नई दिल्ली [धनंजय मिश्रा]। दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर चल रहा धरना-प्रदर्शन बृहस्पतिवार को 50वें दिन में प्रवेश कर गया है। पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों के हजारों किसान दिल्ली-एनसीआर के आधा दर्जन बॉर्डर पर जमा हैं। इस बीच  बाहरी दिल्ली स्थित आजादपुर मंडी में किसान आंदोलन का असर अब खत्म होने लगा है। आंदोलन के शुरुआती दिनों में फल-सब्जियों की आवक प्रभावित होने से थोक कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। मंडी में कई हरी सब्जियों के भाव 10 रुपये प्रतिकिलो से भी कम हो गए हैं। बुधवार को मंडी में टमाटर थोक में तीन से चार रुपये प्रतिकिलो के भाव में बेचा गया। आलू भी सात से 13 रुपये प्रति किलों में बेचा गया। आढ़तियों ने बताया कि मंडी में सब्जियों की आवक सामान्य है, लेकिन खरीदारों की संख्या कम हो गई है। ऐसे में आढ़तियों के पास मांग से अधिक सब्जियों का स्टाक है।

इस बाबत सब्जी के आढ़ती दिनेश पाल ने बताया कि इस समय आलू, गोभी, पत्ता गोभी, गाजर, मूली, शलगम, टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन, बींस, पालक, हरा प्याज थोक में दस रुपये से भी सस्ता बिक रहे हैं। इससे खुदरा बाजारों में भी हरी सब्जियों के दामों में गिरावट आई है। ऐसे में उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिल रहा है।

सब्जियों के दाम कम होने से लोगों की जेब भले ही हल्की होने से बच गई हो, लेकिन आढ़तियों और किसानों को जरूर नुकसान उठाना पड़ रहा है। टमाटर के आढ़ती अनिल मल्होत्र का कहना है कि इन दिनों अलग-अलग राज्यों से आजादपुर मंडी तक टमाटर पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां से दिल्ली एनसीआर की जिन मंडियों को आपूर्ति की जाती थी, किसान आंदोलन के कारण नहीं जा पा रही हैं। ऐसे में औने पौने भाव में टमाटर बेचना पड़ रहा है।

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