यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 27, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मकान की तीसरी मंजिल से आती रही आवाज, कोई तो बचा लो, हम जीना चाहते हैं, पढ़िये क्या है पूरा मामला
धुएं के दबाव के कारण शीशा तो टूट गया लेकिन जाल निकल नहीं सकता था। परिवार के बचने का सिर्फ ...और पढ़ें

नई दिल्ली [शुजाउद्दीन]। कोई तो बचा लो, हम जीना चाहते हैं। 22 गज के मकान की तीसरी मंजिल से यह आवाजें गूंज रही थीं। एक तरफ मौत उन्हें आगोश में लेने को तैयार थी, दूसरी तरफ वह अपनी जान बचाने के लिए छटपटा रहे थे। कमरे की खिड़की में लोहे का जाल लगा हुआ था। अंदर से शीशे का पल्ला था। धुएं के दबाव के कारण शीशा तो टूट गया, लेकिन जाल निकल नहीं सकता था। परिवार के बचने का सिर्फ एक ही रास्ता था, कमरे का दरवाजा। उसके पास आग पहुंचने से उनके बचने की वो उम्मीद भी खत्म हो गई। शवों को देखने पर लग रहा है उन्होंने आग बुझाने की कोशिश भी की, उसी दौरान वह झुलसे भी।
कमरे में आग लगने के बाद जब धुआं उठा तो दंपती और उनके दोनों बच्चों ने मौत को अपने सामने पाया। अक्षय ने बताया, ‘मैं दूसरी मंजिल से तीसरी मंजिल पर पहुंचा तो अंदर से चीखें सुनाई दे रही थीं कि कोई बचा लो, हम जीना चाहते हैं। दरवाजा खोलने का प्रयास किया, लेकिन वह अंदर बंद था। तोड़ने की कोशिश भी नाकाम रही। कमरे में प्लास्टिक का सामान रखा था, जिसमें आग लगने के कारण धुआं ज्यादा बढ़ गया और अंदर फंसे चारो लोगों सांसे थम गईं। मैं बेबस था।’
पड़ोसी बोले, नहीं भूल सकते वह मंजर
होरीलाल के पड़ोसियों का कहना है कि बहुत ही भयानक मंजर था। उस मंजर को वह कभी नहीं भूल सकते। होरीलाल और उनके परिवार की चीखें उनके कानों में गूंज रही हैं। कमरे में धुएं का दबाव अधिक होने से खिड़की का शीशा धमाके के साथ नहीं टूटता तो शायद ही उनको हादसे का पता चलता। पड़ोसियों ने ही दूसरी मंजिल पर सो रहे अक्षय को आवाज देकर जगाया। जब अक्षय ने खिड़की से देखा तो पड़ोसियों ने बताया कि ऊपर की मंजिल पर आग लग गई है।
चोरी न हो जाए सामान, इसलिए लगाकर रखते थे कुंडी
होरीलाल ने बेटे की शादी धूमधाम से करने के लिए लगभग सारी तैयारियां पूरी कर ली थी। उन्होंने कमरे में बेटे आशु की शादी का सामान जमा किया हुआ था। कहीं सामान चोरी न हो जाए, इसलिए परिवार रात के वक्त अंदर से कमरे के दरवाजे की कुंडी लगाकर सोता था।
दूसरी मंजिल पर रखे हुए थे पटाखे
अक्षय की मां रीना ने घर के पास ही खिलौनों की दुकान खोली हुई थी। दीवाली का वक्त है, घर की दूसरी मंजिल पर कम प्रदूषण वाले कुछ पटाखे भी रखे हुए थे। परिवार का कहना है कोर्ट के प्रतिबंध से पहले पटाखे खरीदे गए थे। दमकल विभाग का कहना है आग अगर पटाखे तक पहुंच जाती तो हादसा बड़ा हो सकता था। मकान के भूतल पर एक डाक्टर की दुकान है और पहली मंजिल पर सुनील कुमार अपने परिवार के साथ रहते हैं। सुनील करवाचौथ मनाने के लिए पत्नी के साथ ससुराल गए हुए थे। सोमवार रात को उसका घर बंद था।
दो वाल्मीकि मंदिर होने से गफलत में पड़े दमकलकर्मी
यमुनापार के पुरानी सीमापुरी इलाके में मंगलवार तड़के लगी आग के दौरान दमकल विभाग को फोन करके आग लगने की सूचना दी गई। घटनास्थल एक वाल्मीकि मंदिर के नजदीक बताया गया। दमकल विभाग की ओर से तुरंत घटनास्थल के लिए वाहन रवाना कर दिए गए। लेकिन, सीमापुरी इलाके में दो वाल्मीकि मंदिर होने के कारण दमकलकर्मी गफलत में पड़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि फिर पुलिस की जिप्सी भेजकर दमकल वाहनों को घटनास्थल पर लाया गया। इससे दमकल वाहनों को पहुंचने में करीब आधे घंटे का समय लग गया। हालांकि, तब तक आग बुझाई जा चुकी थी। मकान की तीसरी मंजिल से सिर्फ धुआं निकल रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अगर दमकलकर्मी गफलत में नहीं पड़ते तो उन्हें घटनास्थल पर पहुंचने में सिर्फ 15 मिनट का ही समय लगता, क्योंकि ताहिरपुर दमकल केंद्र घटनास्थल के नजदीक ही था। उधर, दमकल विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक उन्हें सुबह चार बजकर सात मिनट पर आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही चार दमकल वाहन घटनास्थल की ओर रवाना कर दिए गए।
