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साकेत हादसा: लौटना था कामयाबी के साथ, लेकिन इस कदर लौटे कि नम हो गईं सबकी आंखें

Published: Mon, 01 Jun 2026 04:05 AM (IST)

साकेत के सैदुलाजाब में हुए इमारत हादसे ने कई परिवारों के सपनों को तोड़ दिया है। हादसे में एमबीबीएस डॉक्टर, ...और पढ़ें

साकेत के सैदुलाजाब में हुए इमारत हादसे ने कई परिवारों के सपनों को तोड़ दिया।

साकेत के सैदुलाजाब में हुए इमारत हादसे ने कई परिवारों के सपनों को तोड़ दिया।

HighLights

  1. सैदुलाजाब इमारत हादसे में चार युवाओं की मौत।

  2. एमबीबीएस डॉक्टर, यूपीएससी उम्मीदवार, बीडीएस छात्रा शामिल।

  3. परिवारों के उज्जवल भविष्य के सपने हुए चकनाचूर।

मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। साकेत के सैदुलाजाब में हुए दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों के सपनों को हमेशा के लिए मलबे में दफन कर दिया। जिन घरों में बच्चों की सफलता और उज्जवल भविष्य के सपने सजाए जा रहे थे, वहां अब मातम पसरा है।

हादसे में जान गंवाने वालों में कोई एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर डाक्टर बन चुका था, तो कोई सरकारी अधिकारी बनकर परिवार का सहारा बनने की तैयारी कर रहा था। अपनों को खोने के गम में डूबे स्वजन इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे कि उनके बच्चों के सपने अधूरे रह गए। मुस्कानें हमेशा के लिए उनसे छिन गई हैं।

पीजी की तैयारी कर रहा था रवि

हादसे में गोंडा के रहने वाले 24 वर्षीय रवि प्रकाश ने 2024 में किर्गिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। परिवार में वह अकेला था जिसने डाक्टर की डिग्री हासिल की थी और वह सैदुलाजाब इलाके में किराए के कमरे में रहकर पीजी की तैयारी कर रहा था। हादसे के समय वह अपने दोस्तों के साथ कैंटीन में खाना खाने के लिए गया था।

उनकी दोस्त अनामिका ने बताया कि हम खाना खा ही रहे थे कि तभी एक अन्य दोस्त ने कहीं ओर खाना खाने की जिद की। हम दोनों वहां के लिए निकले थे और रवि कैंटीन में ही रुक गया। थोड़ा दूर चले ही थे कि अचानक इमारत ढह गई। हम रवि को ढूंढते रह गए। रवि के एक रिश्तेदार ने बताया कि वह डाक्टर बनकर गरीबों की मदद करना चाहता था। उनके पिता राम गांव में स्कूल चलाते हैं।

बिहार से इंजीनियरिंग कर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहा था नलिन

हादसे में जान गंवाने वाला बिहार के नवादा जिले का 32 वर्षीय नलिन राय इंजीनियरिंग करने के बाद रेलवे में अधिकारी बनने के लिए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परिवार में सबसे छोटा नलिन सबका लाडला था। पिता संजय किसान हैं। नलिन के ममेरे भाई सोनू ने बताया कि नलिन अक्सर कैंटीन में खाना खाने जाया करता था। हादसे के कुछ देर पहले वह अपने दोस्त के साथ कैंटीन में पराठा खाने के लिए गया था। उनका दोस्त दो मिनट के लिए दही लेने बाहर निकला।

इतने में ही इमारत भरभराकर गिर गई। दोस्त कुछ समझ पाता तब तक नलिन मलबे में फंस गया। रात भर की तलाश के बाद उसे रविवार सुबह मलबे से निकाला गया लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। परिवार को मौत की सूचना मिली तो उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट गया। एम्स ट्रामा सेंटर की मोर्चरी के बाहर खड़े उसके स्वजन बिलखते रहे और गमगीन हालत में शव को लेकर नवादा रवाना हो गए।

इंटरव्यू अच्छा हुआ तो कैंटीन में पार्टी करने दोस्तों के साथ पहुंचा था कपिल

हादसे का शिकार हुआ 28 वर्षीय कपिल भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) में नौकरी का इच्छुक था और उस प्रतिष्ठित संस्थान में एक पद के लिए उसने शनिवार को इंटरव्यू दिया था। इंटरव्यू में उसका प्रदर्शन अच्छा रहा और उसे उम्मीद थी कि जुलाई में आने वाले नतीजों में उसका चयन हो जाएगा।

इसी खुशी में उसने शनिवार शाम अपने पांच दोस्तों को पार्टी देने के लिए बुलाया और सभी उसी इमारत में बनी कैंटीन में खाना खा रहे थे तभी इमारत ढह गई। उसके दोस्त तो किसी तरह बच गए, लेकिन कपिल मलबे में दब गया। उसे देर रात मलबे में से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। रविवार दोपहर उसका शव पोस्टमार्टम के बाद स्वजन को सौंप दिया गया।

डॉक्टर के सफेद कोट में देखने का था सपना, सफेद कफन में बदला

वहीं हादसे की शिकार 24 वर्षीय एकता मूल रूप से अलवर रहने वाली थी। उसने बीडीएस की पढ़ाई पूरी कर ली थी और पिछले एक साल से दिल्ली में रहकर एफएमजीई परीक्षा की तैयारी कर रही थी। 28 जून को उनकी परीक्षा होने वाली थी। 25 जून को जन्मतिथि थी। इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी थीं।

परिवार सोच रहा था कि परीक्षा के बाद बेटी घर आएगी और फिर उसके भविष्य की नई शुरुआत होगी। रविवार दोपहर करीब चार बजे जब बचाव दल ने मलबे से एकता का शव निकाला तो पिता रमेश चंद के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस बेटी को डाक्टर के सफेद कोट में देखने का सपना उन्होंने सालों तक संजोया था, वह सफेद कफन में घर लौटने वाली थी।

युवा डॉक्टरों की मौत से पूरा मेडिकल समुदाय स्तब्ध

फेडरेशन आफ आल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फायमा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. राकेश कुमार सिंह और महासचिव डा. मनीष जांगड़ा ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एफएमजी और नीट-पीजी की तैयारी कर रहे युवा डाक्टरों के हताहत होने की खबर से पूरा मेडिकल समुदाय स्तब्ध है। यह केवल कुछ छात्रों की मौत नहीं, बल्कि देश की भावी चिकित्सा व्यवस्था के लिए भी बड़ी क्षति है।

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