नई दिल्ली (जेएनएन)। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर दायर सिविल मानहानि मामले में मुख्यमंत्री के अधिवक्ता राम जेठमलानी द्वारा जेटली को शातिर (क्रूक) कहना दिल्ली हाईकोर्ट को पसंद नहीं आया है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि अगर यह टिप्पणियां मुख्यमंत्री की हिदायत पर की गईं हैं तो पहले सीएम आएं और इन्हें सही साबित करें। इसके बाद ही मानहानि मामले की सुनवाई होगी।

इससे पहले सुनवाई का कोई औचित्य नहीं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी टिप्पणियां दुष्कर्म के मामलों में होने लगीं तो पीड़िता का तो बार-बार दुष्कर्म होगा। अदालत ने टिप्पणियों को अपमानजक और अप्रिय करार देते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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कोर्ट ने माना कि बहस तय नियमों के अनुसार होनी चाहिए। एक व्यक्ति, जिसने मानहानि का मामला दायर किया है, इस तरह दोबारा उसका अपमान नहीं होना चाहिए। अदालत इसी मामले में आप नेता राहुल चड्ढा की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही है, जिसमें उन्होंने अपने बयान में संशोधन करने की अनुमति मांगी है।

सुनवाई के दौरान जेटली के वकील राजीव नायर व संदीप सेठी ने अदालत के समक्ष बुधवार को जेठमलानी द्वारा की गई टिप्पणियों का मुद्दा उठाया। इस पर अदालत ने इस बारे में अलग से अर्जी दायर करने को कहा।

जेटली के वकीलों का तर्क था कि अगर मुख्यमंत्री की हिदायत में जेठमलानी ने ऐसा कहा है तो वह मानहानि की रकम 10 करोड़ से बढ़ा कर 20 करोड़ करेंगे। वहीं, अगर जेठमलानी ने खुद ऐसा कहा है तो यह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के खिलाफ है। राहुल चड्ढा की अर्जी पर अब 26 मई को सुनवाई होगी।

पेश मामले में जेटली ने मुख्यमंत्री के अलावा आप नेता राहुल चड्ढा, संजय सिंह, आशुतोष, कुमार विश्वास और दीपक वाजपेयी समेत छह लोगों के खिलाफ 10 करोड़ का सिविल मानहानि मामला मामला दायर किया है।

आरोप है कि इन सभी ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) विवाद में उन्हें बदनाम किया है। उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी की है। इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

Posted By: JP Yadav

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