भारतीय थाली में प्रोटीन-फाइबर की कमी, हर तीसरा बच्चा कुपोषित; जानें कारण और समाधान
भारतीयों की थाली में प्रोटीन और फाइबर की गंभीर कमी है, जिससे देश के 73% लोग प्रभावित हैं और हर तीसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
73% भारतीयों के आहार में पर्याप्त प्रोटीन की गंभीर कमी।
पांच साल से कम उम्र का हर तीसरा बच्चा कुपोषण से पीड़ित।
उच्च लागत और सुविधाजनक विकल्पों की कमी पोषण में बड़ी बाधा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारत की आर्थिक तरक्की के बीच बड़ी जनसंख्या की थाली में आज भी पोषण की कमी गंभीर चुनौती बनी हुई है।
देश के 73 प्रतिशत लोगों के प्रतिदिन के आहार में पर्याप्त प्रोटीन नहीं पहुंच रहा है। शहरों में 44 प्रतिशत और गांवों में 36 प्रतिशत लोग अपनी रोज की प्रोटीन जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
हर तीसरे बच्चे में पोषण की कमी
शहरी भारत में 60 प्रतिशत लोग दाल, अंडा, दूध, पनीर, मछली या नट्स आदि प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ नियमित रूप से नहीं खाते। इसका असर बच्चों के पोषण पर भी दिख रहा है। पांच साल से कम उम्र का हर तीसरा बच्चा पोषण की कमी, बौनेपन या कम वजन से ग्रसित है।
इन शहरों के बच्चों पर हुआ अध्ययन
द स्टेट आफ प्रोटीन एंड फाइबर इन अर्बन इंडिया और आइसीएमआर-एनआइएन के व्हाट इंडिया ईट्स की ओर से मंगलवार को जारी की गई रिपोर्ट में देश की यह स्थिति सामने आई।
इसे भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (आइआइएमआर) ने पेप्सिको इंडिया, यूरोमानिटर इंटरनेशनल के सहयोग से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि के 1250 लोगों पर किए गए अध्ययन के अनुसार जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार 70 प्रतिशत शहरी प्रतिदिन 41 ग्राम से कम प्रोटीन लेते मिले।
सुविधाजनक विकल्पों की कमी बड़ी बाधा
अध्ययन में 60 प्रतिशत लोगों ने प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों की अधिक लागत और 57 प्रतिशत ने सुविधाजनक विकल्पों की कमी को बड़ी बाधा बताया। फाइबर के लिए 69 प्रतिशत ने सुविधाजनक और भरोसेमंद विकल्पों की कमी बताई। 90 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि प्रोटीन को रोजमर्रा के भोजन में आसानी से शामिल किया जा सके।
इन परेशानियों से जूझ रहे बच्चे
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के प्रमुख आंकड़ों के मुताबिक
- 5 वर्ष से कम उम्र के 35 प्रतिशत बच्चे बौनेपन के शिकार हैं।
- 5 वर्ष से कम उम्र के 32 प्रतिशत बच्चे कम वजन से ग्रसित हैं।
- 6 से 59 महीने की उम्र के 67.1% प्रतिशत बच्चे एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं।15 से 19 वर्ष की 59.1% प्रतिशत किशोरियां एनीमिया की शिकार हैं।
श्रीअन्न से थाली की मजबूती पर जोर
आइआइएमआर न्यूट्री हब के अनुसार श्रीअन्न मिशन, पोषण अभियान और मिड-डे मील में बाजरा-रागी को शामिल करना पोषण सुधार की दिशा में कदम है।
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ज्वार, बाजरा और रागी फाइबर व पोषक तत्वों के अच्छे स्रोत हैं। दाल, दूध, अंडा और नट्स जैसे प्रोटीन स्रोतों के साथ इन्हें नियमित आहार में शामिल करने से थाली अधिक पौष्टिक बन सकती है।
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