नई दिल्ली/सोनीपत, जागरण संवाददाता। तीन नये कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को बैठक कर निर्णय लिया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद भवन के पास प्रदर्शन किया जाएगा। 22 जुलाई से मानसून सत्र के दौरान रोजाना अलग-अलग संगठनों से करीब 200 आंदोलनकारी दिल्ली पहुंचकर संसद भवन के बाहर प्रदर्शन करेंगे। यही नहीं 19 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पूर्व 17 जुलाई को मोर्चा के सदस्य सभी विपक्षी दलों के सांसदों को चेतावनी पत्र देकर संसद में चुप्पी तोड़ने या कुर्सी छोड़ने की मांग करेंगे। उनसे अपील करेंगे कि जब तक तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता और एमएसपी पर कानून बनाने की बात नहीं होती, तब तक संसद न चलने दें।

कुंडली बार्डर पर रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल सदस्यों ने बैठक कर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया। मोर्चा के नेताओं ने सीधे तौर पर आरपार की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। सबसे पहले किसानों ने मानसून सत्र के दौरान लोकसभा के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। इस निर्णय के अनुसार 22 जुलाई से मोर्चा में शामिल संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल हर संगठन से 5 किसान दिल्ली में लोकसभा के बाहर पहुंचेंगे। यानी मानसून सत्र के दौरान रोजाना 200 किसान लोकसभा के बाहर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन सत्र चलने के दौरान रोजाना किया जाएगा।

पेट्रोल, डीजल व गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन

इसके अलावा आठ जुलाई को देशभर में पेट्रोल, डीजल व गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हाईवे के किनारे 10 से 12 बजे तक गाड़ियां, गैस सिलेंडर के साथ प्रदर्शन करेंगे। हालांकि इस दौरान रोड जाम नहीं किया जाएगा। मोर्चा के नेताओं ने बताया कि 12 बजे आठ मिनट तक सभी गाड़ियों के हार्न बजाकर सरकार को जगाने का काम किया जाएगा। इसके अलावा बैठक में निर्णय लिया गया कि कृषि कानून विरोधी किसी भी धरने या मोर्चा पर किसी भी राजनीतिक दल के लोग, विधायक, सांसद या जनप्रतिनिधि को मंच साझा नहीं करने दिया जाएगा। बैठक में बलबीर सिंह राजेवाल, डा. दर्शनपाल, बलदेव सिंह सिरसा, मंजीत सिंह राय, गुरनाम सिंह चढ़ूनी, बूटा सिंह बुर्जगिल, प्रेम सिंह भंगू, बलवंत सिंह, बूटा सिंह शादीपुर, सुरजीत फूल सिंह, अभिमन्यु कोहाड़, वीरेंद्र हुड्डा आदि मौजूद थे।

प्रधानमंत्री आवास पर होगा छह को प्रदर्शन

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि फरीदाबाद के खोरी गांव को उजाड़ने के विरोध में छह जुलाई को प्रधानमंत्री आवास पर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेशक सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, लेकिन इसके बाद भी सरकार के पास लोगों को उजाड़ने से बचाने के कई रास्ते हैं। सरकार काे वहां रहने वाले सभी लोगों के पुनर्वास का इंतजाम करना चाहिए। सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। उसी गांव में बड़े-बड़े होटल बने हैं, जिस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। एक सवाल के जवाब में चढ़ूनी ने कहा कि हरियाणा में पंचायत चुनाव के दौरान आंदोलन को सहयाेग नहीं करने वालों को वोट नहीं डालने की अपील की जाएगी। यह उनका फैसला है और फिलहाल मोर्चा ने इस तरह का कोई निर्णय नहीं लिया है।

पंजाब के सीएम आवास का घेराव कार्यक्रम स्थगित

मोर्चा की बैठक में पंजाब के विभिन्न संगठनों के द्वारा यह घोषणा भी की गई कि पंजाब में बिजली की आपूर्ति की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है। इसलिए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के आवास मोती महल के घेराव का पूर्व घोषित कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया है।

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Edited By: Mangal Yadav