दस्तावेज के जरिए पुलिस ने गिनाए नेहा बोरा पर लगे आरोप, HC के निर्देश से लेकर मजिस्ट्रेट कोर्ट तक की पूरी कहानी
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और धारा 163 के ...और पढ़ें
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अखिल भारतीय छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा बोरा, जागरण।
HighLights
पुलिस ने नेहा बोरा को मुकदमों के दस्तावेज सौंपे।
धारा 163 उल्लंघन के आरोप में कानूनी कार्रवाई जारी।
28 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट के समक्ष जवाब दाखिल करेंगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अखिल भारतीय छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा बोरा के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद, नई दिल्ली जिला पुलिस ने शनिवार को उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और धारा 163 के बार-बार उल्लंघन से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज उन्हें सौंप दिए हैं।
अब इस मामले में 28 अक्टूबर को नेहा बोरा को मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना जवाब दाखिल करना होगा।
धारा 163 लागू होने के बाद भी जुटाई भीड़
बीते 16 अक्टूबर को नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू होने के बावजूद, नेहा बोरा ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर अपने समर्थकों को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च में शामिल होने का आह्वान किया था।
दोपहर में समर्थकों के साथ कनॉट प्लेस की ओर बढ़ने के दौरान, मंडी हाउस चौराहे पर बाराखंभा थाना पुलिस ने उन्हें और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया था।
हाई कोर्ट से याचिका खारिज
पुलिस ने उन पर एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने की शर्त रखी थी, जिसे चुनौती देते हुए नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और पुलिस को निर्देश दिया कि वे नेहा को उनके द्वारा किए गए उल्लंघनों के सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएं।
नेहा बोरा ने शनिवार को बाॉन्ड भरने से फिर इनकार कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने औपचारिकताएं पूरी करते हुए उन्हें दस्तावेज सौंपे।
अलग-अलग थानं में कई मामले दर्ज
पुलिस अधिकारी के अनुसार, नेहा बोरा के खिलाफ संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और बाराखंभा थानों में पांच से छह मामले दर्ज हैं। इसके अलावा, दक्षिण व अन्य जिलों में भी उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन दस्तावेज को भी शामिल किया जा सके।
28 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट कोर्ट का अंतिम निर्णय
प्राप्त दस्तावेज का अध्ययन करने के बाद नेहा बोरा के वकील 28 अक्टूबर को अदालत में अपना जवाब पेश करेंगे। इसके बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट इस मामले में अंतिम निर्णय सुनाएगा। संभावना है कि अगली तारीख पर उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये के मुचलके और एक जमानती के साथ बांड भरना होगा।
यदि बांड भरने के बाद वह भविष्य में किसी सरकारी आदेश का उल्लंघन करती हैं, तो पुलिस उन पर कानूनी कार्रवाई कर सकेगी और उन्हें हर माह कोर्ट के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले दिल्ली पुलिस सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे से भी इसी प्रकार के बांड भरवा चुकी है। जिसके बाद से कानून के डर से चारों नेता शांत पड़ चुके हैं।
