दिल्ली के संरक्षित तालाब पर अतिक्रमण, NGT ने NHAI और DPCC को दिए कार्रवाई का आदेश
एनजीटी ने गोयला खुर्द गांव में संरक्षित तालाब पर हाईवे निर्माण के मामले में सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। ...और पढ़ें

एनजीटी ने गोयला खुर्द गांव में संरक्षित तालाब पर हाईवे निर्माण के मामले में सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। ्एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। गोयला खुर्द गांव में एक संरक्षित तालाब पर हाईवे निर्माण के आरोप का स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू किए गए मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कार्रवाई व पुनर्स्थापन करने का निर्देश दिया है।
एक समाचार रिपोर्ट का संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई कर रहे एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
एनजीटी ने पाया कि भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) द्वारा अर्बन एक्सटेंशन रोड-दो परियोजना के तहत एक प्राकृतिक जलाशय (तालाब) पर फ्लाईओवर का निर्माण किया गया। संबंधित तालाब दिल्ली वेटलैंड अथारिटी की सूची में शामिल एक संरक्षित जलाशय है।
एनएचएआइ ने तालाब के अंदर आठ पिलर का निर्माण किया और इससे लगभग 20.36 वर्ग मीटर क्षेत्र प्रभावित हुआ। एनजीटी ने इसे अवैध अतिक्रमण माना। एनजीटी ने रिकार्ड पर लिया कि पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) प्राप्त करते समय तालाब के भीतर निर्माण की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
एनजीटी ने कहा कि वेटलैंड नियम, 2017 के अनुसार जलाशय में निर्माण प्रतिबंधित है। एनजीटी ने कहा कि पर्यावरण कानूनों का सख्ती से पालन अनिवार्य है। एनजीटी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रायल छह माह में उल्लंघन की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश।
साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और एनएचएआइ की संयुक्त टीम को मौके का निरीक्षण कर जलाशय को हुए नुकसान का आकलन करने व सुधारात्मक उपाय तय करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने एनएचएआइ को छह माह में पुनर्स्थापन कार्य पूरा करने का निर्देश। वहीं, डीपीसीसी द्वारा पर्यावरण क्षतिपूर्ति तय कर वसूली करने का भी निर्देश दिया।
