सुमित यह तक नहीं जानते थे कि उस लोकेशन पर हथियार रखने वाला असली शख्स कौन था। उन्हें केवल निर्देश मिले थे और वे तयशुदा जगह से खेप उठाकर निकल आए।
इस खतरनाक टास्क को पूरा करने के लिए अनिल पंडित ने दोनों आरोपितों को 70 से 80 हजार रुपये दिए थे, जिसमें से 10 से 12 हजार रुपये उन्होंने बबीता और राधा नाम की दो युवतियों को बांटे थे।
जेल से बाहर आते ही जुड़ा अपराधियों का नेटवर्क
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुणाल इसी साल जुलाई में सोनीपत जेल से बाहर आया था। जेल से बाहर आने के बाद उसके एक पुराने दोस्त ने उसकी मुलाकात अनिल पंडित से कराई थी।
इसके बाद से कुणाल सीधे तौर पर मिलने के बजाय एन्क्रिप्टेड चैटिंग एप्स के जरिए अनिल पंडित के संपर्क में रहने लगा। करीब दो हफ्ते पहले अनिल ने कुणाल को अमृतसर से हथियार लाकर उन्हें मुंबई तक पहुंचाने का बड़ा टास्क सौंपा था।
गर्लफ्रेंड राधा को बनाया 'कूरियर', कैसे हुआ पर्दाफाश?
कानून की पकड़ से बचने के लिए कुणाल ने बेहद शातिर तरीके से अपनी गर्लफ्रेंड राधा को कूरियर के रूप में इस्तेमाल किया। राधा और बबीता सोनीपत की एक फैक्ट्री में काम करती हैं। कुणाल की राधा से मुलाकात महज दो महीने पहले ही हुई थी।
कुणाल ने अपने शातिर दिमाग का इस्तेमाल करते हुए राधा को भरोसे में लिया और उसे बबीता के साथ हथियार लेकर सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंचने के निर्देश दिए।
राधा और बबीता बिना किसी शक के घेरे में आए आसानी से सफर कर सकें, इसलिए युवतियाें को कूरियर के तौर पर चुना गया। राधा यूपी के सीतापुर के नहवैया और बबीता आजमगढ़ के कोटियार की रहने वाली है।
अब जांच एजेंसियां तलाश रहीं दो सवालों के जवाब
फिलहाल, पुलिस इस सिंडिकेट के हर एक मोहरे अनिल पंडित, कुणाल, सुमित, राधा और बबीता से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस हथियार सिंडिकेट के तार किन-किन बड़े गैंग्सटर्स या अपराधियों से जुड़े हैं?
साथ ही, टाइगर श्राॅफ से जुड़े मामलों में इन हथियारों का इस्तेमाल किस साजिश के तहत किया जाना था? यह जानकारी मिलने बाद से सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ी हुई है और जल्द ही इस मामले में कई अन्य गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
