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'अगर छूट गई ट्रेन तो क्या होगा मेरा..', फेस्टिव सीजन के बीच इसी डर के साए में जी रहा हर यात्री

Published: Thu, 05 Nov 2026 11:59 PM (IST)

त्योहारी सीजन में नई दिल्ली और आनंद विहार जैसे स्टेशनों पर यात्रियों को भारी भीड़, सुरक्षा जांच और 'नो-रूम' ट्रेनों ...और पढ़ें

फेस्टिव सीजन में आसान नहीं घर जाना ( एआई जेनरेटेड इमेज )

फेस्टिव सीजन में आसान नहीं घर जाना ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. स्टेशनों पर सुरक्षा जांच से प्रवेश में 15-20 मिनट लगते हैं।

  2. प्लेटफॉर्म पर रस्सियों से भीड़ नियंत्रण, फिर भी धक्का-मुक्की आम।

  3. बिहार-यूपी की ट्रेनों में 'नो-रूम', वेटिंग टिकट पर यात्रा।

शशि ठाकुर, नई दिल्ली। घर पहुंचने के बीच ट्रेन छूटने की चिंता, त्योहारी सीजन में रेलवे स्टेशनों से प्लेटफॉर्म तक पहुंचना ही किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। भारी-भरकम सूटकेस, कंधे पर बच्चों के साथ ही धुकधुकी कि कहीं गाड़ी छूट न जाए।

नई दिल्ली और आनंद विहार जैसे व्यस्त स्टेशनों के बाहर से लेकर प्लेटफॉर्म तक का यात्रियों का सफर इन दिनों ऐसे ही सुरक्षा घेरे और इंतजामों से होकर गुजर रहा है।

सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई है। स्थिति यह है कि यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश में 15 से 20 मिनट लग रहे हैं। जबकि, प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के आने से पहले यात्रियों को रस्सियों और बैरिकेडिंग के दायरे में रोककर रखा जा रहा है।

जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रूकती है, तब घेरे हटाए जाते हैं। बावजूद इसके कोच में घुसने की होड़ में अफरातफरी और धक्कामुक्की होना आम है। स्टेशन के प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

हालांकि, इसके चलते वक्त काफी लग रहा है। स्थिति यह कि 15 से 20 मिनट का अतिरिक्त इंतजार बुजुर्गों, महिलाओं और भारी गठरियों के साथ चल रहे यात्रियों की सांसे फुला दे रहा है।

प्लेटफॉर्म पर भगदड़ को रोकने लिए रेलवे ने रस्सियों की बैरिकेडिंग का सहारा तो लिया है, लेकिन पहिए थमते ही यात्रियों में पहले घुसने की होड़ मच जाती है।

नो-रूम ट्रेनों का बढ़ता दबाव और उम्मीदों का सफर

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की राह ताकने वाली ट्रेनों-जैसे संपूर्ण क्रांति, मगध, श्रमजीवी, विक्रमशिला और वैशाली एक्सप्रेस-में कंफर्म सीटों का टोटा हालात को और गंभीर बना रहा है।

अधिकांश गाड़ियों में नो-रूम के बोर्ड टंगे हैं या बुकिंग पूरी तरह फुल है। ऐसे में हजारों यात्री वेटिंग टिकट के सहारे ही स्टेशन पहुंच रहे हैं। जिसके कारण भीड़ बढ़ रही है।

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