नई दिल्ली [राहुल चौहान] Delhi Violence : उत्तर-पूर्वी जिले में पिछले महीने भड़के सांप्रदायिक दंगे में एक व्यक्ति की हत्या में गिरफ्तार तीन आरोपितों की जमानत अर्जी शुक्रवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने खारिज कर दी। दरअसल कड़कड़डूमा स्थित महानगर दंडाधिकारी राकेश कुमार रामपुरी की कोर्ट ने तीनों आरोपितों चांद मोहम्मद, रईस खान और फीरोज की जमानत अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी कि मजिस्ट्रेट कोर्ट को हत्यारोपितों को जमानत देने का अधिकार नहीं है। कानून के मुताबिक सत्र न्यायालय को ही हत्या के मामले में सुनवाई का अधिकार है। तीनों आरोपितों को भजनपुरा इलाके में दंगे के दौरान शाहिद की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। दंगे के दौरान शाहिद की गोली लगने से मौत हुई थी।

पुलिस ने पहले कोर्ट को बताया कि आरोपितों के खिलाफ दंगा भड़काने सहित अन्य मामलों में कोई सबूत नहीं मिले हैं। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामले में मुख्य दोषी को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, जबकि अन्य जो भीड़ में शामिल थे, उन्होंने पथराव किया और अभी भी उनकी पहचान नहीं की जा सकी है।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि चांद ने यह स्वीकार किया है कि वह उस छत पर मौजूद था जहां शाहिद को गोली लगी थी और भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया था। उसी दौरान हेडकांस्टेबल रतनलाल की गोली लगने से मौत हुई थी। साथ ही डीसीपी अमित शर्मा और एसीपी भजनपुरा दोनों घायल हुए थे। आरोपितों के वकील अब्दुल गफ्फार ने यह तर्क दिया कि इन तीनों लोगों पर शाहिद और रतन लाल की हत्या का आरोप गलत है। ये तीनों इसमें शामिल नहीं थे।

दंगे के आरोपित नाबालिग को मिली जमानत

दिल्ली दंगे के आरोपित एक अन्य नाबालिग को महानगर दंडाधिकारी राकेश कुमार रामपुरी की कोर्ट ने दस हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। वकील अब्दुल गफ्फार ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपित की उम्र 14 वर्ष थी। उस पर दंगे में शामिल होने का आरोप गलत है। मामले में 28 फरवरी को गिरफ्तार आरोपितों में से चार अभी न्यायिक हिरासत में हैं।

गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी जिले में सांप्रदायिक दंगे के दौरान 24 और 25 फरवरी को 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और करीब 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। 

Posted By: JP Yadav

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