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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कपिल ने LG लिखा खत, बोले- सीएम बना रहे हैं दबाव, न हो ठेकेदारों का भुगतान

By Amit MishraEdited By:
Published: Tue, 30 May 2017 07:56 PM (IST)Updated: Tue, 30 May 2017 10:48 PM (IST)

कपिल मिश्रा ने कहा कि दवाइयों के भुगतान के लिए मुख्यमंत्री मुख्य सचिव पर दबाव बना रहे हैं, जबकि ये अब इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं।

कपिल ने LG लिखा खत, बोले- सीएम बना रहे हैं दबाव, न हो ठेकेदारों का भुगतान
कपिल ने LG लिखा खत, बोले- सीएम बना रहे हैं दबाव, न हो ठेकेदारों का भुगतान

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने मंगलवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े तीन कथित घोटालों में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने पत्र में लिखा कि 29 मई को स्वास्थ्य विभाग से संबंधित भ्रष्टाचार के तीन मामले आपको सौंपे थे।

मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि ठेकेदारों के लंबित भुगतान 24 घंटे में कर दिए जाएं। मुख्यमत्री ठेकेदारों के बिल पास करवाने के लिए मुख्य सचिव पर दबाव बना रहे हैं, जबकि अस्पतालों में दवाई न होने के मामले में स्वास्थ्य मंत्री या स्वास्थ्य सचिव को कोई निर्देश नहीं दे रहे हैं।

मिश्रा ने कहा कि कुछ देर पहले उन्होंने दवा के तीन गोदामों में से एक का दौरा किया। वहां पार्किंग के बेसमेंट में कई ट्रक जीवनरक्षक दवाइयां डंप हैं। गुरु गोंविद सिंह अस्पताल, रघुबीर नगर की पार्किंग में ये करोड़ों रुपये की दवाइयां रखी गई हैं। इनमे सीरप, आंख और कान के ड्रॉप्स, रुई के बंडल, टैबलेट्स तथा जीवनरक्षक घोल के पैकेट शामिल हैं। वहां स्टोरेज सुविधा नहीं है।

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इन्हीं दवाइयों के भुगतान के लिए मुख्यमंत्री मुख्य सचिव पर दबाव बना रहे हैं, जबकि ये अब इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं। इन्हें डंप क्यों किया गया? मामले को क्यों नहीं देखा जा रहा है? अस्पतालों में दवाइयां खत्म होने के क्या कारण हैं? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इस बारे में सरकार कोई जानकारी नहीं दे रही है।

मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कुछ ठेकेदारों के बिलों का भुगतान का निर्देश नियमों से बाहर जाकर दिया, इसे भी भ्रष्टाचार का हिस्सा माना जाए। जब तक यह पता न चले कि ये दवाइयां किसके निर्देश पर खरीदी गई हैं, गुणवत्ता क्या है और अस्पतालों में दवाइयां क्यों खत्म हुई हैं, तब तक लंबित बिलों का भुगतान न किया जाए।

जब से उन्होंने इस घोटाले की जानकारी जनता को दी है तब से मुख्यमंत्री मुख्य सचिव पर दबाव बना रहे हैं। वह स्वास्थ्य मंत्री को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। सच जनता के सामने आना चाहिए, जनता स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की सच्चाई भी देखे। 

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