जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मकर संक्रांति के साथ ही शादियों का मौसम आ गया है। इसे लेकर आयोजकों में उत्साह देखा जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना के मामलों में कमी तथा टीके की उपलब्धता के साथ नए साल का आगाज हुआ है। ऐसे में चंद मुहुर्त में ही शादियां धूमधाम से कराने की तैयारी हो रही है।

हालांकि, राज्य सरकार द्वारा शादी में 50 मेहमानों की तय संख्या से आयोजकों में असमंजस की स्थिति है। वहीं, शादी समारोह से जुड़े टेंट, कैटरिंग, बैंड बाजा व डीजे वालों में भी मायूसी है। क्योंकि इस कारण उनका कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। चांदनी चौक के व्यापार अरविंद गुप्ता की भतीजी की शादी कुछ दिन बाद ही है। पर वह मेहमानों को बुलाने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। वह कहते हैं कि कोरोना को लेकर जारी दिशानिर्देशों के साथ सरकार को मेहमानों की संख्या बढ़ाने पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।

पिछले वर्ष नवंबर में दिल्ली-एनसीआर में कोरेाना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने शादियों में मेहमानों की संख्या 50 तक सीमित कर दी थी। इसके पहले यह संख्या 100 तक थी। इससे कई आयोजकों को अंत समय में विवाह आयोजन में काफी बदलाव करने पड़े थे।

आल इंडिया टेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अनिल कुमार आजाद ने बताया कि सीमित मेहमानों में शादी समारोह की अनुमति से टेंट कारोबार पर काफी विपरीत असर पड़ा है। वैसे भी लाकडाउन के साथ सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी के चलते टेंट कारोबार ठप है। दिल्ली में पांच हजार से अधिक टेंट वाले हैं, जिनके सामने इस कारण गंभीर आर्थिक संकट है।

सरकार को अब आयोजनों में थोड़ी सहूलियत देनी चाहिए, जिससे टेंट कारोबार भी पटरी पर आए। गाजीपुर में गोल्डन पैलेस बैंक्वेट हाल के संचालक राजीव भी आयोजन में रियायत पर पुनर्विचार का आग्रह करते हुए कहते हैं कि कम से कम इसे 200 करनी चाहिए। तभी जाकर बैंक्वेट कारोबार में जान लौटेगी। आल दिल्ली साउंड्स एंड लाइट एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र बब्बर कहते हैं कि उनके कारोबार पर दोहरी मार पड़ी है। आयोजन छोटे स्तर पर होने से उनके डीजे की बु¨कग नहीं हो रही है।

दूसरे, राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आवाज के लिए मानक निर्धारित कर दिए हैं, जिसके चलते उन सबपर चालान का डर मंडरा रहा है। वैसे तो जुलाई तक चलने वाले शादियों के इस मौमस में जनवरी में कम ही लग्न है। चांदनी चौक स्थित प्राचीन श्रीसत्यनारायण मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रमेश चंद्र शर्मा के मुताबिक 14, 15, 16 व 17 जनवरी को शादियों के साथ शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

इसके अलावा इस माह कोई अन्य लग्न नहीं है। इसी तरह फरवरी में केवल 16 को बसंत पंचमी तथा मार्च में 15 को फुलैरा दूज के अवसर पर विवाह का मुहुर्त है। इसके बाद सीधे 20 अप्रैल के बाद ही विवाह के दिन आएंगे। 

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