निलंबित एसीपी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर, वकीलों को दी थी धमकी
दिल्ली हाई कोर्ट में निलंबित एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ वकीलों को एके-47 से धमकाने और बदनाम ...और पढ़ें

वकीलों को धमकाने वाले निलंबित एसीपी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
निलंबित एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका।
वकीलों को एके-47 से धमकाने और बदनाम करने का आरोप।
याचिका में वकीलों की सुरक्षा और कार्रवाई की मांग।
विनित त्रिपाठी, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के एसीपी मनस्वी वशिष्ठ सहित कुछ पुलिसकर्मियों की ओर से अधिवक्ताओं को धमकी देने और सार्वजनिक रूप से बदनाम करने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
अधिवक्ता करण बीर सिंह द्वारा दायर की गई याचिका में वकीलों को एके-47 से धमकाने के मामले में निलंबित एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ कार्रवाई और अधिवक्ताओं की सुरक्षा की मांग की गई है।
कोर्ट ने दिया था याचिका दायर करने का सुझाव
अधिवक्ता विक्रांत डबास के जरिए दायर याचिका में कहा गया कि सार्वजनिक रूप से वकीलों को दी गई धमकी के लिए एसीपी मनिस्वी वशिष्ठ को निलंबित करना घटना से जुड़े संवैधानिक मुद्दों का समाधान नहीं है। इससे पहले मंगलवार को इस मामले का उल्लेख एक अधिवक्ता द्वारा मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया था।
अधिवक्ता ने अदालत से मामले का स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। हालांकि, अदालत ने मामले का स्वत: संज्ञान लेने से इन्कार करते हुए अधिवक्ताओं को मामले में याचिका दायर करने का सुझाव दिया था।
वकीलों ने अदालत को बताया कि निलंबित एसीपी ने एके-47 का इस्तेमाल करने और उन्हें काले कोट वाले गुंडे कहने जैसी टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा कि याचिका दायर करने पर इस पर विचार किया जाएगा।
पुलिस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा पूरा मामला
बता दें कि यह पूरा मामला दो नवंबर को वकीलों के खिलाफ हुए पुलिस विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ ने इस दौरान अधिवक्ताओं को लेकर आक्रोश व्यक्त किया था।
याचिका में दावा किया गया है कि इंटरनेट मीडिया पर वायरल वीडियो में मनिस्वी वशिष्ठ धमकी भरी और अपमानजनक बातें कहते दिख रहे हैं।
याचिका में दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन की जांच पुलिस बल (अधिकारों पर प्रतिबंध) अधिनियम- 1966 के तहत कराने की मांग की गई है।
याचिका में इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो हटाने, वकीलों को सुरक्षा देने और वशिष्ठ समेत धमकी देने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की मांग भी की गई है। यह पूरा मामला 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई घटना के बाद शुरू हुआ था।