नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ने के बाद पिछले तकरीबन महीने से लगे प्रतिबंधों के चलते आम लोगों के साथ-साथ कारोबारियों-व्यापारियों का काफी नुकसान हुआ है। इसको बाजार के जानकार भी स्वीकारते हैं। वीकेंड कर्फ्यू के साथ ही सम-विषम (इवेन-आड) आधार पर दुकानों को खोलने की बाध्यता का बाजारों में विरोध शुरू हो गया है। सोमवार को दूसरे वीकेंड कर्फ्यू के बाद बाजार खुलते ही सदर बाजार के कारोबारी नेताओं ने हाथों में काली पट्टी बांधकर इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन फेडरेशन आफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन (Federation of Sadar Bazar Traders Association) के नेतृत्व में हुआ था।

इस बाबत फेस्टा के अध्यक्ष राकेश यादव (Rakesh Yadav, president Federation of Sadar Bazar Traders Association) ने कहा कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के इस फैसले से व्यापारियों का बड़ा नुकसान हो रहा है। स्थिति यह है कि किसी व्यापारी की एक हफ्ते में दो या तीन दिन ही दुकानें खुल पा रही है। इसके कारण दुकान का खर्चा तक निकालना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही इसका बुरा असर बाजार पर भी पड़ रहा।

उधर, फेस्टा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि कोई भी फैसला इस तरह हो, जिसमें कोरोना संक्रमण को रोकने के साथ व्यापारियों की रोजीरोटी भी बचाई जा सकें। इस अवसर पर व्यापारी नेता सतपाल सिंह मंगा, हरजीत सिंह छपरा, दीपक मित्तल व रमेश सचदेवा समेत अन्य उपस्थित रहे। वैसे, इस तरह की मांग चांदनी चौक व कश्मीरी गेट समेत अन्य बाजारों से भी होने लगी है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण पर रोकथाम के मकसद से कई तरह के प्रतिबंधों के नाइट कर्फ्यू भी लगाया जा रहा है, जो रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रहता है। इसके अतिरिक्त शनिवार और रविवार को वीकेंड कर्फ्यू भी होता है।

दिल्ली में फिलहाल नहीं खुलेंगे स्कूल, एनसीआर के शहरों में कहीं 23 तो कहीं पर 26 जनवरी तक हुए बंद

Edited By: Jp Yadav