एक ही कॉरिडोर में मेट्रो, RRTS और एक्सप्रेसवे से बढ़ा दबाव; सराय काले खां से आश्रम तक जाम से बेहाल लोग
सराय काले खां से आश्रम तक लगातार बढ़ता यातायात दबाव सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का परिणाम है। ...और पढ़ें

HighLights
सराय काले खां से आश्रम तक यातायात दबाव बढ़ा।
सरकारी एजेंसियों में समन्वय की कमी मुख्य कारण।
समग्र यातायात अध्ययन और एकीकृत योजना की आवश्यकता।
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। सराय काले खां से आश्रम तक लगातार बढ़ता यातायात दबाव सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी पर सवाल खड़े कर रहा है। इस पूरे कारिडोर में अलग-अलग समय पर रेलवे स्टेशन, मेट्रो, आरआरटीएस, अंतरराज्यीय बस अड्डा, डीएनडी, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, आश्रम फ्लाईओवर और बारापुला परियोजनाएं विकसित होती गईं, लेकिन इन सभी परियोजनाओं से एक साथ बढ़ने वाले यातायात का समग्र अध्ययन नहीं किया गया।
इसका असर अब सड़क पर दिखाई दे रहा है। एक परियोजना से निकलने वाला यातायात आगे दूसरी परियोजना के जाम वाले बिंदु पर पहुंचकर फंस रहा है।
बारापुला फेज-3 के शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि रिंग रोड पर सराय काले खां के सामने यातायात का दबाव कम होगा, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इसके उलट मयूर विहार और पूर्वी दिल्ली की ओर से आने वाला अतिरिक्त यातायात भी सराय काले खां होते हुए आश्रम की ओर पहुंच रहा है। पहले से व्यस्त इस पूरे मार्ग पर वाहनों का दबाव और बढ़ गया है।
एक ही क्षेत्र में कई परिवहन साधनों का दबाव
सराय काले खां में रेलवे स्टेशन, मेट्रो, आरआरटीएस और अंतरराज्यीय बस अड्डा एक ही क्षेत्र में हैं। इन सभी स्थानों पर यात्रियों को लाने-ले जाने वाले निजी वाहन, बसें, आटो और अन्य यातायात मुख्य सड़क पर पहुंचते हैं।
अलग-अलग दिशाओं से आने वाला यह यातायात रिंग रोड पर मिलता है और इसके बाद आश्रम की ओर बढ़ता है। इस कारण सराय काले खां के सामने लगातार दबाव बना रहता है।
बताया जाता है कि मेरठ एक्सप्रेसवे को तैयार किए जाने के समय इसे रिंग रोड पर सराय काले खां को पार कर आश्रम विस्तार फ्लाईओवर से जोड़ने की मांग की गई थी। लोक निर्माण विभाग के पूर्व प्रमुख अभियंता दिनेश कुमार के अनुसार, यदि उस समय ऐसी व्यवस्था की गई होती तो आज सराय काले खां में जाम की समस्या इतनी विकट नहीं होती।
आश्रम मोड़ पर अलग-अलग दिशाओं का यातायात आपस में टकरा रहा
सराय काले खां से आगे बढ़ने पर आश्रम मोड़ पर स्थिति और जटिल हो जाती है। यहां डीएनडी, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, बारापुला-1 और अब बारापुला फेज-3 से आने वाला यातायात एक-दूसरे के संपर्क में आता है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से लाजपत नगर की ओर जाने वाले वाहनों को आश्रम फ्लाईओवर की तरफ जाना होता है, जबकि सराय काले खां और बारापुला की ओर से आने वाला यातायात आश्रम की तरफ बढ़ता है। दोनों दिशाओं का यातायात एक-दूसरे को काटता है, जिससे जाम की स्थिति बन रही है। एक बड़ी समस्या यह भी है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से डीएनडी की ओर जाने के लिए सीधा रास्ता उपलब्ध नहीं है।
ऐसे वाहन चालकों को सराय काले खां बस अड्डे के सामने फ्लाईओवर के नीचे आकर यू-टर्न लेना पड़ता है। इससे मुख्य मार्ग पर अनावश्यक यातायात बढ़ता है और जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
गुरुद्वारा के पास चार दिशाओं से आ रहा यातायात
रिंग रोड पर आश्रम मोड़ के दूसरे हिस्से में गुरुद्वारा के पास भी यातायात का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। यहां चार दिशाओं से वाहन आ रहे हैं। आश्रम की ओर से आने वाला यातायात, आश्रम विस्तार फ्लाईओवर से लाजपत नगर की ओर आने वाले वाहन, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तथा डीएनडी की ओर से आने वाला यातायात एक स्थान पर मिल रहा है।
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इसके बाद यही यातायात आगे सराय काले खां की ओर बढ़ता है और आइटीओ की दिशा में जाने वाली सड़क पर भी दबाव बढ़ाता है। यानी एक स्थान पर अलग-अलग परियोजनाओं से निकलने वाला यातायात एक-दूसरे से मिल रहा है, लेकिन इनके बीच यातायात संचालन की समग्र योजना दिखाई नहीं देती।
सूर्यघड़ी क्लोवरलीफ भी बना नया बोतलनेक
बारापुला के सूर्यघड़ी क्लोवरलीफ पर भी अब नया बोतलनेक बन गया है। बारापुला फेज-3 से तीन लेन का यातायात सूर्यघड़ी के दो लेन वाले क्लोवरलीफ में मिल रहा है। इससे एक साथ पांच लेन का यातायात इस हिस्से में पहुंच जाता है, जबकि आगे बारापुला-1 की ओर जाने के लिए यह यातायात तीन लेन में सिमट जाता है। लेन की यह कमी भी जाम बढ़ने का एक कारण बन रही है।
पूरे क्षेत्र का एक साथ अध्ययन जरूरी
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक और नेशनल काउंसिल आफ एप्लाइड इकोनामिक रिसर्च के वरिष्ठ सलाहकार डा. एस. वेलमुरुगन के अनुसार, सराय काले खां की समस्या में सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी एक बड़ा कारण है।
उनके अनुसार केवल किसी एक चौराहे, फ्लाईओवर या सड़क का समाधान करने से समस्या खत्म नहीं होगी। सराय काले खां से आश्रम तक पूरे क्षेत्र का समग्र यातायात अध्ययन कराया जाना चाहिए।
परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा कहते हैं कि यहां के अध्ययन में रेलवे, मेट्रो, आरआरटीएस, अंतरराज्यीय बस अड्डा, बारापुला फेज-3, डीएनडी, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और आश्रम फ्लाईओवर से आने-जाने वाले यातायात को एक साथ शामिल किया जाना चाहिए।
पहले यह पता लगाना जरूरी है कि किस दिशा से कितने वाहन आ रहे हैं, किस समय सबसे अधिक दबाव रहता है और किन स्थानों पर अलग-अलग दिशाओं का यातायात एक-दूसरे से टकरा रहा है। इसके बाद ही पूरे कारिडोर के लिए एकीकृत यातायात योजना बनाकर जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
