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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 13, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Delhi Earthquake: एक हफ्ते में दूसरी बार भूकंप से दहला दिल्ली, प्रशासनिक अनदेखी से आ सकती है बड़ी तबाही

By Ranbijay Kumar SinghEdited By: Aditi Choudhary
Published: Sun, 13 Nov 2022 07:44 AM (IST)

Earthquake in Delhi- दिल्ली में नियोजित इलाकों में 30 साल पुराने करीब 96 प्रतिशत भवन भूकंप के तीव्र झटके झेल ...और पढ़ें

Earthquake in Delhi: एक हफ्ते में दूसरी बार दिल्ली-NCR में भूकंप के तीव्र झटके
Earthquake in Delhi: एक हफ्ते में दूसरी बार दिल्ली-NCR में भूकंप के तीव्र झटके

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली-एनसीआर में शनिवार शाम को एक हफ्ते में लगातार दूसरी बार तेज झटके के भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। भूकंप के लिहाजा से दिल्ली-एनसीआर सिस्मिक जोन चार में है। इसलिए भूकंप का खतरा ज्यादा है। ऐसे में किसी भी वक्त भूकंप के तेज झटके आने की संभावना बनी हुई है। इसके बावजूद प्रशासन इसे लेकर बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है।

यही वजह है कि न तो भूकंपरोधी इमारतें बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है और न पुरानी इमारतों की मजबूती सुनिश्चित करने के कारगर कदम उठाए जाते हैं। हाई कोर्ट के आदेश पर करीब दो साल पहले दिल्ली में नगर निगम ने नियोजित इलाकों में कराए गए सर्वे में 30 साल और उससे पुरानी करीब 96 प्रतिशत बहुमंजिली इमारतों का ढांचा भूकंप झेल पाने के अनुकूल नहीं पाया गया था।

फिर भी अभी तक भवनों की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए ज्यादा काम नहीं हुआ। वहीं अनधिकृत कालोनियों में भवनों के निर्माण में किसी दिशा निर्देश का पालन नहीं होता। प्रशासन की यह अनदेखी भारी पड़ सकता है और बड़ा भूकंप आने पर बड़ी तबाही हो सकती है। दिल्ली में 1799 अनधिकृत कालोनियां और बड़ी संख्या में लालडोरा क्षेत्र है। अनधिकृत कालोनियों में ही करी 40 लाख से अधिक आबादी रहती है लेकिन यहां निर्माण कार्य के लिए कोई मानक तय नहीं हैं।

इन अनधिकृत कालोनियों में लोगों की जिंदगी भगवन भरोसे हैं। वोट बैंक की राजनीति के कारण इस अनियोजित बसावट को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। अधिवक्ता अर्पित भार्गव के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में इमारतों को भूकंप रोधी और उनकी मजबूती सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली हाइकोर्ट के आदेश पर 2019 में एक एक्शन प्लान बना था।

इसके तहत दो वर्षों में सभी ऊंची इमारतों और अगले तीन वर्ष में सभी इमारतों की ढांचागत मजबूती सुनिश्चित करने को कहा गया था, लेकिन यह कार्य 10 प्रतिशत भी नहीं हुआ है।सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) में सस्टेनेबल हैबिटेट प्रोग्राम के निदेशक रजनीश सरीन ने कहा कि भूंकप रोधी निर्माण प्रणाली के अनुसार क्षेत्र भूकंप के लिहाज से जिस सिस्मिक जोन में होता है, उससे एक जोन अधिक ध्यान में रखकर भवन के ढांचे का निर्माण किया जाता है। यह मानक नियोजित इलाकों के भवनों व हाईराइज भवनों के लिए होता है। भूकंप की तीव्रता उसे झेल पाने के भवन की ढांचागत क्षमता से अधिक होने पर बड़ी तबाही आ सकती है।

रखरखाव का अभाव बन सकता है तबाही का कारण

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में बार-बार भूकंप आने की समस्या के मद्देनजर 30 साल और उससे अधिक पुराने भवनों के ढांचे को प्रमाणित कराने के लिए वर्ष 2020 में सर्वे हुआ था। इसका मकसद यह देखना था कि बहुमंजिली इमारतें भूकंप के लिहाज से कितनी सुरक्षित हैं। यह सर्वे लैब टेस्ट पर आधारित कम और आंख से भवन का ढांचा देखकर सर्वे अधिक किया गया। भवन के ढांचे की मजबूती का पता लगाने के निर्माण सामग्री और सरिया का सैंपल लैब में भेजकर जांच की जाती है ढांचा कितना मजबूत है। सर्वे में यह प्रक्रिया कम अपनाई गई।

इसके अलावा तीन दशक में निर्माण की तकनीक बदल गई और अब दिल्ली एनसीआर में हाईराइज भवन बन रहे हैं। समय के साथ उन हाईराइज भवनों का रखरखाव प्रभावित होता है। बिल्डर कुछ सालों बाद रखरखाव की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए को सौंप देते हैं, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ शामिल नहीं होते। इसलिए रखरखाव व मरम्मत कार्य मानकों के अनुरूप नहीं होता।

राजधानी के इन क्षेत्रों में है ज्यादा खतरा

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी दिल्ली, लुटियंस दिल्ली, सरिता विहार, पश्चिम विहार, वजीराबाद, करोलबाग, जनकपुरी भूकंप की दृष्टि से ज्यादा असुरक्षित है। छतरपुर, नारायणा, वसंत कुंज जैसे इलाके ज्यादा सुरक्षित हैं। राजधानी की पुरानी इमारतें 5 से 5.5 तीव्रता का भूकंप सह सकती हैं। दिल्ली में बनी नई इमारतें बनी हैं 6.6 तीव्रता के भूकंप को झेल सकती हैं।

वर्ष 2008 और 2015 में नेपाल में भूकंप आने के बाद दिल्ली सचिवालय, दिल्ली पुलिस मुख्यालय, विकास भवन, गुरु तेग बहादुर अस्पताल की इमारत को भी मजबूत किया गया था। नगर निगम द्वारा 30 साल और उससे अधिक पुराने भवनों के सर्वे के आंकड़े-

कुल चिन्हित भवन- 4655

मानकों पर खरा नहीं उतरने पर जिन भवनों को भेजा गया नोटिस- 4463

उन भवनों की संख्या जिसका ढांचागत आडिट रिपोर्ट निगम को मिला- 758

ढहाए गए भवन- 53

भवनों को मजबूती के लिए रेट्रोफिटिंग का हुआ काम- 16

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