रोहिणी कोर्ट की 15 मंजिला बिल्डिंग जर्जर, जंग खा रहा सरिया; अब IIT मद्रास करेगा जांच
रोहिणी कोर्ट की 15 मंजिला इमारत जर्जर हालत में है, जिससे अधिवक्ताओं और आगंतुकों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

रोहिणी कोर्ट की 15 मंजिला इमारत को लेकर सुरक्षा ऑडिट की मांग (AI-Generated)
HighLights
रोहिणी कोर्ट की 15 मंजिला इमारत की हालत जर्जर।
कंक्रीट उखड़ने से सरिया दिखने लगा, जंग का खतरा।
अधिवक्ताओं ने तत्काल सुरक्षा ऑडिट की मांग की।
संजय डबास, बाहरी दिल्ली। रोहिणी कोर्ट परिसर की 15 मंजिला मुख्य इमारत की हालत जर्जर है। इसको लेकर अधिवक्ताओं और यहां आने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जुलाई 2006 में बनी इस इमारत की स्थिति वर्ष 2018 से ही चिंताजनक बनी है।
भवन के कई हिस्सों में कंक्रीट उखड़ने के साथ सरिया दिखाई देने लगे हैं। सरिये में जंग लगने की आशंका के बीच अधिवक्ताओं ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से तत्काल संरचनात्मक सुरक्षा आडिट कराने की मांग की है।
पीडब्ल्यूडी विभाग से मांग
अधिवक्ताओं ने पीडब्ल्यूडी विभाग से मांग की है कि इस भवन पर केवल प्लास्टर कर देना पर्याप्त नहीं, बल्कि भवन की वास्तविक मजबूती की विशेषज्ञों से जांच जरूरी है। रोहिणी कोर्ट की इस इमारत में करीब 490 अधिवक्ता चैंबर हैं। यहां लगभग 13 हजार पंजीकृत अधिवक्ता अपनी पेशेवर गतिविधियां करते हैं।
इसके अलावा प्रतिदिन हजारों वादी, प्रतिवादी, गवाह, पुलिसकर्मी और कर्मचारी भी पहुंचते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी आशंका को नजरअंदाज करना बड़ी लापरवाही साबित हो सकता है। अधिवक्ताओं के अनुसार, भवन के कुछ हिस्सों में कंक्रीट और मसाला हटने से सरिया दिखाई देता है। सरिये में जंग लगने और संरचनात्मक मजबूती प्रभावित होने की आशंका है। कुछ स्थानों पर पहले दिखाई देने वाले सरिये को हटाकर या ढककर प्लास्टर किए जाने की बात भी सामने आई है।
तकनीकी जांच जरूरी
पार्किंग क्षेत्र में लिफ्ट के आसपास की खराब स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। ऐसे में छत, लेंटर, बीम, कालम, पार्किंग और लिफ्ट क्षेत्र की तकनीकी जांच जरूरी है। भवन के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। ऐसे में अधिवक्ताओं की मांग है कि किसी सक्षम एवं स्वतंत्र तकनीकी संस्था से पूरी इमारत का स्ट्रक्चरल सेफ्टी आडिट कराया जाए।
यदि किसी हिस्से में कमजोरी मिलती है तो केवल ऊपरी मरम्मत के बजाय आवश्यक मरम्मत और मजबूतीकरण किया जाए। अधिवक्ताओं ने कहा कि दिल्ली भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आती है। ऐसे में भवन की संरचनात्मक स्थिति की अनदेखी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने क्या कहा?
इस संबंध में पीडब्ल्यूडी अधिकारी का कहना है कि रोहिणी कोर्ट की अधिवक्ताओं के चैंबर वाली इमारत की संरचनात्मक स्थिति की जांच आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों के माध्यम से कराई जा रही है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट और सुझाव मिलने के बाद ही इमारत की मरम्मत या अन्य आवश्यक कार्रवाई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
कोर्ट में प्रतिदिन हजारों लोग न्याय की उम्मीद लेकर आते हैं। उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए भवन की वास्तविक स्थिति का विशेषज्ञों से तत्काल ऑडिट कराकर कमियों को दूर किया जाना चाहिए।
- प्रवीण डबास, अधिवक्ता, संयुक्त सचिव
जहां सरिया दिखाई दे रहा है या कंक्रीट उखड़ रहा है, वहां केवल प्लास्टर करना पर्याप्त नहीं है। पीडब्ल्यूडी को पूरी इमारत की जांच कराकर जरूरी मरम्मत समयबद्ध तरीके से करानी चाहिए, ताकि किसी दुर्घटना से पहले सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
