नई दिल्ली, विनीत त्रिपाठी। सड़कों पर हजारों की संख्या में ट्रैक्टर-टाली के साथ दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले आंदोलनकारी किसानों से दिल्ली को अशांत होने से बचाना दिल्ली पुलिस के सामने एक बड़ी चुनाैती थी। कश्मीरी गेट, लालकिला, अक्षरधाम, आइटीओ, नांगलोई, मुकरबा चौक, बुराड़ी बाईपास समेत कई मार्गाें पर उग्र हुए किसानों को रोकने में पुलिस काे खासी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि, तमाम दबाव और तनावपूर्ण स्थिति होने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने दिल्ली को अशांत नहीं होने दिया और स्थिति पर काबू पाने में कामयाब रही। 

 

पूर्व पुलिस आयुक्त निखिल कुमार का कहना है कि किसानों की ट्रैक्टर-रैली को लेकर दिल्ली पुलिस के ऊपर काफी दबाव था और पुलिस के सामने जो विकट स्थिति थी, उस हिसाब से दिल्ली पुलिस इससे सही ढंग से निपटी। निखिल का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर आंदोलन हो तो योजना के तहत कुछ होना मुश्किल हो जाता है, लेकिन फिर भी हजारों की संख्या में किसानों के दिल्ली में घुसने के बाद दिल्ली को अशांत नहीं होने दिया। उनका कहना है कि हालांकि, पुलिस ने किसानों की रैली के लिए जो मार्ग तय किया था, उसे फॉलो करवाना था। 

 

वहीं, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह का कहना है कि दिल्ली पुलिस के सामने सबसे आसान था कि वह रैली की अनुमति देने से इन्कार कर देती, लेकिन ऐसा मेरा व्यक्तिगत मानना है कि केंद्र सरकार रैली से इन्कार कर किसानों को मौका नहीं देना चाहती थी। दिल्ली पुलिस के सामने यह बड़ी मुश्किल थी कि ट्रैक्टर-ट्रॉली को दिल्ली में आने की अनुमति दें और इसे नियंत्रित भी रखें। प्रकाश सिंह का कहना है कि जिस तरह की स्थिति या माहौल बन चुका था, उसमें जिस तरह की गड़बड़ी हुई उसमें कोई आश्चर्य नहीं था। उनका कहना है कि जो कुछ हुआ दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन दिल्ली पुलिस के साथ सहानुभूति की जा सकती है क्योंकि स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल था, लेकिन अगर पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा तो इसका श्रेय दिल्ली पुलिस को जाता है।

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