CJP प्रदर्शन के कारण अस्त-व्यस्त रही दिल्ली, यात्रियों को भारी परेशानी; पैदल चलने को मजबूर लोग
सीजेपी के धरना प्रदर्शन, अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेड्स के कारण दिल्ली में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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प्रदर्शन के कारण यात्रियों को हुई परेशानी, जागरण।
HighLights
CJP प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था से दिल्ली में जनजीवन अस्त-व्यस्त।
ट्रेनें रद्द, मेट्रो बंद होने से यात्रियों को भारी परेशानी।
बैरिकेडिंग और यातायात बदलाव ने सफर को बनाया अग्निपरीक्षा।
शशि ठाकुर, नई दिल्ली। सीजेपी के धरना प्रदर्शन व उसके मद्देनजर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था तथा बैरिकेड्स के चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
उसपर ट्रेनें रद होने और मेट्रो स्टेशन बंद होने के कारण शनिवार को दिनभर यात्री रेलवे स्टेशन से लेकर सड़क पर भटकते रहे।
प्रदर्शन के कारण बदले यातायात नियम
ऐसे में कुछ यात्रियों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए जब डीटीसी बसों का सहारा लिया तो बदले यातायात प्रतिबंधित नियमों ने उनकी मंजिल दूर कर दी।
सड़कों पर जगह- जगह बैरिकेडिंग और सड़क के साथ बदले यातायात नियम के कारण राजधानी में सफर करना शनिवार को यात्रियों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा।
यात्रियों को हुई भारी परेशानी
इस दौरान एक परेशान यात्री ने कहा कि रेलवे स्टेशन पहुंचे तो ट्रेनें नहीं मिलीं, बस में बैठे तो रास्ते बदल गए और कैब-आटो लिया तो जाम व मनमाने किराये ने मुश्किलें बढ़ा दीं है।
हालात ऐसे बने कि लोग मंजिल तक पहुंचने के लिए सामान लेकर डेढ़ से तीन किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हुए। अव्यवस्था और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखकर कुछ यात्रियों ने कहा कि उन्हें 1974 में लगे आपातकाल की याद आ गई।
ट्रेनें रद होने से बढ़ी मुश्किलें
गुजरात से आए एक यात्री रोहित को गाजियाबाद जाना था। उनकी टिकट नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक की थी। उन्होंने सोचा कि हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर उतरकर स्थानीय ट्रेन से गाजियाबाद पहुंच जाएंगे, लेकिन वहां ट्रेन नहीं मिली। इसके बाद उन्हें रिक्शा लेकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन आना पड़ा। यहां भी ट्रेन नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ गई।
दूसरी ओर, बिहार के सासाराम निवासी ओम प्रकाश महाबोधि एक्सप्रेस पकड़ने के लिए निर्धारित समय से तीन घंटे पहले स्टेशन पहुंच गए थे। उन्हें ट्रेन रद होने का कोई संदेश नहीं मिला था। उन्होंने कहा कि अगर पहले जानकारी मिल जाती तो बेवजह स्टेशन आने की परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
डीटीसी बस चालकों को भी दिक्कत
बस यात्रियों की मुश्किलें भी कम नहीं थीं। चालकों के अनुसार, सुबह नौ बजे तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन करीब 10 बजे उसी मार्ग पर पहुंचने पर अचानक रूट डायवर्ट कर दिया गया।
चालकों का कहना था कि उन्हें भी पहले से इसकी जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में यात्रियों का गुस्सा परिचालकों पर फूटा। वे सवाल करने लगे कि रास्ता बदलने की सूचना पहले क्यों नहीं दी गई और अब उन्हें अनजान जगह पर क्यों उतरना पड़ रहा है। कई यात्री बस चालक और परिचालक से लगातार पूछते रहे कि बस अब किस रास्ते से जाएगी और कहां तक पहुंचेगी।
चालकों के पास कोई जानकारी नहीं
चालकों के पास भी स्पष्ट जानकारी नहीं थी। वे मोबाइल में मैप देखकर रास्ता तलाशते रहे, लेकिन नई दिल्ली क्षेत्र में इंटरनेट सेवा बाधित होने से यह विकल्प भी काम नहीं आया। कई बसों के रूट 15 से 20 किलोमीटर तक बदलने से यात्रियों को लंबा सफर तय करना पड़ा।
जाम में फंसने के बाद एंबुलेंस तक को इंतजार करना पड़ा। कई लोग बस और कैब छोड़कर एक से डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चलते दिखे। इंटरनेट सेवा बाधित होने से कैब बुक करने और आनलाइन भुगतान में भी दिक्कत आई।
इंटरनेट ठप होने से कैब बुकिंग में परेशानी
लंबा रास्ता तय करने के कारण आटो और कैब का किराया भी बढ़ गया। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर आटो चालक बृजेश कुमार ने बताया कि सामान्य दिनों में चार से पांच किलोमीटर की दूरी के लिए 100 से 150 रुपये लिए जाते हैं, लेकिन सड़क बंद होने और बैरिकेडिंग के कारण किराया 250 से 300 रुपये तक पहुंच गया।
लंबे जाम में कुछ वाहनों का ईंधन भी खत्म हो गया, जिससे वाहन चालक और लोग परिवार के साथ सड़क पर खड़े होकर परेशान होते रहे। वहीं, नई दिल्ली क्षेत्र में इंटरनेट सेवा बाधित होने से मैप और ऑनलाइन भुगतान भी ठप पड़ गए। ऐसे में आटो वाले पहले भी भुगतान कराते दिखे तो कई लोगों को इसके चलते खाने-पीने तक के भुगतान में परेशानी आई।
मेट्रो में भी हंगामा और अनिश्चितता
मेट्रो स्टेशनों के बाहर भी यात्रियों की भीड़ रही। सेवाएं बंद होने से अनजान कई लोग स्टेशन पहुंचे और तैनात सुरक्षाकर्मियों से गेट खोलने की गुहार लगाते दिखे। आइटीओ पर ही कई यात्री बेरंग लौटे। जगह-जगह सुरक्षा जांच, बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंधों के कारण लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में घंटों लगे।
इन सब के बीच यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत यही रही कि उन्हें न तो ट्रेन रद होने की समय पर जानकारी मिली और न ही बदले रास्तों व यातायात प्रतिबंधों के बारे में स्पष्ट सूचना मिली।
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