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नई दिल्ली [ जेएनएन ] । आम आदमी पार्टी आखिरकार भाजपा के दुर्ग में सेंध लगाने में कामयाब रही। आप ने एक सोची समझी रणनीति के साथ बहुत चतुराई से भाजपा नेता व राज्यमसभा सदस्य एवं पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी को आप में शामिल कर लिया।

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सियासी हलके में यह मिलाप अहम माना जा रहा है। चूंकि पंजाब में अगले वर्ष विधानस्भाा चुनाव होने हैं, ऐसे में नवजोत का आप में शामिल होना आप की एक बड़ी कामयाबी मानी जा सकती है। सिद्धू की पंजाब में एक अच्छी साख है। जाहिर है कि इसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिलेगा।

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यह कयास लगाया जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के पूर्व सिद्धू को मुख्यमंत्री कैंडिडेट बनाया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो आप को इस चुनाव में स्थाानीयता का संकट खत्म हो जाएगा। इसका असर यहां के विधानसभा चुनाव में पड़ सकता है। ऐसे में लाजमी है कि आप सिद्धू को टंप कार्ड के रूप में पेश कर सकती है।

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आखिर क्यों नराज हुए सिद्धू

नवजोत सिद्धू की भाजपा के प्रति यह नाराजगी पुरानी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर सीट से सांसद सिद्धू का टिकट काट दिया गया। उनकी जगह अरुण जेटली को टिकट दे दिया गया। सिद्धू इस सीट से दस वर्षों से सांसद थे। लेकिन पार्टी का यह दांव उलटा पड़ा।

इस चुनाव में जेटली पराजित हुए। इसके बाद से सिद्धू भाजपा के शीर्ष प्रबंधन से नाराज चल रहे हैं। सिद्धू इसे अपने साथ अन्याय मानते हैं। हालांकि, पार्टी ने उनकी नाराजगी दूर करने की पूरी कोशिश की। उन्हें राज्यसभा से सांसद बनाया गया। लेकिन वह पार्टी में लगातार उपक्षित महसूस कर रहे थे। यही कारण है कि सांसद बनने के तीन मही्ने के भीतर ही उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ लिया।

नाता तोड़ने की अन्य वजहें

सूत्रों के मुताबिक नवजोत की पत्नीे नवजोत कौर सिद्धू पंजाब में भाजपा की विधायक हैं। नवजोत कौर पंजाब में लगातार भाजपा के सहयोगी पार्टी अकाली दल पर प्रहार करती रहीं हैं। जब पंजाब में अकाली और भाजपा गठजोड़ बनाए जाने का ऐलान किया गया तो नवजोत दंपती काफी झुब्ध थे।

अकाली-भाजपा का यह समीकरण उन्हें रास नहीं आ रहा था। सहयोगी पार्टी अकाली के साथ नवजोत दंपती का यह रवैया जाहिर तौर पर पार्टी हाईकमान को भी अखरता था। कुछ समय से नवजोत आप पार्टी के संपर्क में थे। ऐसे में आप में शामिल होना कोई चकित करने वाली घटना नहीं है।

Posted By: Ramesh Mishra

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