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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिर्फ पैसा काफी नहीं, यमुना की सफाई के लिए रणनीति बदलने की जरूरत : सुनीता नारायण

Published: Thu, 08 May 2025 10:19 PM (IST)

पर्यावरणविद् सुनीता नारायण ने यमुना नदी की सफाई को लेकर नई रणनीति अपनाने की आवश्यकता जताई है। सीएसई की रिपोर्ट ...और पढ़ें

सुनीता नारायण ने 'यमुना : एजेंडा नदी की सफाई का' रिपोर्ट भी जारी की
सुनीता नारायण ने 'यमुना : एजेंडा नदी की सफाई का' रिपोर्ट भी जारी की

HighLights

  1. सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरनमेंट की महानिदेशक ने जारी की 'यमुना : एजेंडा नदी की सफाई का' रिपोर्ट
  2. नदी की बदहाली के कारण बयां करने के साथ ही इसके पुनरोद्धार के लिए पांच उपाय अपनाने पर दिया बल

राज्य ब्यूरो, जागरण . नई दिल्ली : राजधानी में यमुना को साफ करने के नए प्रयासों के बीच, पर्यावरणविद सुनीता नारायण ने बृहस्पतिवार को इस संदर्भ में रणनीति बदले जाने की बात कही है।

उन्होंने दिल्ली सरकार और अधिकारियों को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने और नदी में बहने वाले नालों में उपचारित और अनुपचारित पानी के मिश्रण को रोकने की जरूरत जताई है।

सुनीता नारायण ने 'यमुना : एजेंडा नदी की सफाई का' रिपोर्ट भी जारी की

इंडिया हैबीटेट सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में सेंटर फार साइंस एंड एन्वायनरमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने 'यमुना : एजेंडा नदी की सफाई का' रिपोर्ट भी जारी की।

नारायण ने कहा कि दिल्ली सरकार ने 2017 से 2022 के बीच यमुना सफाई परियोजनाओं पर 6,856 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं।

इसके बावजूद, यमुना प्रदूषित और गंदी बनी हुई है। नदी को साफ करने के लिए केवल पैसे से ज्यादा एक नई और बेहतर योजना की जरूरत है।

टैंकरों के माध्यम से मल कीचड़ का प्रबंधन तेज और अधिक किफायती

नारायण ने कहा कि सीवर प्रणाली से नहीं जुड़े क्षेत्रों के लिए सरकार को महंगी पाइपलाइनों में निवेश करने की आवश्यकता नहीं है। टैंकरों के माध्यम से मल कीचड़ का प्रबंधन तेज और अधिक किफायती है।

उन्होंने कहा कि एसटीपी मानकों को पानी के पुनः उपयोग को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सीवर कनेक्शन के बिना क्षेत्रों से मल इकट्ठा करने वाले टैंकर इसे नालों अथवा नदी में न डालें।

प्रतिदिन 3,600 मिलियन लीटर उत्पन्न होता है सीवरेज

ऐसे सभी टैंकरों में जीपीएस ट्रैकर लगाए जाने चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मल को उचित उपचार और दोबारा उपयोग के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में ले जाया जाए।

उन्होंने कहा कि सीवर रहित क्षेत्रों से अनुपचारित पानी को छोड़े जाने से पहले नदी के पास उपचारित किया जाना चाहिए।

बकौल सुनीता, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के अनुसार, शहर में प्रतिदिन 3,600 मिलियन लीटर (एमएलडी) सीवेज उत्पन्न होता है।

संयंत्र अपनी क्षमता से केवल 80 प्रतिशत पर कर रहे काम

दिल्ली में 37 एसटीपी की कुल क्षमता 3,474 एमएलडी है, जो उत्पन्न सीवरेज का 96 प्रतिशत है। हालांकि, ये संयंत्र वर्तमान में अपनी क्षमता के केवल 80 प्रतिशत पर काम कर रहे हैं, जो केवल 2,777 एमएलडी का उपचार कर रहे हैं।

शेष सीवरेज बिना उपचारित किए यमुना में बह रहा है। उपचारित पानी में से केवल लगभग 1,960 एमएलडी ही आवश्यक गुणवत्ता मानकों को पूरा करता है।

सीएसई की रिपोर्ट में पांच सूत्रीय कार्य एजेंडा की सिफारिश

  •  सुनिश्चित करें कि जिन इलाकों में सीवरेज लाइन नहीं है, वहां के मल-मूत्र को इकट्ठा कर उसका उपचार किया जाए।
  •  सुनिश्चित करें कि उपचारित पानी वैसी नालियों में न बहाया जाए, जहां वह बिना ट्रीटेड दूषित जल के साथ मिल जाता हो।
  •  ट्रीटेड जल का पूरा उपयोग सुनिश्चित करें, ताकि वह प्रदूषण को न बढ़ाए।
  •  अपशिष्ट जल मानकों को पूरा करने के लिए मौजूदा एसटीपी को नवीनीकृत करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता है।
  •  नजफगढ़ और शाहदरा - के लिए योजना को फिर से तैयार करनी होगी। ये दो नाले नदी में प्रदूषण के भार का 84 प्रतिशत योगदान करते हैं। इंटरसेप्टर ड्रेन योजना इन दो नालों के लिए काम नहीं कर रही है।

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