AI से 20 सेकंड में होगी डीपफेक की पहचान, थापर के छात्रों ने बनाया नया सिस्टम; बैंक फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
थैपर इंस्टीट्यूट के छात्रों ने 20 सेकंड में डीपफेक वीडियो की पहचान करने वाला सिस्टम बनाया है, जिससे बैंक में होने वाले फर्जीवाड़े को होने से रोकना आसान हो जाएगा।
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आईआईटी दिल्ली में आयोजित रक्षम-2026 हैकाथॉन में शामिल टीम, जागरण
HighLights
थैपर छात्रों ने डीपफेक पहचान सिस्टम विकसित किया।
20 सेकंड में बैंक केवाईसी फर्जीवाड़ा रोकेगा यह।
आईआईटी दिल्ली हैकाथॉन में जीता पहला पुरस्कार।
गौरी, दक्षिणी दिल्ली। वीडियो कॉल पर चेहरा असली दिख रहा हो, लेकिन वह डीपफेक तकनीक से बनाया गया हो तो? बैंक में केवाइसी के दौरान ऐसे कई मामले सामने आते है। जिनका समाधान करने के लिए पटियाला के थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी के छात्रों ने समाधान तैयार किया है।
टीम ‘मामा मिया’ ने ऐसा सिस्टम बनाया है, जो करीब 20 सेकेंड में वीडियो की जांच कर डीपफेक या चेहरे के साथ की गई छेड़छाड़ का पता लगाने में मदद करेगा।
वेबसाइट और एप दोनों पर काम करेगा सिस्टम
आईआईटी दिल्ली में आयोजित रक्षम-2026 राष्ट्रीय एआई साइबर सुरक्षा हैकाथॉन में टीम ने पहला स्थान हासिल कर दो लाख रुपये का पुरस्कार जीता। टीम में गनीव सिंह, यश बिश्नोइ, केशव जुनेजा शामिल है। यह एक आर्किटेक्ट है जो वेबसाइट और एप दोनों में काम करेगा।
टीम के सदस्यों ने बताया कि उनका सिस्टम चार तरह की जांच से मिले संकेतों और साक्ष्यों के आधार पर यह आकलन करता है कि वीडियो असली है या उसमें छेड़छाड़ की गई है। इसमें चेहरे, शारीरिक गतिविधियों और कैमरा सेंसर से जुड़े संकेतों की जांच शामिल है। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर सिस्टम बैंक के एजेंट को अलर्ट देगा, जिससे फर्जी केवाइसी की प्रक्रिया रोकी जा सकेगी।
40 घंटे में तैयार किया समाधान
सदस्यों ने बताया कि प्रतियोगिता से एक सप्ताह पहले शुरू किया था। इसके बाद 40 घंटे की तय अवधि में प्रोटोटाइप तैयार किया। इस दौरान आरबीआइ के दिशा-निर्देशों, ग्राहकों की जरूरतों और तकनीक को मौजूदा केवाईइसी प्रक्रिया में जोड़ने पर काम किया गया। उन्होंने बताया कि यह अधिकतर बैंक के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
ग्राहकों के लिए मुफ्त रखने की योजना
टीम के मुताबिक, यह बैंक के लिए तैयार किया गया बिजनेस-टू-बिजनेस समाधान है, जिसे बैंकों की मौजूदा केवाइसी प्रक्रिया में जोड़ा जा सकता है। ग्राहकों के लिए इसका इस्तेमाल मुफ्त रखने की योजना है। टीम में तीन सदस्य हैं और सभी थापर इंस्टीट्यूट से हैं।
युवाओं के लिए आयोजित हुआ हैकाथॉन
आईआईटी दिल्ली में आयोजित रक्षम-2026 हैकाथॉन में टीम ‘मामा मिया’ ने फेस डिटेक्शन वेबसाइट बनाकर पहला स्थान हासिल किया, जबकि टीम लूजर ने वायरस क्लोनिंग पकड़ने वाला एप बनाया। हैकाथन में 4700 से अधिक पंजीकरण हुए और 30 टीमों ने समाधान पेश किए। अमेजन चुनिंदा टीमों को एडब्ल्यूएस क्रेडिट देकर तकनीक विकसित करने में मदद करेगा।
इस दौरान जूरी में अमेजन इंडिया के उपाध्यक्ष (लीगल) राकेश बख्शी ने बताया कि जिम्मेदार कंपनियों को लोगों को जागरूक करने, गलत गतिविधियों की जांच करने पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए अमेजन ने काउंटरफिट क्राइम यूनिट भी बनाई है, जो नकली उत्पादों से जुड़े मामलों पर काम करती है। कार्यक्रम में आइफारसी के निदेशक अमित गुप्ता और आइआइटी दिल्ली के छात्र मामले डीन के प्रो. प्रद्युम्न एस मौजूद रहे।
