दिल्ली के नालों में गैर-शोधित सीवेज पर NGT सख्त, डूसिब पर लगा 50 हजार का जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली के बरसाती नालों में गैर-शोधित सीवेज के लगातार प्रवाह पर गंभीर चिंता व्यक्त की ...और पढ़ें
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बरसाती नाले में गैर-शोधित सीवेज के लगातार प्रवाह पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीर चिंता व्यक्त की।
HighLights
NGT ने गैर-शोधित सीवेज पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
देरी से जवाब के लिए डूसिब पर 50 हजार जुर्माना।
DPCC को सीवेज जांच, क्षतिपूर्ति लगाने का निर्देश।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली के विभिन्न बरसाती नाले में गैर-शोधित सीवेज के लगातार प्रवाह पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। साथ ही मामले में देरी से जवाब दाखिल करने के लिए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि गैर-शोधित सीवेज का नालों में प्रवाह पर्यावरण कानूनों के विरुद्ध है। एनजीटी ने साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को जेजे क्लस्टरों से हो रहे सीवेज प्रवाह की जांच करे और नियमों के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने का निर्देश दिया। साथ ही डीपीसीसी व डीजेबी को आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में अगली सुनवाई आठ जुलाइ को होगी।
डूसिब द्वारा सिंगल डिस्चार्ज प्वाइंट उपलब्ध नहीं कराया गया
सुनवाई के दौरान दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने एनजीटी को अवगत कराया कि कुछ झुग्गी-झोपड़ी से आने वाले सीवेज को रोकने में कठिनाई आ रही है, क्योंकि डूसिब द्वारा सिंगल डिस्चार्ज प्वाइंट उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह भी बताया कि डूसिब द्वारा आवश्यक आधारभूत ढांचा उपलब्ध न कराए जाने के कारण कई स्थानों पर सीवेज को मुख्य सीवर प्रणाली से जोड़ा नहीं जा सका है।
डूसिब को दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश
एनजीटी ने रिकार्ड पर लिया कि अप्रैल माह में हुई पिछली सुनवाई पर डूसिब को दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन डूसिब ऐसा नहीं कर सका। इससे पहले भी समय पर जवाब नहीं दाखिल करने पर एनजीटी ने डूसिब पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
आवेदनकर्ता ने एनजीटी को बताया कि निरीक्षण किए गए तीनों नालों गैर-शोधित सीवेज बहता हुआ पाया गया और स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। डीजेबी ने भी बताया कि इन तीन नालों में से दो नाले ऐसे हैं, जहां झुग्गी-झोपड़ी से बिना शोधित सीवेज छोड़ा जा रहा है। एनजीटी ने रिकॉर्ड पर लिया कि डूसिब से यह उम्मीद की गई थी कि वह तुरंत कार्रवाई करेगा, लेकिन डूसिब ऐसा करने में विफल रहा है।
