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Swiggy पर कीमत दिखी 1500 रुपये, रेस्टोरेंट में वसूले 2100-2200; कंज्यूमर फोरम का आदेश- एक लाख का मुआवजा भरो

Published: Sat, 03 Oct 2026 09:17 PM (IST)

दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने स्विगी और एक रेस्टोरेंट को बुफे की गलत कीमत दिखाने पर ग्राहक को एक लाख रुपये ...और पढ़ें

दिल्ली उपभोक्ता फोरम ने ग्राहक को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न, असुविधा और कानूनी खर्च के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

दिल्ली उपभोक्ता फोरम ने ग्राहक को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न, असुविधा और कानूनी खर्च के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

HighLights

  1. स्विगी और रेस्टोरेंट को गलत बुफे कीमत पर एक लाख मुआवजा।

  2. दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने मानसिक परेशानी, उत्पीड़न के लिए आदेश दिया।

  3. अतिरिक्त सर्विस चार्ज ब्याज सहित ग्राहक को वापस करने का निर्देश।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने फूड डिलीवरी प्लेटफार्म पर बुफे की गलत कीमत दिखाने के लिए स्विगी और एक रेस्टोरेंट को जिम्मेदार ठहराते हुए दोनों को मिलकर ग्राहक को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न, असुविधा और कानूनी खर्च के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश रोज होने वाली गलत तरीके की वसूली के लिए बड़ी नजीर है।

सर्विस चार्ज को ब्याज के साथ वापस करें

दिव्या ज्योति जयपुरियार की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि वह ग्राहक को स्विगी डाइन-आउट पर दिखाई गई कीमत से अधिक और गैर-कानूनी तरीके से लिए गए 254 रुपये के सर्विस चार्ज को नौ प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस करे।

आयोग ने कहा कि स्विगी सिर्फ आइटी एक्ट के प्रविधान का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। उसे पक्के तौर पर यह दिखाना होगा कि उसने संबंधित कानूनों और उनके तहत बने नियमों के मुताबिक हर तरह से जरूरी सावधानी बरती थी।

अतिरिक्त भुगतान वसूल किया

आयोग ने उक्त आदेश आवेदनकर्ता व अधिवक्ता प्रवीण कुमार सिंह की शिकायत पर दिया। उन्होंने सात अप्रैल 2024 के लिए स्विगी ऐप के डाइनआउट सेक्शन के जरिए थेमिस बारबेक्यू हाउस में 14 लोगों के लिए टेबल बुक की थी। स्विगी डाइनआउट लिस्टिंग में दो लोगों का खर्च 1500 रुपये दिखाया गया था।

इसका मतलब था कि प्रति व्यक्ति कीमत 750 रुपये है। हालांकि, रेस्टोरेंट ने शाकाहारी बुफे के लिए 1050 रुपये और मांसाहारी बुफे के लिए 1100 रुपये चार्ज किए। इससे प्रति व्यक्ति क्रमशः 300 रुपये और 350 रुपये का अतिरिक्त भुगतान वसूल किया गया।

दिखाई गई कीमत से असल में कीमत कहीं ज्यादा

आयोग ने कहा कि स्विगी की लिस्टिंग में ऐसा कोई संकेत नहीं था कि दो लोगों का खर्च वाला आंकड़ा सिर्फ एक अनुमान था। आयोग ने कहा कि दिखाई गई कीमतों और असल कीमतों के बीच लगभग 40-47 प्रतिशत का अंतर काफी अधिक था।

आयोग ने स्विगी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि वह सिर्फ एक मध्यस्थ है और उसे आईटी अधिनियम की धारा-79 के तहत सुरक्षा मिली हुई है। आयोग ने कहा कि स्विगी सिर्फ कानून के प्रविधान का हवाला देकर अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता।

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