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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Delhi News: सवालों के घेरे में आश्रम फ्लाईओवर की री-डिजाइनिंग, दोषी अफसरों पर होगा एक्शन; PWD करेगा जांच

Published: Thu, 08 May 2025 08:55 AM (IST)

परियोजना को सभी मामलों में 2023 में पूरा किया जाना था लेकिन समिति ने पाया कि लंबित बिलों का भुगतान ...और पढ़ें

आश्रम फ्लाइओवर की योजना बनाते समय लापरवाही बरती गई। फोटो- ANI
आश्रम फ्लाइओवर की योजना बनाते समय लापरवाही बरती गई। फोटो- ANI

HighLights

  1. पहले था 129 करोड़ का बजट
  2. बाद में बढ़कर हुआ 185 करोड़

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। विस्तारित आश्रम फ्लाईओवर की दोषपूर्ण री-डिजाइनिंग सवालों के घेरे में आ गई है। दिल्ली सरकार ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि डीएनडी फ्लाईवे तक इसके विस्तार की योजना बनाते समय आसपास के अतिक्रमण पर विचार क्यों नहीं किया गया?

दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की बात भी कही गई है। मालूम हो कि विस्तारित फ्लाईओवर के डिजाइन को निर्माण के दौरान बदलना पड़ा और 259 मीटर के विस्तार में अतिक्रमण को बचाने के लिए दीवार के बजाय पिलर खड़े कर दिए गए। इस परिवर्तन से इसकी लागत में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई और बजट 129 करोड़ रुपये के शुरुआती अनुमान से बढ़कर 185 करोड़ रुपये हो गया।

कब खुला था विस्तारित आश्रम फ्लाईओवर?

विस्तारित फ्लाइओवर को मार्च 2023 में यातायात के लिए खोल दिया गया। सूत्रों के मुताबिक आश्रम फ्लाईओवर के विस्तार की संशोधित परियोजना लागत को कुछ दिन पहले पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ द्वारा व्यय वित्त समिति (ईएफसी) के समक्ष लाया गया था। इसकी अध्यक्षता दिल्ली की वित्त मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करती हैं।

प्रस्ताव में कहा गया है कि “निर्माण कार्य के दायरे में बदलाव” के कारण लागत में संशोधन किया गया है। आश्रम फ्लाइओवर से डीएनडी फ्लाइओवर तक फ्लाईओवर के विस्तार के मूल प्रस्ताव को आप सरकार ने छह दिसंबर, 2019 को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी थी। ईएफसी ने बढ़ी हुई परियोजना लागत को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया।

पहले था 129 करोड़ का बजट

ईएफसी ने पाया कि कार्य के दायरे में बदलाव का कारण “प्रभावित क्षेत्र से अनधिकृत अतिक्रमण न हटाना, यातायात विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलना और परियोजना की शुरुआत में देरी के कारण अनुबंध संबंधी देनदारियों में वृद्धि” बताया गया था। समिति ने पाया कि निर्माण शुरू होने से पहले भूमि पर कोई अतिक्रमण न हो।

लंबित बिलों का भुगतान अभी भी बाकी

हालांकि, पीडब्ल्यूडी ने समिति को यह नहीं बताया कि उन्हें अतिक्रमण कब दिखाई दिया, परियोजना शुरू होने से पहले, निविदा दस्तावेज जारी करने से पहले या बोलियां आमंत्रित करने के बाद, जिसके परिणामस्वरूप समय और लागत बढ़ गई और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।

 एक अधिकारी ने बताया कि समिति ने पीडब्ल्यूडी को एक विस्तृत रिपोर्ट के साथ आने का निर्देश दिया है जिसमें उस समय का उल्लेख किया गया है जब अतिक्रमण देखा गया था।