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दिल्ली में 700 करोड़ के घोटाले में बड़ा एक्शन, महीनों से फरार मुख्य आरोपित राजीव रंगीला ने किया सरेंडर

Published: Fri, 25 Sep 2026 10:58 PM (IST)

700 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले के मुख्य आरोपी राजीव कुमार रंगीला ने दिल्ली एसीबी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

700 करोड़ रुपये के बहुचर्चित मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले का मुख्य आरोपित राजीव कुमार रंगीला गिरफ्तार।

700 करोड़ रुपये के बहुचर्चित मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले का मुख्य आरोपित राजीव कुमार रंगीला गिरफ्तार।

HighLights

  1. मुख्य आरोपी राजीव रंगीला ने दिल्ली एसीबी के सामने आत्मसमर्पण किया।

  2. यह मामला 700 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले का है।

  3. फर्जी कंपनियों और टेंडर हेरफेर के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 700 करोड़ रुपये के बहुचर्चित मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले के मुख्य आरोपित राजीव कुमार रंगीला ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह फरार हो गया था।

एसीबी ने उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर नोटिस जारी कर दिया था। यह मामला मेडिकल उपकरण और दवा खरीद घोटाले से जुड़ा है, जो दिल्ली सरकार के सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय से संबंधित है। रंगीला को शुक्रवार को अदालत में पेश कर चार दिन की रिमांड लिया गया है।

एसीबी की कई नोटिसों के बावजूद पेश न होने पर अधिकारियों ने दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में इसे ढूंढने केे लिए कई माह तक छापेमारी की थी। मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद वह अमेरिका भाग गया था और जून से फरार चल रहा था।

अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था और एजेंसी अक्टूबर के पहले हफ्ते में उसकी संपत्तियां जब्त करने की तैयारी कर रही थी। एसीबी की जांच में सामने आया कि पूर्वी दिल्ली के रहने वाले राजीव रंगीला ने फर्जी नामों से कई शेल (फर्जी) कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के कागजी मालिक उसके नौकर और चाय बेचने वाले (टी वेंडर) थे, जबकि असल संचालन रंगीला ही करता था।

एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राजश्री, आशि सर्जिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स, एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड ये सब रंगीला की ही कंपनी है। रंगीला पर निर्माताओं के साथ मिलकर सप्लाई के रेट फिक्स करने और नकद में कमीशन लेने का आरोप है। आरोप है कि निर्माताओं के साथ मिलकर जानबूझकर ऐसी शर्तें और स्पेसिफिकेशन तैयार किए जाते थे जो चुनिंदा फर्मों को फायदा पहुंचा सकें।

फर्जी कंपनियों को रिकार्ड में लाकर भ्रम पैदा किया जाता था। इन दस्तावेजों को सीपीए के तत्कालीन हेड आफ आफिस डाॅ. विनोद कुमार रंगा के पास भेजा जाता था, जो इसे टेंडर कमेटी के सामने रखते थे। डाॅ. रंगा इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले व्यक्ति थे उसे 18 जून को गिरफ्तार किया गया था।

जांच में यह भी पता चला कि राजीव रंगीला एक बड़ा फार्मा ट्रेडर और सप्लायर है। उसने 2014 में करनाल से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, हालांकि वह हार गया था।

एसीबी की जांच में दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में उसकी संपत्तियों के बारे में पता चला है। एसीबी रिमांड के दौरान उससे इन फर्जी कंपनियों को खड़ा करने में मदद करने वालों और विभाग से गायब हुई फाइलों के बारे में पूछताछ करेगी।

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