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भीषण गर्मी से बढ़ेगी पानी की मांग, सुनीता नारायण ने बताया भारत के जल संकट का समाधान

Published: Fri, 22 May 2026 11:54 PM (IST)

सुनीता नारायण ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के कारण पानी के बड़े संकट से जूझ रहा है और भीषण ...और पढ़ें

सुनीता नारायण ने कहा कि भारत इस समय जलवायु परिवर्तन के कारण पानी के बड़े संकट से जूझ रहा है।

सुनीता नारायण ने कहा कि भारत इस समय जलवायु परिवर्तन के कारण पानी के बड़े संकट से जूझ रहा है।

HighLights

  1. भारत जलवायु परिवर्तन के कारण पानी के बड़े संकट में।

  2. जल स्रोतों को बचाना और भूजल रिचार्ज करना आवश्यक।

  3. ग्रामीण स्तर पर पानी प्रबंधन की तकनीकी समझ बढ़ाना।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि भारत इस समय जलवायु परिवर्तन के कारण पानी के बड़े संकट से जूझ रहा है। भीषण गर्मी की वजह से पानी की मांग भी और बढ़ने वाली है। लेकिन हमें यह समझना होगा कि इसके लिए सिर्फ मौसम का बदलाव जिम्मेदार नहीं है।

असली समस्या यह है कि हम अब तक देश के सभी लोगों को साफ पानी पहुंचाने के लिए एक सस्ती और बेहतर जल प्रबंधन प्रणाली नहीं बना पाए हैं।

दिव्यांग वाघेला सहित कई बड़े अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए

वह सीएसई और टाटा ट्रस्ट द्वारा ग्रामीण इलाकों में पानी और बहते हुए गंदे पानी के सही प्रबंधन को लेकर शुक्रवार को इंडिया हैबीटेट सेंटर में आयोजित एक कार्यशाला में बोल रही थीं। इस कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्रालय के सचिव अशोक के. के. मीना, नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक युगल किशोर जोशी और टाटा ट्रस्ट के दिव्यांग वाघेला सहित कई बड़े अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि सरकार के 'जल जीवन मिशन' के तहत ग्रामीण इलाकों के 80 प्रतिशत से अधिक घरों तक पाइप से पानी पहुंचा दिया गया है। लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती इन जल स्रोतों को हमेशा के लिए बचाए रखने की है।

इसके लिए जमीन के नीचे के पानी (भूजल) को फिर से रिचार्ज करना और गंदे पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल में लाना जरूरी है। सरकार ने इसके लिए उत्तर प्रदेश के बांदा व बिजनौर और राजस्थान के पाली जिलों में कुछ खास अध्ययन भी किए हैं।

ग्रामीण समाज को आगे लाना सबसे ज्यादा जरूरी 

मीना ने कहा कि अब ''जल जीवन मिशन 2.0'' के तहत सरकार का पूरा ध्यान ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने पर है ताकि गांव के लोग खुद अपने पानी के सिस्टम की देखरेख और संचालन कर सकें। वाघेला ने भी माना कि इस काम में ग्रामीण समाज को आगे लाना सबसे ज्यादा जरूरी है।

सुनीता नारायण ने इस समस्या को सुलझाने के लिए चार मुख्य बातें सामने रखीं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें पानी के स्रोतों को सूखने से बचाना होगा और जमीन के नीचे के पानी को रिचार्ज करने पर ध्यान देना होगा। दूसरी बात, पानी से जुड़े अलग-अलग सरकारी विभागों को आपस में मिलकर काम करना चाहिए ताकि पैसों और योजनाओं का सही इस्तेमाल हो सके।

मौजूदा सिस्टम में डेटा की कमी: सुनीता

तीसरी बात, हमें पानी की शुद्धता जांचने के लिए बिल्कुल सही और समय पर मिलने वाले आंकड़ों (डेटा) की जरूरत है, क्योंकि मौजूदा सिस्टम में डेटा की कमी है। आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गांवों के स्तर पर तकनीकी समझ बढ़ानी होगी ताकि लोग खुद अपने स्तर पर पानी का बेहतर और आधुनिक प्रबंधन कर सकें।

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