नई दिल्ली [गौतम मिश्रा]। केबीसी कर्मवीर में आज हॉट सीट पर बैठने वाले सिलवेस्टर पीटर से विकासपुरी के लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। खासकर उनलोगों को आज दिखाए जाने वाले एपीसोड को देखने की बेसब्री काफी अधिक है जिनके लिए सिलवेस्टर किसी फरिश्ते से कम नहीं है। झुग्गी में रहने वाले ऐसे बच्चे जिन्होंने सिलवेस्टर से न सिर्फ फुटबाल बल्कि जिंदगी से जुड़ी कई बातें सीखी हैं, उनके लिए आज दिखाया जाने वाला एपीसोड काफी मायने रखता है। सिलवेस्टर से फुटबाल सीख चुके कई बच्चे अब बड़े होकर आत्मनिर्भर बन चुके हैं।

वहीं ऐसे लड़के जिनकी दिली ख्वाहिश है कि वे सिलवेस्टर से मिलें और उनसे फुटबाल सीखकर अपनी जिंदगी संवारे, वे आज का एपीसोड किसी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहते। इनका कहना है कि आज वे सारा काम निपटाकर हर हाल में टीवी पर प्रसारित होने वाले केबीसी कर्मवीर का एपीसोड देखेंगे।

फुटबाल के अलावा भी काफी कुछ सिखाते हैं सिलवेस्टर
विकासपुरी में झुग्गी के बच्चों के बीच सिलवस्टर काफी लोकप्रिय हैं। झुग्गी में रहने वाले बच्चों को फुटबाल सिखाने का इनका जुनून महज 14 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ। सुविधा संपन्न परिवार से ताल्लुक रखने वाले सिलवेस्टर को इनके माता पिता ने निजी विद्यालय से नाम कटाकर इसलिए तमिल सोसाइटी द्वारा संचालित सरकारी विद्यालय में दाखिला करा दिया ताकि ये तमिल सीख सकें। यहां इनका सामना ऐसे बच्चों से हुआ जो बड़ी तंगी में जीवन जीते थे। तब अपने से थोड़े कम उम्र के बच्चों को इन्होंने फुटबाल के माध्यम से थोड़ी खुशी देनी शुरू की। बढ़ती उम्र के साथ साथ इनका जुनून बढ़ता गया।

आज विकासपुरी की झुग्गियों में रहने वाले बच्चों के लिए ये एक बहुत बड़ा सहारा हैं। अब तो इनके सिखाये कई बच्चे दिल्ली की फुटबाल टीम के सदस्य हैं। कुछ ने खेल कोटे से नौकरी भी हासिल कर ली। एक बच्चे को फ्रांस की एक फुटबाल क्लब ने प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया। आलम यह है कि धीरे धीरे यह फुटबाल झुग्गी में रहने वाले बच्चों की जिंदगी को बदल रहा है। खेल भावना इन बच्चों में कूट- कूटकर भरी नजर आती है। सिलवेस्टर इन बच्चों को न सिर्फ फुटबाल की बारीकियां बल्कि जिंदगी में कैसे सही रास्ते पर चलकर खुद को संवारें, इसका भी ज्ञान देते हैं।

व्यक्तित्व विकास में करते हैं मदद

झुग्गी में रहने वाले कई बच्चे आज सिलवेस्टर की बदौलत अंग्रेजी में बात करते हैं। साफ सफाई के महत्व को समझते हैं। समाज के लिए कैसे उपयोगी बनना है, इसके बारे में भी बताते हैं। सिलवेस्टर आज न सिर्फ विकासपूरी में अपने घर से कुछ दूर स्थित झुग्गियों में बल्कि तिहाड़ के कैदियों को भी फुटबाल सिखाने जाते हैं।

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