नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली दंगा मामले में आरोपित जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल व देवांगना कलिता की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा कि विदेशों में रहने वाले रिश्तेदारों से मिलने या बात करने के लिए कैदियों द्वारा वीडियो कान्फ्रेंस की सुविधा का उपयोग क्यों नहीं किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने कहा कि अदालत समझ सकती है कि हाई-रिक्स वाले कैदियों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के उपयोग की इजाजत नहीं दी जा सकती है, अन्य कैदियों के लिए क्यों नहीं।

कोर्ट कर रहा विचार 

वर्तमान में जमानत पर रिहा नताशा व कलिता ने आरोप लगाया था कि जेल द्वारा भारत के बाहर किसी को भी वीडियो कान्फ्रेंस की सुविधा का उन्हें इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा है।याचिका में उन्होंने कहा था कि उनके अलावा अन्य विदेशी कैदी भी हैं, जो अपने स्वजन से बात करने में असमर्थ हैं। दोनों की याचिका पर कोर्ट अब इस पहलू पर विचार कर रहा है।

टेलीफोन पर बातचीत की है अनुमति 

तिहाड़ की ओर से पेश वकील ने अदालत को सूचित किया कि सुरक्षा कारणों के चलते विदेशी कैदियों के परिवार को वीसी की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती है। हालांकि, अब टेलीफोन पर बातचीत की अनुमति है। हर विदेशी कैदी को अपील की तैयारी के लिए या जमानत हासिल करने या किसी अन्य कानूनी उद्देश्य के लिए कानूनी साक्षात्कार लेने की अनुमति है।

400 रुपये से शुरू होता है शुल्क 

वहीं, नरवाल की तरफ से पेश अधिवक्ता तुषारिका मट्टू ने कहा कि सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें अत्यधिक शुल्क देना पड़ता है और यह 400 रुपये से शुरू होता है। तिहाड़ जेल के अधिवक्ता के मौजूद नहीं होने के कारण अदालत ने सुनवाई नौ फरवरी 2023 तक के लिए स्थगित कर दी।

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Edited By: Prateek Kumar