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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दिल्ली में पेड़ों की जड़ों को कंक्रीट से ढकने की समस्या, वन विभाग ने की कार्रवाई

Published: Thu, 27 Mar 2025 03:50 PM (IST)

Delhi Tree Preservation Act दिल्ली में पेड़ों की जड़ों को कंक्रीट और तारकोल से ढकने की समस्या गंभीर होती जा ...और पढ़ें

Delhi News: मियांवाली नगर में पेड़ की बंद जड़। फोटो जागरण
Delhi News: मियांवाली नगर में पेड़ की बंद जड़। फोटो जागरण

HighLights

  1. द्वारका, विकासपुरी, जनकपुरी, राजौरी गार्डन सहित क्षेत्र में कई जगहों पर देखने को मिलती है यह स्थिति।
  2. सड़कों के किनारे अधिकांश पेड़ों की बंद है जड़ें, नहीं पहुंच रहा हवा- पानी।

जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका, राजौरी गार्डन, उत्तम नगर, जनकपुरी, मियांवाली नगर सहित कई जगहों पर आपको ऐसे पेड़ आसानी से दिख जाएंगे जिनकी जड़ों को कंक्रीट या तारकोल से पूरी तरह या आंशिक तौर बंद कर दिया गया है। आंशिक तौर पर जहां खुली हैं, वहां की स्थिति ऐसी है कि जड़ों तक हवा व पानी पहुंच ही नहीं सकता।

वर्ष 2013 के एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि पेड़ों के एक मीटर के दायरे में कंक्रीट को हटाया जाना है। वन विभाग ने इस नियम के बाबत सभी विभागों और सिविक एजेंसियों को सूचित किया था कि पेड़ों की जड़ों के आसपास के कंक्रीट या तारकोल की परत बिछाना दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के तहत एक अपराध है।

इस नियम के बाद भी पेड़ों की जड़ों के चारों ओर कंक्रीट या तारकोल की परत का नजर आना एक गंभीर अपराध है। द्वारका मोड़ से सेक्टर तीन जाने के क्रम में आपको एक नहीं अनेक पेड़ ऐसे नजर आएंगे जिनकी जड़ में हवा पानी नाम मात्र के लिए भी शायद ही पहुंचता हो।

इन पेड़ों की जड़ों के आसपास या तो गंदगी के ढेर या फिर कंक्रीट के मलबे नजर आते हैं। द्वारका से हटके जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर या आसपास यदि आप पेड़ों पर निगाह डालें तो आप पाएंगे कि कई पेड़ों में ट्रीगार्ड इनके वयस्क होने के बाद भी नहीं हटाए गए।

आलम यह है कि ट्रीगार्ड का ढांचा पेड़ों के विकास को अवरुद्ध कर रहा है। ये ट्रीगार्ड तब लगाए गए थे, जब ये काफी छोटे थे। पशुओं या किसी जीव या वाहन से इन्हें नुकसान नहीं हो, इसके लिए ये ट्री गार्ड लगाए गए थे। लेकिन इन्हें लगाने के बाद कभी हटाया नहीं गया।

नजफगढ़ मेन रोड पर बुरा हाल

राजौरी गार्डन से उत्तम नगर की ओर जाने के क्रम में लोक निर्माण विभाग के अधीन आने वाली मेन नजफगढ़ रोड पर सड़क पर नीम के दर्जनों पुराने पेड़ हैं। अफसोस की बात है कि इन पुराने पेड़ों की देखरेख पर शायद ही किसी का ध्यान जाता हो।

राजौरी गार्डन में नीम के इन मोटे पेड़ों की जड़ कहीं कंक्रीट तो कहीं तारकोल की परत से ढकी नजर आती है। एकाध जगह जहां पेड़ की जड़ के आसपास की थोड़ी बहुत जगह खुली है, वहां शायद ही कभी खुली जगह की मिट्टी की परत को नर्म बनाने की कोशिश की गई हो। यहां जड़ों को इस लायक नहीं छोड़ा गया है कि यहां बारिश का पानी एक सेकेंड पर ठहर सके।

मियांवाली नगर में भी बुरा हाल

मियांवाली नगर में रोहतक रोड से मीराबाग जाने के क्रम में सड़क किनारे अनेक ऐसे पेड़ दिख जाते हैं, जिनकी जड़ों के आसपास कंक्रीट फैला है। इन जड़ों में शायद ही वर्षा का पानी या हवा पहुंच पाता हो।

यहां से कुछ ही दूरी पर पश्चिम विहार, भैरा एंक्लेव में भी ऐसी स्थिति अनेक जगहों पर दिखाई देती है। नियमों के मुताबिक पेड़ों पर बोर्ड लगाना भी अपराध है, लेकिन पेड़ का इस्तेमाल साज सज्जा के लिए किया जा रहा है। पेड़ों की शाखाओं पर बिजली से जलने वाली लड़ियां लगाई जा रही हैं।

क्यों जरूरी है पेड़ की जड़ को खुला रखना 

नियमों के मुताबिक पेड़ की जड़ को खुला रखना अनिवार्य है। बागवानी विशेषज्ञ राकेश बताते हैं कि पेड़ों को विकास के लिए सर्वाधिक जरूरी पानी जमीन से ही मिलता है। यदि पेड़ की जड़ में कंक्रीट होगा तो पेड़ों को बरसाती पानी नहीं मिल पाएगा।

लगातार जमीन का भूजल स्तर नीचे गिरने से अब भूजल का उपयोग पेड़ नहीं कर पाते। इसी तरह द्वारका इलाके में पेड़ पौधे तो खूब लगाए गए हैं लेकिन अधिकांश जगहों पर पेड़ों की जड़ें बंद हैं। ऐसे में इनका विकास अवरूद्ध हो रहा है। इस इलाके में कई पेड़ सूख भी चुके हैं।

वन विभाग के अधिकारी का पक्ष

वन विभाग के अधिकारी से जब इस समस्या के बारे में बात की गई तो उन्होंने पेड़ों की बंद जड़ों से जुड़ी समस्या जहां जहां है, उनकी लोकेशन मांगी और कहा कि यदि कहीं ऐसा है तो हम नियमों के मुताबिक कार्रवाई करेंगे। जो भी इसके लिए दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अभी तक क्यों नहीं हुई, इसपर अधिकारी कुछ विशेष बताने को तैयार नहीं हुए।

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