नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली को इसका पहला वन्य जीव बचाव केंद्र (डब्ल्यूएआरसी) जल्द मिलने की संभावना है। 1.24 एकड़ जमीन पर यह केंद्र रजोकरी में बनेगा। यहां जंगल से भटक कर शहर में आ जाने वाले जंगली जानवरों का उपचार और पुनर्वास दोनों किया जाएगा। इसके अलावा यहां पक्षियों के लिए भी सुविधा होगी। दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे जंगली जानवरों को बचाने और रजोकरी केंद्र में लाने के लिए पांच सदस्यों की तीन टीमें भी गठित की जाएंगी।

इसके लिए क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण ने बजट स्वीकृत कर दिया है। एक महीने के भीतर इन टीमों का गठन कर दिया जाएगा, जबकि बचाव केंद्र इसी वर्ष के अंत तक तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यह केंद्र पक्षियों के लिए आरक्षित स्थान पर बनाया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के सामने वन्य पक्षी बचाव केंद्र बनाने का प्रस्ताव लंबित था। लेकिन समिति ने केवल पक्षियों के लिए बचाव केंद्र बनाने को अप्रासंगिक बताया।

मोंगोज, बंदर, सियार, सरीसृपों के लिए भी होगी सुविधा 

समिति ने वन विभाग से सिर्फ पक्षियों के लिए ही केंद्र बनाने की आवश्यकता को सत्यापित करने के लिए बचाए गए जंगली जानवरों का आंकड़ा प्रदान करने के लिए कहा। आंकड़े देखने पर पता चला कि इस बचाव केंद्र में अगर पक्षियों के साथ-साथ जंगली जानवरों जैसे नीलगाय, मोंगोज, बंदर, सियार, सरीसृपों के लिए भी सुविधा प्रदान कर दी जाए तो बेहतर रहेगा। अधिकारी ने बताया कि इस बचाव केंद्र के प्रस्ताव को शुक्रवार को रिज प्रबंधन बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। प्रस्ताव को बोर्ड की मंजूरी मिल जाती है तो फिर उक्त समिति से संपर्क कर आगे का काम प्रारंभ किया जाएगा।

बता दें कि इसके बनने से जानवरों को बड़ी राहत मिलेगी। यहां पर उनके लिए इलाज की भी सुविधा प्रदान की जाएगी। 

 

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