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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 28, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Vivek Vihar Fire: NCPCR ने दिल्ली सीएस और पुलिस कमिश्नर से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की उठाई मांग

Published: Tue, 28 May 2024 10:12 AM (IST)Updated: Tue, 28 May 2024 10:17 AM (IST)

एनसीपीसीआर ने दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त से आग लगने की घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ...और पढ़ें

NCPCR ने दिल्ली सीएस और पुलिस कमिश्नर से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की उठाई मांग
NCPCR ने दिल्ली सीएस और पुलिस कमिश्नर से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की उठाई मांग

एएनआई,नई दिल्ली। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार और पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा से आग लगने की घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। विवेक विहार का एक अस्पताल जहां सात नवजात शिशुओं की मौत हो गई। एनसीपीसीआर ने अपने पत्र में कहा कि आयोग की एक टीम ने 26 मई को घटना स्थल का दौरा किया और प्रोटोकॉल की बड़ी लापरवाही पाई।

एनसीपीसीआर ने अपनी चिट्ठी में कही ये बात

उन्होंने कहा कि घटना के अपने दौरे के दौरान आयोग ने पाया कि उक्त नर्सिंग होम में कोई आपातकालीन निकास नहीं था। चिकित्सा स्वास्थ्य देखभाल सुविधा में कोई आपातकालीन निकास नहीं होना भारत के राष्ट्रीय भवन संहिता, 2016 का गंभीर उल्लंघन है।

यह भी था पाया गया कि कोई भी अग्निशामक यंत्र या आपातकालीन अग्नि अलार्म काम नहीं कर रहा था और यहां तक ​​कि कोई स्वचालित जल छिड़काव प्रणाली भी काम नहीं कर रही थी, यह भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 2016 (अग्नि और जीवन सुरक्षा) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

घटना संबंधित अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा-NCPCR

टीम को सूचित किया गया कि आग लगने की घटना के समय, अस्पताल के कर्मचारियों के बजाय क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना दी। ऐसा लगता है कि नर्सिंग होम के कर्मचारियों को ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया था। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है एनसीपीसीआर ने कहा, यह घटना संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई। इसके अलावा, आयोग ने बताया कि घटना में शामिल परिवारों के सामने सबसे बड़ा मुद्दा एक जीवित बच्चे की पहचान और उस पर दावा करना था।

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पत्र में कहा गया है कि एनसीपीसीआर की टीम ने मृत शिशुओं के परिवारों और जीवित शिशुओं के परिवारों से भी मुलाकात की। यह देखा गया कि जीवित और मृत शिशुओं के कुछ परिवारों द्वारा सामना किए जाने वाले प्रमुख मुद्दों में से एक जीवित बच्चे की पहचान और उस पर उनके दावे का मुद्दा है।

दोषियों पर कानून के मुताबिक उचित कार्रवाई हो-NCPCR की मांग

एनसीपीसीआर ने अस्पतालों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए एनआईसीयू/पीआईसीयू और एसएनसीयू और बच्चों के लिए अन्य चिकित्सा सुविधाओं वाले सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की अग्नि सुरक्षा ऑडिट की सिफारिशों के संबंध में अपने 2021 के पत्र का भी उल्लेख किया।

एनसीपीसीआर ने कहा कि आयोग को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है और उसने एनसीटी दिल्ली सरकार द्वारा आयोग की सिफारिशों का पालन न करने को गंभीरता से लिया है। मामले की अत्यधिक संवेदनशीलता और तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए, आपसे अनुरोध है कि कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें।

जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रक्रिया - स्वास्थ्य सेवा विभाग, एनसीटी दिल्ली, अग्निशमन सेवा विभाग, नगरपालिका प्राधिकरण, संबंधित जिला प्रशासन और राज्य चिकित्सा परिषद। आपसे प्रमाणित दस्तावेजों के साथ मामले की, की गई कार्रवाई रिपोर्ट भेजने का भी अनुरोध किया जाता है। रिपोर्ट को 5 कार्य दिवसों के भीतर मेल और डाक द्वारा आयोग को भेजा जा सकता है।

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