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रजत शर्मा मानहानि केस: रागिनी नायक, पवन खेड़ा व जयराम रमेश तलब; रिपोर्ट में वायरल वीडियो से छेड़छाड़ की बात उजागर

Published: Wed, 04 Feb 2026 07:34 PM (IST)

साकेत कोर्ट ने पत्रकार रजत शर्मा की मानहानि शिकायत पर कांग्रेस नेता रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश को ...और पढ़ें

साकेत कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा की ओर से दायर आपराधिक मानहानि और जालसाजी की शिकायत पर कांग्रेस नेता रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश को तलब किया है।

साकेत कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा की ओर से दायर आपराधिक मानहानि और जालसाजी की शिकायत पर कांग्रेस नेता रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश को तलब किया है।

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। साकेत कोर्ट स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा की ओर से दायर आपराधिक मानहानि और जालसाजी की शिकायत पर कांग्रेस नेता रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश को तलब किया है। मामला इंटरनेट मीडिया में छेड़छाड़ किए गए वीडियो क्लिप को शेयर करने से जुड़ा है। कोर्ट ने तीनों को 27 जुलाई 2026 को पेश होने के आदेश दिए हैं।

रजत शर्मा की छवि को पहुंचा नुकसान

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी देवांशी जनमेजा ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ प्रथम दृष्टया जालसाजी, बदनाम करने के इरादे से जालसाजी, जाली इलेक्ट्रानिक रिकार्ड के इस्तेमाल और आपराधिक मानहानि के आरोप बनते हैं।

अदालत के अनुसार, शिकायतकर्ता ने यह दिखाया है कि आरोपितों ने ऐसे पोस्ट किए। इससे यह धारणा बनी कि रजत शर्मा ने कांग्रेस की महिला प्रवक्ता रागिनी नायक के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द कहे। कोर्ट ने कहा कि इससे शिकायतकर्ता की छवि को नुकसान पहुंचा और इंटरनेट मीडिया पर उन्हें अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।

वीडियो पर शीर्षक और कैप्शन बाद में जोड़े

कोर्ट ने जांच के दौरान फारेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें आरोपितों द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में स्पष्ट बदलाव पाए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो पर शीर्षक और कैप्शन बाद में जोड़े गए थे, जिससे पोस्ट-प्रोडक्शन एडिटिंग का संकेत मिलता है। अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने यह दिखाया है कि मूल फुटेज आरोपितों को नहीं दी गई थी और इंटरनेट मीडिया पर डाला गया वीडियो टीवी पर प्रसारित कार्यक्रम की रिकार्डिंग से तैयार किया गया था।

ट्रायल में विचार किया जाएगा

समन जारी करने के चरण पर सीमित जांच का दायरा बताते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर विस्तृत सुनवाई नहीं होती और आरोपितों को अपना बचाव ट्रायल के दौरान साबित करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के अंतिम फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं है और सभी पहलुओं पर ट्रायल में विचार किया जाएगा।

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